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अनुक्रान्त—अनुगन्तव्य
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यजुर्वेदकी तीन अनुक्रमणी हैं,—एक आत्रेयी, एक चारायणीय और एक माध्यन्दिन शाखाकी। आत्रेयी अनुक्रमणीमें लिखा, कि वैशम्पायनने वह अनुक्रमणी यास्कको दी थी। यास्कके हाथसे यह तित्तिरिको मिली। इसी तरह तित्तिरिसे उक्ष और उक्षसे आत्रेयने इसे पाकर पद-रचना फैलायी है। सामवेदकी अनुक्रमणी दो प्रकारकी है। इसमें एकका 'नैगेयानामृक्ष्वार्षम्' और दूसरीका 'नैगेयाना-मृक्षुदैवतम्' नाम है। कोई-कोई अनुमान अड़ाते हैं, कि शेषोक्त अनुक्रमणी अधिक दिनकी नहीं बनी। अथर्ववेदकी केवल एक अनुक्रमणी मिलती, जिसे बृहत्सर्वानुक्रमणी कहते हैं। यह झगड़ेकी बात है, कि सिवा उसके उस समय अथर्ववेदकी दूसरी अनुक्रमणी थी या नहीं। बृहत्सर्वानुक्रमणी दशपटल में समाप्त पड़ी है। अथर्ववेद-संहिताके यावतीय विषयकी तालिका इसमें अतिस्पष्टरूपसे दी गई है। अनुक्रान्त (सं॰ त्रि॰) संसाधित, पठित अथवा नियमितरूपसे कृत, पहुंचा, पढ़ा या क़ायदेसे अञ्जाम दिया हुवा।
अनुक्रिया (सं॰ स्त्री॰) १ अनुकरण, नक़ल। २ पिछली रस्म।
अनुक्री (सं॰ पु॰) अनुक्रियते, अनु-कृ-ई-किञ्च। १ सद्यस्क नामक यज्ञ। २ पिछली रस्म या चाल।
अनुक्रोश (सं॰ पु॰) अनुक्रोशति अनेन, अनुक्रुश-आह्वाने रोदने च घञ्। १ करुणा, कृपा, रहम, तरस।— "कृप्रादयानुकम्पास्यादनुक्रोशः। (अमर) त्रि॰ अनुगतं क्रोशम्, गति-स॰। २ एक कोस चला हुवा, जो दो मील राह निकल गया हो।
अनुक्षण (सं॰ अव्य॰) वीप्सायां अव्ययी॰। १ प्रतिक्षण, हरवक्त़ पल-पल। २ अनवरत, लगातार। (त्रि॰) अनुगतं क्षणम्, गति-स॰। चिरकाल रहने-वाला, जो हमेशा बना रहे।
अनुक्षत्तृ (सं॰ पु॰) द्वारपालक या सारथीका सहायक, दरबान या गड़ीबानका हाज़िरबाश।
अनुक्षत्तृ (सं॰ अव्य॰) रात-रात, कई रातों।
अनुक्षेत्र (सं॰ क्ली॰) उड़ीसेमें (मन्दिरके) भृत्यको
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दिया जानेवाला पारिश्रमिक, जो उजरत उड़ोसेमें मन्दिरके नौकरको मिलती है।
अनुखञ्ज (सं॰ पु॰) प्रदेशविशेष, किसी मुल्कका नाम।
अनुख्याति (सं॰ स्त्री॰) आविष्कार करने अथवा संवाद देनेका कार्य, ईजाद निकालने या ख़बर लगानेकी बात।
अनुख्यातृ (सं॰ पु॰) आविष्कार करने अथवा समाचार सुनानेवाला व्यक्ति, जो शख़्श ईजाद निकाले या ख़बर लाये।
अनुग (सं॰ त्रि॰) अनु पश्चाद् गच्छति, अनु-गम-ड। १ पश्चाद्गामी, पीछे-पीछे चलनेवाला। २ सहचर, सेवक, साथ रहने या ख़िदमत उठानेवाला।
अनुगङ्ग (सं॰ अव्य॰) गङ्गायाम् विभक्त्यर्थेऽव्ययी॰। गङ्गामें, गङ्गाके पास।
अनुगणित (सं॰ त्रि॰) गिना हुवा, जिसका शुमार लग गया हो।
अनुगणितिन् (सं॰ त्रि॰) गिने हुवा, जिसने शुमार बांध लिया हो।
अनुगत (सं॰ त्रि॰) अनु-गम-क्त। १ पश्चाद्गत, पीछे पहुंचा हुवा। २ आश्रित, मातहत। ३ यथाक्रमगत, सिलसिले से चला। ४ संगृहीत, पकड़ा गया। ५ अखिल, समूचा। ६ विशेष, ख़ास। ७ अधीन, ताबेदार। (क्ली॰) ८ संगीतका समान समय, जो वक्त़ गाने में कम-ज्य़ादा न मालूम हो।
अनुगतार्थ (सं॰ त्रि॰) आ गये हुये अर्थका, जिसका मानी मिलता हो।
अनुगति (सं॰ स्त्री॰) अनु-गम-क्तिन्। १ अनुगमन, पश्चाद्गमन, पीछे रहनेकी चाल। २ अनुकार नक़ल। ३ मृत्यु, मौत।
अनुगतिक (सं॰ पु॰) १ पश्चाद्गामी व्यक्ति, पीछे पड़नेवाला शख्श। २ अनुकरण निकालनेवाला, नक़्काल।
अनुगन्तव्य (सं॰ त्रि॰) पश्चाद्गमन लगाने योग्य, पीछे-पीछे जाने क़ाबिला। २ अनुकरण करने योग्य जो नक़ल उतारने लायक़ हो।
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