सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/४३

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
४१
अकृष्टकर्म्मन्—अकोला
अकृष्टकर्म्मन् (सं॰ त्रि॰) अकृष्टं निर्दोषं निर्म्मलं वा कर्म्म यस्य। १ निष्पाप। २ सदाचार। ३ निर्दोष। ४ सदाचारी।
अकेतन (सं॰ त्रि॰) १ बेठिकाना। २ बिना घरवाला। ३ ख़ानाबदोश। ४ जङ्गली मनुष्य।
अकेतु (सं॰ पु॰) नास्ति केतुश्चिह्नं यस्य। अज्ञान। बेसमझ।
अकेल, अकेला (हिं॰ वि॰) किसी-किसी जगह इकला इकली भी बोलते हैं। दुकेलेका उलटा। जिसका कोई साथी न हो। १ एकाकी।
रिपु तेजसी अकेल अपि लघुकर गनिय न ताहि। (तुलसी)
२ अनुपम, अद्वितीय। ३ निराला। ४ एकता। ५ लासानी।
तानसेन अपने फ़नमें अकेला हो गया है।
अकेले (हिं॰ क्रि॰ वि॓) बिना साथी। अकेला ही। केवल।
अकेहरा (हि॰ वि॰) एकहरा, दोहरा नहीं।
अकैतव (सं॰ त्रि॰) न-कितव-अण्। कितव अर्थमें वञ्चक।
कितवान् कुशीलवान् क्रूरान् पाषण्डस्थांश्च मानवान्। (मनु ९।२२५।)
कितवान् द्यूतादिसेविनो (जुवाड़ी) नर्त्तकगायकान् (नचैया-गवैया)। कितव, कि-क्त। कितेन वाति, कित-वा-क। धूर्तताशून्य। सरल। ऋजु। सदाचारी। कपटहीन। सीधासादा। निश्छल। (हि॰ पु॰) भाववाचक, सिधाई।
अकैया (हि॰ पु॰) १ खुरजी। गोन। कजावा। वस्तु लादनेका थैला या टोकरा। २ अँकैयाका रूपान्तर। दाम कूतनेवाला।
अकोट (सं॰ पु॰) न-कोट। गुवाक। सुपारी (२) करोड़ों। असंख्य।
बाजे तबल अकोट जुझाऊ। चढ़ा कोप सब राजा राऊ। (जायसी)
अकोट—बरारके अन्तर्गत अकोला जिल़ेका एक ताल्लुक़ है। इसका क्षेत्रफल कोई ५१८ वर्ग-मील है और इसमें २३० शहर और गांव बसे हैं। कपास और तरह-तरह का अन्न यहां बहुतायतसे उत्पन्न होता है। अरगांव, तिलवा और हीबरखेड़ यह तीन अकोटके बड़े-बड़े

शहर हैं। अकोट अपने ताल्लुक़ेका सदर शहर भी है। यह नगर अकोलेसे कोई पन्द्रह कोस उत्तर है। इस नगरके प्रत्येक भवनमें कुएं बने और चारों ओर फुलवारियाँ और आमके बाग लगे हैं। कितने ही पत्थरके सुन्दर-सुन्दर और मेहराबदार भवन दण्डायमान देखे जाते हैं। बरारमें यह शहर कपास और रूईके व्यवसायके कारण बहुत प्रसिद्ध हो गया है। यहाँ रूई लेने-देने भारतीय और युरोपीय दोनों व्यवसाई एकत्र होते हैं और प्रति वर्ष कोई सत्तावन लाखका काम हो जाता है। यहाँसे रूई शीगांव भेजी जाती है। बनवानेसे व्यवसायी कालीन भी अच्छे तय्यार करते हैं। सप्ताहमें दो बार बाज़ार लगता है; एक बुधवार और दूसरा शनिवारको।
अकोढ़ई (हि॰ स्त्री॰) अक्रूर, सरल, नम्र, ऋजु। वह धरती जो सींचनेसे जल्द भर जाती है। निवान या निमान, जहाँ जल ठहरा रहता है।
अकोतरसौ (हि॰ वि॰) एक सौ एक। एक ऊपर सौ।
खंडरा खांड़ जो खंडे खंडे। बरी अकोतरसी कहें हण्डे॥ जायसी॰
अकोप (हि॰ पु॰) १ राजा दशरथके आठ मन्त्रियोंमें से एकका नाम। २ कोपका न होना, जिसमें कोप न हो, प्रसन्नता। यह विशेषणमें भी आता है। यथा—वह बड़ा अकोपात्मा है अर्थात् शान्त या प्रसन्न-चित्त है, उसको क्रोध नहीं आता।
अकोर (हि॰ पु॰) अंकोर देखो।
अकोरी (हि॰ पु॰) अँकोलका पेड़ (सं॰ अङ्ल कोल)।
अकोला—बरार प्रदेशके अन्तर्गत एक ज़िला। यह दक्षिण-हैदराबादके अङ्गरेज़ी रेज़ीडेण्ट द्वारा शासित होता है। इसके उत्तर सतपुरा पर्व्वत, दक्षिण सातमाला या अजण्टागिरि श्रेणी, पूर्व इलिचपुर और अमरावती और पश्चिम बुलडाना और ख़ानदेश ज़िला अवस्थित है। मोरना नदीके किनारेका अकोला शहर इसका सदर और बरारके प्रधान दीवानी कर्म्मचारियोंकी अदालत उसी जगह बनी है। मालगुज़ारी देनेकी सुविधाके लिये यह ज़िला नीचे लिखे पाँच भागोंमें बाँटा गया है,—अकोला, अकोट, बालापुर, जलगांव और ख़ामगांव।

११