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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/४०१

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अनन्तपुर—अनन्तमूल
जल-वायु—प्रधानतः आर्द्र नहीं। वर्षमें साधारणतः सत्रह इञ्च वृष्टि पड़ती है। नवम्बर और दिसम्बरके दिनों पारा ६७° से ८३° तक चढ़ता, और मई में कभी-कभी आधीरातको १००° पर भी पहुंच जाता है। सन् १८२० ई॰ से अट्ठारह वर्ष तक हैज़ेकी बीमारी बड़े ज़ोरसे रही थी। बुखार ग़ज़बका चढ़ता है। चेचक बहुत ही मामूली बीमारी है। पशु-रोगने कितने ही बार हलचल डाली थी; किन्तु सन् १८४०, १८५०, १८५७ और १८६८ ई॰ के बीच जो उपद्रव मचा, उसकी बात कही जा नहीं सकती। गूटी, ताड़पत्री, कल्याणदुर्ग, पेनू कोण्डे और अनन्तपुरमें स्थानीय और मूनिसिपल फण्डसे ग़रीबोंको बेदाम दबा देनेका प्रबन्ध बंधा है। ऐसे दवाख़ानोंकी गिनती बढ़ते जाती है।

२ उक्त ज़िलेका एक ताल्लुक़। इसका क्षेत्रफल ८८८ वर्गमील है, जिसमें कोई सवा सौ गांव और कई हज़ार घर आबाद हैं। जन-संख्या कोई एक लाख देखते हैं। सारे क्षेत्रफलमें सैकड़े पीछे सत्तर बीघे खेती होती, और तर ज़मीन आधी से ज्य़ादा आमदनी अदा करती है। मामूली तौरपर ताल्लुक़ हमवार मैदान है, उत्तर और उत्तर-पूर्व पहाड़ी सीमाको बांधे है। यहांसे अनन्तपुर, बुक्कराय-समुद्रम्, ताड़मारी और सिंहानमलयको सड़क गई है। अनन्तपुर और सिंहानमलयके ही तालाब सबसे बड़े हैं, जिनसे बीस-बीस हज़ार एकड़ भूमि सींची जाती है। चियेड्दुर्ग सबसे बड़ा पहाड़ है, जो मैदानपर कोई १२०० फ़ीट ऊंचे उठा है। यह ताल्लुक़ गूटीकी मुनसिफ़ीमें लगता है।

३ उक्त ज़िलेका एक बड़ा शहर। यह गूटीसे दक्षिण सोलह और बेलारीसे दक्षिण-पूर्व इकतीस कोस दूर बसा है। यहां कोई बारह हज़ार लोग रहते। ज़िलेका हेडक्वार्टर, ख़ास पुलिस और मजिष्ट्रेटकी कचहरी, छोटा जेल, दवाख़ाना, स्कूल, डाकघर, और मुसाफ़िरका बंगला बना है। कहते, कि सन् ई॰ के १४ वें शताब्दमें विजयनगर-राजके दीवानने यह शहर बसाया; सन् १७७५ ई॰ में

जबतक हैदर अलीने न हड़पा, तबतक यह दीवान बहादुरके ही अधीन रहा था,।

४ मन्द्राज—कड़ापा ज़िलेके रायकोट ताल्लुक़का एक मन्दिर। यहां गङ्गायात्राका महोत्सव होता और उस समय इधर-उधरके सारे शूद्र इकट्ठा रहते हैं। कुछ वर्षसे यह जलसा फीका पड़ गया।

अनन्तपुरी—एक सुप्रसिद्ध वैदान्तिक और कृष्णचैतन्यके पूर्वपुरुष।

अनन्तभट्ट—१ आपदेवके पुत्र। अनन्तदेव देखो। २ यदु-भट्टके पुत्र, इन्होंने राजा अनूपसिंहके आदेशसे संस्कृत-भाषामें तीर्थरत्नाकर लिखा था। ३ सिद्धेश्वरभट्ट के पुत्र—इन्होंने सन् १६९३ ई॰ में गोविन्द-कृष्ण-रचित कुण्डमार्तण्डकी टीका बनायी थी। ४ अद्वैत-चन्द्रिका और सिद्धान्तचन्द्रिका नामसे नैयायिक ग्रन्थरचयिता। ५ तिथ्यादिनिर्णय-रचयिता। ६ नक्षत्रेष्टिनिरूपण नामक श्रीतग्रन्थकार। ७ नृसिंह-सर्वस्वके अन्यतम लेखक। ८ पदमञ्जरी नामक न्याय-ग्रन्थ-रचयिता। ९ प्रतिष्ठा-पद्धतिकार। १० प्रातिशाख्य-भाष्यकार। ११ भारत-चम्पू-काव्य रचयिता। १२ महाभाष्यप्रदीप-विवरण-प्रणेता। १३ कमलाकरभट्ट के पुत्र, इन्होंने संस्कृत भाषामें रामकल्पद्रुम, तत्पितृरचित जैमिनि-सूत्रभाष्यकी टीका और त्रिंशच्छ्लोकी व्याख्या- सुबोधिनी रची थी।

अनन्तमति (सं॰ पु॰) किसी बोधिसत्वका नाम।

अनन्तमायिन् (सं॰ त्रि॰) असीम रूपसे छली, जो बेहद धोखा दे।

अनन्तमिश्र—न्यायप्रदीप-रचयिता।

अनन्तमूल (सं॰ पु॰) अनन्तं सुदीर्घ मूलमस्य। लताविशेष जिसे शारिवा भी कहते हैं, जङ्गली चमेली। (Hemidesmus indicus) अनन्तमूलके पर्याय यह हैं,—हिन्दी—मगरबू, जङ्गलीचमेली, हिन्दी-सालसा; बंगला—अनन्तमूल, अनन्तोमूल; बिहारी—अनुन्तमूल; दक्षिणी—सुगण्डीपाला, नन्नारी, नाटका औशबह; बम्बैया—उपरमार; मारवाड़ी—अनन्तमूल उपलसरी; तामिल—नन्नारि; तेलगू—गदिमुगन्धि, पालचुक्कनिदेस, सुगन्धिपाल,