मांस, काडलिवर-आयल (एक प्रकारकी मछलीके कलेजका तेल) और माल्ट इत्यादि। खानेकी औषध—सिरप आव फेरी आओडिड १० बिन्दु आधा छटांक पानीमें डालकर रोज दो बार पीना चाहिये। अथवा २ रत्ती आयोडिड आव पोटास, २ रत्ती ब्रोमाइड आव पोटास और आध छटांक कालंबोका फाण्ट एकमें मिलाकर रोज दो बार सेवन करे। आंखके भीतरी प्रयोगके लिए कोई ५ या १० बूँद टिङ्कचर आयोडिन आध छटांक गुलाबजल में मिलाकर नित्यप्रति १० बूँद पीड़ित आँखोंमें डालनेकी राय देते हैं। कोई-कोई आध छटांक निर्मल जलमें आध रत्ती एट्रोपिया मिलाकर, दो बूँद प्रति दिन या ४-५ दिनके अन्तरसे आँखोंमें डालनेको बात कहते हैं। इसके द्वारा आँखका तारा फैल जाता है; इससे फूला पड़ी आखों-से दिखाई पड़ता है। एट्रोपिया विष वेलोडोनाके वीर्य्यसे प्रस्तुत होता है; इसलिये इसको सेवन न करना चाहिये।
जबतक दो आँखेंमेंसे एकमें भी ज्योति रहे, तबतक फूलेमें नश्तर न लगाना चाहिये। क्योंकि एक आँखका फूला निकालनेकी चेष्टा करनेसे दोनों आखें मारी जा सकती हैं। यह बात निश्चित नहीं, कि अस्त्रप्रयोगसे फूला दूर ही हो जाता है।
अस्त्रप्रयोगके दो भेद हैं। एक तो यह, कि फ्लेके नीचेको पतली झिल्लीमें छेद करके फूलेका रस भीतर ही डुबा देना और दूसरे अस्त्र द्वारा फूलेका परदा निकाल लेना। पहले उपायमें बड़ी विपद् है। फूलेका पानी या रस भीतर डुबा देनेसे असह्य जलन उत्पन्न हो सकती है। इसलिये आजकलके कोई विज्ञ चिकित्सक ऐसी चिकित्सा नहीं करते। हमारे देशके सठिये यही उपाय जानते हैं, वह फूलेका रस आँखके भीतर डुबा सकते हैं, ऊपर उठाकर ला नहीं सकते। फिर, सभी सठिये एक कृत्रिम परदा लाकर रोगीको बहला देते हैं, और नेत्रमें अस्त्रप्रयोग करनेके बाद उसे दिखाकर कहते हैं, कि
फूलेको अच्छी तरह उठा लिया है; जब इसका रस पककर खड़ीकी भांति हो जायगा, तब अस्त्र-प्रयोग करेंगे। एक बार नश्तर लगानेसे यदि लाभन हुआ, तो जान लो, कि आरोग्य होनेकी आशा गई। किसी-किसीका फूला बिना दवाके हो आपसे आप कम हो जाता है, कुछ दिन पीछे फिर बढ़ने लगता है। होमिओपेथी—जो आँख उठनेके बाद फूला पड़ा हो, तो १२ डाइलूशन बेलोडोना एक बूँदके हिसाबसे पानीके साथ दिनमें दो बार सेवन करे। ३० डा॰ सलफर, ३० डा॰ फसफोरस, १२ डा॰ कानाविस, १२ डा॰ कालकेरिया, १२ डा॰ केनायम, ६ डा॰ यूफ्रेसिया और १२ डा॰ सिलिसिया प्रभृति औषधींके सेवनसे उपकार होता है। होमिओपेथीमें एक समय एक ही औषध सेवन करनेकी रीत है। वैद्यक—आंखोंके भीतर लगानेके लिये चन्द्रोदयवर्त्तका बताई गई है। हरितकी (हरड़), बच, कुटकी, पीपल, काली मिर्च, बहेड़ेका गाभा (मज्जा), शङ्खनाभि, मैनफल—यह सब औषधियाँ बकरीके दूधमें पीसकर बत्ती बना ले और रोज पत्थरके ऊपर बकरीके दूधसे इस बत्तीको घिसकर आँखोंमें लगाये। चन्द्रप्रभावर्त्ति, चन्दनाद्यावर्त्ति और नयनसखावर्त्तिसे भी कभी-कभी उपकार होता है।
अक्षपरि (सं॰ पु॰) हारका पासा। जिस पासेके पड़ने-से हार हो, पासेकी वह स्थिति, जिससे हार सूचित होती हो। (अव्य॰) जुआ खेलनेमें हार।
अक्षपाटक (सं॰ पु॰) अर्थ या सम्पत्तिशास्त्रज्ञ। व्यवहार जाननेवाला।
अक्षपाद (सं॰ पु॰) १ सोलह पदार्थवादी। न्यायशास्त्र प्रवर्त्तक गौतम ऋषि। (बहुव्री) २ तार्किक। ३ नैयायिक। महर्षि वेदव्यासने गौतम-प्रणीत न्यायशास्त्रकी निन्दा की थी, इसलिये उन्होंने प्रतिज्ञा की, कि वह व्यासका मुख न देखेंगे। पीछे जब वेदव्यासने उन्हें प्रसन्न किया, तब उन्होंने चरणमें नेत्र उत्पन्न करके उन्हें देखा अर्थात् नेत्रसे न देखनेकी अपनी प्रतिज्ञा अटल रखी। गौतम देखो।