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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/४२१

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अनवस्थ-अनवेक्षण
अनवस्थ (सं॰ त्रि॰) नास्ति अवस्था यस्य। अवस्थिति-शून्य, चञ्चल।


"अशरौरं शरौरेषु अनवस्थेष्ववस्थितम्।" (कठोप॰ २।२२)

अनवस्था (सं॰ स्त्री॰) न अव-स्था-अङ्, अवस्थितिः, नञ् तत्। आतश्वोपसग। पा ३।३।१६। १ अवस्थितिका अभाव, हस्तीकी नामौजूदगी। २ तर्कका विशेष दोष, बहसका खास ऐब; स्थिर किये जानेवाले विषयमें कल्पित विषय डाल तर्कका करना, साबित की जानेवाली बातमें अन्दाज़ो बात मिलाकर बहस बढ़ाना। "प्रामाणिको अनवस्था न दोषायति" (जागदीशी) तर्क देखो।

३ चञ्चलता, चुलबुलापन। ४ व्याख्याका अनन्त विकाश, बयानकी बेहद रवानगी।

अनवस्थान (सं॰ क्ली॰) न अव-स्था-लुप्रट, नञ् तत्। १ अवस्थितिका अभाव, ठहरावका न टिकना। (त्रि॰) नास्ति अवस्थानं यस्य, नञ् बहुव्रीः॰। २ चञ्चल, अस्थिर; चुलबुला, न ठहरता हुआ।
अनवस्थायिन् (सं॰ त्रि॰) चञ्चल, जल्द गुजर जानेवाला; जो ठहरता न हो।
अनवस्थित (सं॰ त्रि॰) न अवस्थितम्, नञ्-तत्। १ चञ्चल, चुल-बुला। २ अस्थिर, नापायदार। ३ व्यभिचार-दोष-युक्त, बुरे चालचलनवाला। ४ आधार रहित, बेचारा।
अनवस्थितचित्त (सं॰ त्रि॰) चञ्चलहृदय, चुलबुले मिज़ाजका; जिसका दिल डावांडोल रहै।
अनवस्थितचित्तत्व (सं॰ क्ली॰) १ मनका चाञ्चला, दिलका चुलबु लापन। २ वायुरोग, हवाकी बीमारी।
अनवस्थितत्व (सं॰ क्ली॰) चाञ्चला, चुलबुलापन; न ठहरनकी हालत।
अनवस्थिता (सं॰ स्त्री॰) व्यभिचारिणी, बुराकाम करनेवाली औरत।
अनवस्थिति (सं॰ स्त्री॰) न अवस्थिति; नञ्-तत्। १ अवस्थितिका अभाव, ठहरावका न रहना; अधैर्य, चाञ्चला; बेसब्री, चुलबुलापन। २ आचरणकी ढिलाई, चालचलनका ढीलापन।
अनवहित (सं॰ त्रि॰) ध्यानरहित, बेखयाल; जो दिल न लगाता हो।

अनवह्वर (सं॰ त्रि॰) न अव-ह-कौटिलो अप्; नञ्-तत्। अकुटिल, सरल; सीधा, जो टेढ़ा न हो।
अनवाँसंना (हिं॰ क्रि॰) नूतन पात्रको प्रथमतः कार्यमें लगाना, नये बरतनसे काम शुरू करना।
अनवाँसा (हिं॰ पु॰) १ कटे हुए खेतका पूला। २ अनवांसी जमीनमें पैदा हुआ अनाज। (वि॰) ३ काममें लाया गया।
अनवाँसी (हिं॰ स्त्री॰) १ बिस्वांसोका बीसवां भाग। एक बिख में चार-सौ अनवाँसी होती हैं। (वि॰) ३ काममें लायी गयी, बरती हुई।
अनवाच् (सं॰ त्रि॰) मौनशून्य, खामोशीसे खाली; जो चुपके न रहे।
अनवाञ्च् (सं॰ त्रि॰) निम्नभागको न झुकते हुआ, जो नीचेकी ओर नज़र न डाल रहा हो; सीधे ताकनेवाला।
अनवानता (सं॰ स्त्री॰) प्रचलित रहनेको दशा; सिलसिलाबन्दी।
अनवानम् (सं॰ अव्य॰) १ विना प्रश्वास, बेसांस साधे; एक खासमें, सांस लेकर; विना विक्षेप, दख़ल न देते हुए।
अनवाद (हिं॰ पु॰) कठोर कथन, बुरी बात।
अनवाप्त (सं॰ त्रि॰) न अवाप्तम्, नञ्-तत्। अप्राप्त, लाहासिल; जो हाथ न आया हो।
अनवाप्ति (सं॰ स्त्री॰) अप्राप्ति, हासिल न होनेकी हालत।
अनवाय, अनवय (सं॰ त्रि॰) नञ्-बहुव्री॰। 'अनवयशब्दस्य अनवायभावः। (देवराज) १ निरवयव, निराकार; न ठहरनको हालत। बेअजा, बेशक्ल; जिसके हाथ-पैर या रङ्ग-रूप न हो। (वै॰ अव्य॰) २ विना विक्षेप, बेठहरे हुए।
अनवेक्ष (सं॰ त्रि॰) १ ध्यानविहीन, बेदिल। (अव्य॰)२ विना ध्यान; बेदिलीसे।
अनवेक्षक (सं॰ त्रि॰) न अवेक्षकम्, नञ्-तत्। १ पर्यालोचनाहौन, गौर न करनेवाला। २ सत् और असत्की विवेचनासे शून्य, भले-बुरेकी पहचान न रखनेवाला।
अनवेक्षण (सं॰ क्ली॰) अनवेक्षा देखो।