यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
४०३
अनपुंसक-अनभिभव
|
अनपुंसक (सं॰ क्ली॰) वह शब्द जो नपुंसक लिङ्गका न हो। यह शब्द व्याकरणमें व्यवहृत होता है।
अनपूपीय, अनपूप्य (सं॰ त्रि॰) अपूपके अयोग्य, जो रोटी या पूरीके क़ाबिल न हो।
अनपेक्ष (सं॰ त्रि॰) न अपेक्षते-अनुरुणद्धि-अच्; नत्र-तत्। १ अपेक्षाशूना, बेपरवा। २ अनुरोधरहित, बेलिहाज। ३ पक्षपातशूना, नातरफ़दार। ४ अवसर रहित, बेमौक़ा।
अनपेक्षत्व (सं॰ क्ली॰) १ अपेक्षाशूनाता, बेपरवायी। २ अनुरोधराहित्य, बेलिहाजी। ३ पक्षपातशूनाता, तर्फ़ दारीका न होना। ४ अवसरका अभाव, मौक़ेकी नामौजूदगी।
अनपेक्षा (सं॰ स्त्री॰) अपेक्षाका अभाव; बेलिहाजी,
बेपरवायी।
अनपेक्षित (सं॰ त्रि॰) १ अपेक्षा न किया हुआ, बैलिहाज़। २ ध्यान न दिया हुवा, बेगौर। ३ आशा न किया गया, नागहां।
अनपेक्षिन् (सं॰ त्रि॰) १ अपेक्षाशूना, बेपरवा। २ अनुरोधरहित, बलिहाज।
अनपेक्ष्य (स॰ त्रि॰) अपेक्षा न रखता हुआ, परवा न करनेवाला।
अनपेत (स॰ त्रि॰) न अपेतं बहिर्गतं अपगतं वा, नज-तत्। १ अबहिर्गत, न गुज़रा या गया हुआ। २ अपेत-भिन्न, अनुपेत; अलग न किया गया, लगा हुआ।
अनप्त (वै॰ त्रि॰) न आप्तम्, पृषोदरादित्वात् इस्खः। १ अप्राप्त, न मिला हुवा। २ निर्जल, जो पानीदार न हो।
अनप्नस् (वै॰ त्रि॰) नास्ति अपनस् रूपं यस्य, नञ्-बहुव्री॰। आपः कमाख्यायाम्। उण ४।२०७। १ रूपरहित, बेशक्ल। २ कर्महीन, बेकार। ३ अयोग्य, नालायक़।
अनप्सरस् (सं॰ स्त्री॰) स्त्री जो अप्सरा जैसी न हो, औरत जो परी -जैसी नहीं।
अनफा (सं॰ स्त्री॰) ग्रहोंका योगविशेष, सितारोंके आपसमें मिलनेका एक खास मौक़ा।
|
अनबन (हिं॰ स्त्री॰) द्रोह, विरोध; झगड़ा, झञ्झठ, खटपट, बिगाड़, फूट, खैंचतान।
अनबिधा, अनबेधा (हिं॰ वि॰) अविद्ध, न बेधा या छेदा गया। यह विशेषण मोतोके साथ लगाया जाता है।
अनबोल (हिं॰ वि॰) १ न बोलनेवाला, अनबोला।
२ मुंहचुप्या, मौन। ३ गूंगा, बेजीभ। ४ अपना सुख-दुःख न बतानेवाला, जो अपनी तकलीफ या आरामका हाल किसीसे न कहे।
अनबोलता, अनबोल देखो। (स्त्री॰) अनबोलती।
अनबोला, अनबोल देखो।
अनव्याहा (हिं॰ वि॰) अविवाहित; क्वांरा, जिसकी शादी न हुई हो।
अनभल (हिं॰ पु॰) अहित, हानि; बुराई, नुक़सान।
अनभला (हिं॰ वि॰) अनुत्तम, हेय; बुरा, खराब। (स्त्री॰) अनभली।
अनभाया, अनभावता (हिं॰ वि॰) अच्छा न लगा हुआ; अप्रिय, अरुचिकर; जो भला न मालम हो, नापसन्द।
अनभिग्रह (सं॰ त्रि॰) १ भेदरहित, बेफ़र्क़। (पु॰) २ भेदराहित्य, बेफ़र्की। ३ जैनमत विशेष, जो सब मत अच्छे समझता और सबमें मोक्षकी राह देखता है।
अनभिज्ञ (सं॰ त्रि॰) न अभिजानाति, अभि-ज्ञाक। अज्ञ, ज्ञानशून्य, मूर्ख; नादान, बेअक्ल़, बेवक़ूफ़।
अनभिज्ञता (सं॰ स्त्री॰) अज्ञता, ज्ञानराहित्य, मूर्खता; नादानी, बेवक़ूफी अनाड़ीपन।
अनभिद्रुह् (सं॰ त्रि॰) द्रोहशून्य, हसदसे ख़ाली; किसीका बुरा न चेतनेवाला।
अनभिधेय (सं॰ त्रि॰) न अभिधेयम्। अवाच्य, जो कहा न जा सके।
अनभिप्रेत (सं॰ क्ली॰) अभिप्रायसे विरुद्ध कार्य, इरादेके ख़िलाफ़ काम।
अनभिभव (सं॰ पु॰) न अभिभवः, अभावार्थे नञ्तत्। अभिभवका अभाव, पराजयका राहित्य; फ़तेहका न पाना, जीतका न होना।
|