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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/६

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अउघड़—अँकरोरी
में विभूति लगादी जाती है फिर वस्त्र पहिना कर उसे समाधि देदी जाती है। इसके बाद वेही तीनों दलके मनुष्य उसके पास जो कुछ रहता है ले लेते हैं। यह शिवके उपासक हैं। कनफट् योगियों की तरह शिव की उपासना यह भी किया करते हैं गले में तार और शैली सदा पहिने रहते हैं। दो तीन विलस्त लम्बा एक काला पदार्थ डोरी में बांध कर गले में मालाके समान पहिर लेते हैं; इसीको नाद कहते हैं और जिस सूत की माला में वह गुँथा जाता है उसको शेली कहते हैं। किसी संन्यासीके गलेमें नाद और शेली देखनेसे ही समझना चाहिये कि यह औघड़ सम्प्रदाय का मनुष्य है। यह संन्यासी शैवों की तरह गेरुआ वस्त्र पहिनते हैं, माथे पर जटा रखते हैं, समस्त शरीर में भस्म लेपन करते हैं और ललाट में विभूति लगा कर त्रिशूल का चिन्ह बनाते है। इस मत वालों में से कितने ही शिवमन्दिर में पूजन करते हैं, कितने एक स्थान में बैठ कर शिव का ध्यान करते, और कितने ही सदा तीर्थाटन किया करते हैं।
अउधड़ योगी गोरखनाथ को शिव का अवतार समझते हैं। गोरखनाथ हठयोगी थे अतएव इन्हें भी हठयोग के नियमानुसारही चलना पड़ता है। अतः इन्हें भी एक प्रकारके हठयोगी कह सकते हैं। हठप्रदीपिका प्रभृति ग्रन्थों में हठयोगका विषय बहुत कुछ लिखा है। इन उदासीन योगियों में कोई विवाह करके संसारी नहीं होता है। परन्तु विवाह न करने पर भी विषयवासना में बहुतेरे व्याप्त हो गये हैं। इन्हें कई गुरुओंसे शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। वे गुरु एक एक क्रिया करा देते हैं। कोई माथा मुड़ा देता है, कोई नाद या शैली पहना देता है। दशनामी संन्यासियोंमें जिसी तरह गिरी, पुरी, आदि उपाधियाँ रहती हैं; उसी तरह इन योगियों की उपाधि नाथ रहती है क्योंकि वह लोग अपने को बाबा गोरखनाथ के शिष्य समझते हैं और इसीलिये नाथ उपाधि द्वारा अपनी परिचय देते हैं। ये औघड़ योगी कनफट् योगियों के समान एक मत होने पर भी उनकी तरह दोनों कान छेदवा कर मुद्रा धारण नहीं

करते परन्तु गले में नाद और शेली पहनते हैं। गोरखपुर इनका प्रधान स्थान है। दशनामी संन्यासियों की तरह इनके मतमें भी ज्योतिमार्ग में प्रवेश करके मद्य मांस खाने की प्रथा प्रचलित है।
अंक—(सं॰ अङ्क) अङ्क देखो।
अंकक—(सं॰ अङ्कक) अङ्कक देखो।
अंककार—(सं॰ अङ्ककार) अङ्ककार देखो।
अंकगणित—(सं॰ अङ्कगणित) अङ्कगणित देखो।
अँकटा—(हिं॰ पु॰) कङ्कड़का छोटा टुकड़ा। अनाजमें मिला हुआ कङ्कड़का छोटा टुकड़ा जो उसमेंसे चुनकर निकाल दिया जाता है।
अँकटी—(हिं॰ स्त्री॰) बहुतही छोटी कंकड़ी।
अँकड़ी—(हिं॰ स्त्री॰) काँटी। हुक। तीरका मुड़ा हुआ फल। बेल। लता। लग्गी। फल तोड़नेका बाँसका डण्डा जिसके सिर पर फँसानेके लिये एक छोटी लकड़ों बँधी रहती है।
अंकधारण—(सं॰ अङ्कधारण) अङ्कधारण देखो।
अंकधारिणी—(सं॰ अङ्कधारिणिन्) अङ्कधारिणी देखो।
अंकधारी—(सं॰ अङ्कधारिन्) अङ्कधारी देखो।
अंकन—(सं॰ अङ्कन) अङ्कन देखो।
अंकना—(क्रि॰) आँकना।
अंकनीय—(सं॰ अङ्कनीय) अङ्कनीय देखो।
अंकपरिवर्त्तन—(सं॰ अङ्कपरिवर्त्तन) अङ्कपरिवर्त्तन देखो।
अंकपलई—(हिं॰ स्त्री॰ [सं॰ अङ्कपल्लव] अङ्कपल्लव देखो।
अंकपालिका—(सं॰ अङ्कपालिका) अङ्कपाली देखो।
अंकमाल—(सं॰ अङ्कमाल) अङ्कमाल देखो।
अंकमालिका—(सं॰ अङ्कमालिका) अङ्कमालिका देखो।
अँकरा—(हिं॰ पु॰) एक प्रकारका खर जो गेहूँके पौधोंके बीचमें उत्पन्न होता है। इसका साग बनता है और यह बैलोंके खिलानेके काममें आता है। इसका दाना या बीज काला, चिपटा, छोटी मूँगके बराबरका होता है, और प्रायः गेहूँके साथ मिल जाता है। इसे ग़रीब लोग खाते भी हैं।
अँकरी—(हिं॰ स्त्री॰) अँकरा कल्यार्थक प्रयोग।
अँकरोरी, अँकरौरी—(हि॰ स्त्री॰) कंकड़ी। खपड़ेका बहुत छोटा टुकड़ा।