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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/४३७

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अनाशिन्—अनास्था
तारीफ़ न किया गया। २ वश्यताविहीन, क़ाबूमें न आनेवाला। ३ अनाशान्वित, नाउम्मीद।

अनाशिन् (सं॰ त्रि॰) न नश्यति, णश-णिनि; कर्म-फलमश्नुते अश-णिनि इति वा। १ अविनश्वर, लाज़वाल, न मिटनेवाला। २ कर्मफल भोगसे रहित, जो किए हुए कर्मका फल भोग न करे।

अनाशीर्दा (सं॰ पु॰) १ आशीर्वाद न देनेवाला, जो दूसरेको मुबारकबाद न दे। २ अकृतज्ञ व्यक्ति; एहसानफ़रामोश शख्स।

अनाशु (सं॰ त्रि॰) णश-उण्, अश व्याप्तौ-उण् वा; नञ्-तत्। १ विनाशशून्य; लाज़वाल; मिटाया न जा सकनेवाला। २ अव्याप्त, न समाया हुवा। धन्वञ्चिद्ये अनाशवो जीराश्चिदगिरौकसः।" (ऋक् १।१३६।९) न आशुः शीघ्रः। ३ विलम्ब, क्षिप्रभिन्न, तेज नहीं, सुस्त।

अनाश्रमवास (सं॰ पु॰) १ आश्रमसे सम्बन्ध न रखनेवाला व्यक्ति, जो शख्श आश्रममें न बसता हो। २ आश्रममें न रहना, आश्रमके रहनेको छोड़ देना।

अनाश्रमिन् (सं॰ त्रि॰) न आश्रमी, नञ्-तत्। गृहाश्रमशन्य, चार आश्रममें किसीसे सम्बन्ध न रखनेवाला।

अनाश्रमी, अनाश्रमिन् देखो।

अनाश्रमेवास, अनाश्रमवास देखो।

अनाश्रय (सं॰ त्रि॰) नास्ति आश्रयो यस्य। १ आश्रयशून्य, अशरण; बेचारा, बेपनाह; सहारा न रखनेवाला। (पु॰) २ आश्रयराहित्य, बेपनाही, सहारेका न रहना।

अनाश्रित (सं॰ त्रि॰) १ सम्बन्धविहीन, बिला-ताल्लुक्, बेमेल। २ आश्रयसे पृथक् किया गया, पनाहसे छूटा हुवा, जिसे सहारा न रहा हो। ३ स्वतन्त्र, आज़ाद, जो किसीके अधिकार में रहता न हो।

अनाश्वस् (सं॰ त्रि॰) नञ् पूर्वात् अश्नातेः क्वसु-रिडभावश्च निपात्यते। भोगशून्य, न खाये हुवा, उपवास या फ़ाक़ा करनेवाला।

अनाश्वास (सं॰ पु॰) अभावार्थे नञ्-तत्। विश्वास

अथवा आस्थाका अभाव, ऐतबार या तस्कीनकी नामौजूदगी, भरोसेका न रहना।

अनाष्ट्र (सं॰ त्रि॰) भय अथवा भयावह शत्रुसे रहित, ख़ौफ़ या ख़ौफ़नाक दुश्मनसे आज़ाद।

अनास् (सं॰ त्रि॰) अस्यते निरास्यते ष्ठीवनमनेन आ-अस क्षेपे-क्किप्ः आः मुखं नास्ति तत् साधनत्वे-नास्य। आस्यरहित, विना मुख; लक्षण द्वारा बात न कर सकनेवाला, जो वक्त़ के मुताबिक न बोल सके।

"अनासोदस्युं रमृणः।" (ऋक् ५।२९।१०)

कोई-कोई लोग अनुमान करते हैं, कि इस अनास् शब्दसे अनार्यजातिका मतलब निकलता है। आर्य अनार्यजातिकी बात न समझ सकते, इसीसे उन्हें अनास् कहते थे। चीन और प्राच्य-भारतवासी मंगोलिया जातिकी नाक बहुत चपटी होने और वैदिक आर्य लोगोंके साथ उसके दस्युता करनेसे ही वेदमें वह चपटी-नाकवाली अनास् शब्दसे कही गयी है। यहांकी अनार्य जाति साधारणतः नकटी होती थी। इसीसे अनेक अनुमान करते हैं, कि वेदमें अनास् शब्दका अर्थ नकटा रखा गया।

अनास (वै॰ त्रि॰) नासाशून्य; नकटा, नाक न रखनेवाला। यह शब्द दस्यु और राक्षसके लिये व्यवहृत होता था।

अनासती (हिं॰ स्त्री॰) अशुभ घटिका, बुरी घड़ी।

अनासन्न (सं॰ त्रि॰) न आसन्नम्। असन्निहित, दूरस्थ; नज़दीक नहीं, दूर दराज़; जो पास न हो।

अनासादित (सं॰ त्रि॰) १ न मिला हुवा, न पाया गया, जिसपर आक्रमण न पड़ा हो। २ न हुवा, न गुज़रा, न रहनेवाला।

अनासादितविग्रह (सं॰ त्रि॰) युद्ध में अनभ्यस्त; जुङ्गका महावरा न रखनेवाला, जिसे लड़ाई करनेकी आदत न हो।

अनासिक (सं॰ त्रि॰) नास्ति नासिका यस्य। १ नक्कू, विकृत नाकवाला। २ नासिकाशून्य, नकटा, जिसकी नाक कट गयी हो।

अनास्था (सं॰ त्रि॰) नास्ति आस्था यस्य। १ आदररहित, बेइज्ज़त, जिसका कोई सम्मान न