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अन्ध-अन्धकार
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पण्डित आजतक इस बातकी कोई मीमांसा न बता सके, गर्भके भीतर सन्तान अन्ध क्यों हो जाता है।
अन्य प्रकारका अन्ध जन्मसे नहीं होता। जन्म के बाद किसी समय नाना प्रकार रोगसे चक्षु फूटेगा। चक्षु शब्दमें देखो, कैसे दर्शनज्ञान आता एवं चक्षुका कौन-कौन स्थान नष्ट होनेसे मनुष्यादि अन्ध पड़ता है। हमारे शास्त्रानुसार पूर्वजन्मार्जित पापके कारण मनुष्य अन्ध बनता है। जात्यन्ध व्यक्ति विषयका उत्तराधिकारी न हो सकेगा। ज्ञान न रखनेवाले-को अज्ञानान्ध, जन्मावधि अन्धेको जात्यन्ध, दिनमें न देख सकनेवाले को दिवान्ध, रातको न देख सकने- वालेको रात्र्यन्ध और रङ्ग न पहचान सकनेवालेको वर्णान्ध कहते हैं। मेष, वृष एवं सिंहको दिवान्ध और मिथुन, कर्कट एवं कन्याको रात्र्यबन्ध राशि बतायेंगे। रात्र्यन्ध और वर्णान्धका विवरण चक्षु शब्दमें देखो। २ धुंधला, अन्धा बना देनेवाला, जो नज़रको रोके। अन्धयतीति, अन्ध चु॰ प्रेरणे णिच्-अच्। (क्ली॰) ३ अन्धकार, अंधेरा, तारीको। ४ अज्ञान, नादानी। ५ जल, मैला पानी। ६ अन्न। ७ मुनिविशेष। अन्धमुनि पहले वैश्य एवं इनकी स्त्री शूद्रकन्या थी। सरयू कूलमें इनका आश्रम था। किसी दिन इनके सन्तान कुम्भमें जल भर रहे, पास ही राजा दशरथ भी थे। वह उसी वनमें मृगया खेलने गये थे। उन्होंने जलका शब्द सुन मनमें ठहराया, कोई मदहस्ती जल पीता है। उसीपर उन्होंने शब्दानुसार वाण चलाया। ऋषिकुमार उसकी चोटसे मर गये। पीछे अन्धमुनिने अपने पुत्रका सत्कार साध पुत्रशोकसे सस्त्रीक ज्वलन्त चितापर चढ़ प्राण छोड़े। अन्धक (सं॰ पु॰) अन्ध-खुल्। १ दैत्यविशेषका नाम। दितिके गर्भ एवं कश्यपके औरससे इसका जन्म हुवा था। इस दैत्यके महा अत्याचारी बननेपर महादेवने इसे मार डाला। (हरिदंश)
अन्ध एव अन्धकः, स्वार्थे कन्। २ बृहस्पतिके ज्येष्ठभ्राता। ममताके गर्भ, उतथ्यके औरससे यह उत्पन्न और वृहस्पतिके शापसे जात्यन्ध हुये थे।
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इनका अपर नाम दीर्घतमा रहा।(महाभारत) ३ यदुवंशके नृपतिविशेष। यह सत्वतके पुत्र थे। अन्धकके चार पुत्र उत्पन्न हुये। उनके नाम थे,—कुकुर, भजमान, शुचिकम्बल एवं वर्हिष। (विष्णुपुराण ४।१४ अ:) ४ देशविशेष। ५ मुनिविशेष। ६ तुम्बुरु (त्रि॰) ७ अन्ध, नाबीना।
अन्धकक्षयकर (सं॰ त्रि॰) अन्धकानां यादवानां क्षयकरः नाशकरः, ६-तत्। १ विष्णु, जिन्होंने यादवोंको मारा था। अन्धकस्य दैत्य विशेषस्य क्षय-करः। २ महादेव।
अन्धकघातिन् (सं॰ पु॰) शिव, अन्धक राक्षसको जिन्होंने मारा था।
अन्धकमृत्युजित् (सं॰ पु॰) अन्धकः असुरविशेषः मृत्यु-र्मरणं तौ जयति; अन्धक-मृत्यु-जि-क्किप्, उप-स॰। महादेव, जिन्होंने अन्धकदैत्य और मृत्यु को जीता था।
“मदनान्धकमृत्युजित्।” (नैषध ४।९७) अन्धकरिपु (सं॰ पु॰) अन्धकस्य रिपुः शत्रुः, ६-तत्। महादेव श्लेष काव्यादिमें इस शब्दसे अन्धकारनाशक सूर्यचन्द्रका भी अर्थ आता है।
अन्धकवृष्णि (सं॰ पु॰) अन्धक और वृष्णिके सन्तान।
अन्धस् (वै॰ क्ली॰) अन्धकार, छिपाव, तारीकी, पोशीदगी।
अन्धकाक (सं॰ पु॰) काकाकार पक्षी, कौवे-जैसी एक चिड़िया।
अन्धकार (सं॰ पु॰ क्ली॰) अन्धं करोतीति; कृ-अण्, उप-स॰। तिमिर, तमः, आलोकका अभाव, तारीको, अंधेरा।
‘अन्धकारोऽस्त्रियां ध्वान्तं तमिस्र तिमिरंतमः॥’ (अमर) प्रायः सकल देशके ही प्राचीन इतिहास में लिखा है, कि सृष्टिसे पूर्व जगत् केवल अन्धकारमें आवृत था। उसके बाद सूर्य, चन्द्र, तारा प्रभृति उत्पन्न होनेपर जगत्में प्रकाश हुआ। अन्धकारक (सं॰ पु॰) क्रौञ्चद्वीपके अन्तर्गत देश-विशेष। यह प्रावरक और मुनि नामक देशके मध्य
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