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दबाव डालनेपर अवरुद्ध स्थान खुल जाता है। यह प्रक्रिया अति सहज ही सम्पन्न होगी। पहले बड़ी पिचकारीको डण्डी मलद्वारमें अन्त्र के अनेक दूर पर्यन्त ठेल दे। पीछे मलद्वारके पास डण्डीकी चारों ओर कपड़ेसे दबा धीरे-धीरे जलको भीतर पहुंचाना चाहिये। उदर जलसे भर जानेपर गुह्यद्वार को दबा पेटको निम्नदिक्से ऊपरकी ओर रगड़ दीजिये। इस प्रकरण द्वारा अवरुद्ध स्थान खुल सकेगा। अनेक चिकित्सक आध या एक सेर कच्चा यारा अथवा छर्रा पेटमें पहुंचानेका परामर्श देते हैं। उनके मतमें पार किंवा शीशेके दबावसे अवरोध टूट सकेगा। अनेक विज्ञ चिकित्सक तम्बाकूवाली पिचकारी लगानेकी भी व्यवस्था बताते हैं। किन्तु इस सकल चिकित्सामें विपदु पड़नेकी सम्भावना रहेगी। औषधके मध्य अफीम ही श्रेष्ठ है। १ ग्रेन मात्रा में अफीमका सार ६।८ घण्टे अन्तरसे खिलानेपर रोग कितना ही सुस्थिर पड़ सकेगा। विशेषतः अफीम द्वारा अन्त्र की कृमिवत् गति घटती, जिससे पेटकी यन्त्रणा भी कुछ मिटती है। इस रोगमें वमन उत्कट लक्षण होगा। पतला द्रव्य खाते ही उलट पड़ता है। इससे रोगीको अधिक पथ्य देना निष्फल होगा। पिपासा बढ़नेपर पुनःपुनः शीतल जलसे मुख धोने में कष्ट घट जाता है। मध्य-मध्य बरफ़के छोटे-छोटे टुकड़े भी मुखमें दबा रखनेको देना चाहिये। मांसका सार, यवका दलिया प्रभृति यत्सामान्य ही खिला रोगीको जीवित रखनेकी चेष्टा करे। किन्तु पथ्यादि पिचकारीसे पहुंचाना उचित होगा। उससे वमन किंवा आध्मान नहीं बढ़ता। इस पीड़ामें पेट फाड़ अन्त्र का अवरोध निकालनेकी विशेष चेष्टा की गयी थी। किन्तु उससे चिकित्सक प्रायः कृतंकार्य न हो सके। कर्कट प्रभृति रोगमें सरलान्त्र, रुकते, अवरोधपर कृत्रिम मलद्वार बना देनेसे रोगी कुछ दिन पर्यन्त जी सकेगा। अन्त्री (सं॰ स्त्री॰) वृद्धदारक लता।
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अन्त्रोली चारोली—गुजरातके एक राष्ट्रकूट नृपति। सन् ७४७ ई॰ के समय इन्होंने सूरतमें भूमिको उत्-सर्ग किया था। दानपत्र वलभी भाषामें दो ताम्र-फलकपर लिखा गया। देखनेसे मलूम होता, कि
पूर्वकालमें राष्ट्रकूट नृपति गुजरात और मालवेके स्वतन्त, शासक रहे।
अन्थक (सं॰ क्ली॰) अङ्गार।
अन्थिग—बम्बई प्रान्तके कनाड़ जिलेवाले एक पल्लव नृपति। देवली-शिलालेखमें लिखा है, कि तृतीय कृष्णने काञ्ची और तञ्जोरको दबा इन्हें भी संग्राममें हराया था।
अन्द (सं॰ पु॰) बन्धन, लपेट।
अन्दर—मन्द्राज प्रान्तके दक्षिण कनाड़ा ज़िलेका एक घाट। यहांसे राह महिसूरको गयो; किन्तु उसमें गाड़ियोंका गुज़र हरगिज़ नहीं हो सकता।
अन्दामान (अंडमान Andaman) बङ्गालकी खाडीमें स्थित द्वीपसमूह। वहां छोटे और बड़े मिलाकर सब द्वीप २०४ हैं। यह हुगलीके मुहानेसे ५९० मील दूर हैं। द्वीपसमूह २१९ मोल लम्बा और ३२ मील चौड़ा और समुद्र-तट दनदानेदार है। पोर्टब्लेयर, एलफिन्सटन-हावर, सृ, अर्ट साउंड और पोर्टकार्नवालिस आदि बड़े-बड़े बन्दर हैं। समुद्र-तट पर हर जगह मूंगा पाया जाता है।
अन्दामानकी स्थिति एक प्रकारसे बहुत उपयोगी है। खाड़ीमें यदि कोई अन्धड़ आता है, तो मांझी अन्दामानसे ही उसकी दिशा तथा उसके ज़ोरका अनुमान कर लेते हैं। मौसमका भी ठीक-ठीक ज्ञान यहां ही से होता है। व्यापारियोंकी इसलिये अन्दामान अधिक लाभ पहुंचाते हैं। सन् १८६८ ई॰ से पोर्टब्लेयरमें जलवायुका अनुमान करनेके लिये एक सृशन स्थापित है। अन्दामानकी आबहवा न बहुत गर्म और न बहुत ठण्डी ही है। समुद्री हवा के कारण यहां गर्मीका वेग नहीं बढ़ने पाता। वर्षाका समय अनिश्चित है। उत्तरपूर्वीय मानसून चलने पर सूखा रहता है और दक्षिण-पश्चिमीयके समय वर्षा होती है। एक स्थानपर ही भिन्न भिन्न कालमें |
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अन्त्रावरोध-अन्दामान