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अभयन्दद—अभया
चूर्ण और मधु मिलाते हैं। हिङ्गुल, त्रिकटु (सोंठ, मिर्च और पीपल), विष, जीरक, टङ्गणरस, गन्धक एवं अभ्रको बराबर-बराबर और सबके समान अहिफेन डाल निम्बु के रसमें घोंटनेसे यह रस बनेगा।
अभयन्दद, अभयद देखो।
अभयपद (सं॰ क्ली॰) रक्षा रखने की लिखी हुयी चिट्ठी, जो काग़ज़ हिफ़ाज़त रखने को लिखा जाता हो।
अभयपुर—बिहार प्रान्तका कोई प्राचीन स्थान। इसी स्थानके नामपर मजरौत ग्वालावोंकी एक शाखा प्रसिद्ध है।
अभयप्रदान, अभयदान देखो।
अभयमुद्रा (सं॰ स्त्री॰) अभयनाम्नी मुद्रा, तन्द्रोक्त मुद्राविशेष।
अभयम्प्रद, अभयद देखो।
अभयराम—वृन्दावनके एक प्रसिद्ध कवि। सन् १५४५ ई॰ में इनका जन्म हुआ था।
अभयवचन (सं॰ क्ली॰) अभयवाच् देखो।
अभयवाच् (सं॰ स्त्री॰) अभयार्था वाक्। भय न रहनेका आश्वासवाक्य, जिस बातमें खौफ़ छुड़ानेका इक़रार रहे।
अभयसनि (वै॰ त्रि॰) शरण देते हुआ, जो हिफ़ाज़त कर रहा हो।
अभयसिंह—जोधपुरनरेश अजित्सिंहके पुत्र। सन् १७२४—१७५० में करणकविने 'सूर्यप्रकाश' नामक ग्रन्थ इनके कहनेसे लिखा था। सूर्यप्रकाशमें ७५०० श्लोक हैं और महाराज यशोवन्त सिंहके समयसे (सन् १६३८—१६८१ ई॰) महाराज अभयसिंहके समयतक (सन् १७३१ ई॰) राठौर वंशका इतिहास लिखा है। सन् १७३० ई॰ में मुहम्मद शाहने इन्हें गुजरातका अधिनायक बनाया था। भले आदमियोंने चाहा, कि भूतपूर्व अधिनायक मुबारिज़ उल्मुल्क शान्तिपूर्वक अपना पद परित्याग करते; किन्तु उन्होंने लड़नेका सामान बांध लिया। महाराज अपने भाई बख़्तसिंह और २०००० आदमीके साथ गुजरातका शासन हाथमें लेनेको आगे बढ़े थे। जब
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महाराजने पालनपुरमें डेरा डाला और मुबारिज़ उल्मुल्कको युद्धके लिये तैयार देखा, तब सरदार मुहम्मद गोरीको लिख भेजा,—आप अहमदाबाद अधिकार कीजिये और मुबारिज़-उल्-मुल्कको निकाल दीजिये, हम आपको अपना प्रधान मन्त्री बनाते हैं। सरदार मुहम्मदमें यह आज्ञा पालन करनेकी सामर्थ्य न थी, वह महाराजके आगमन की राह देखने लगे। महाराजके सिद्धपुर पहुंचनेपर सफ़दरख़ां बाबी और जवान् मर्द ख़ां बाबी राधनपुरसे जाकर साथ हो लिये थे। उसके बाद महाराजने अदालजपर धावा मारा, जो राजधानीसे चार कोस दूर रहा। मुबारिज़-उल्-मुल्कका डेरा अदालज और राजधानीके बीच ही पड़ा था। महाराज के वहां पहुंचते ही युद्ध हुआ और महाराजको पीछे हटना पड़ा। महाराजने अपना मोरचा बदल फिर भीषण रूपसे युद्ध किया, दोनो दल सेनापतिके संहारकी चेष्टा लगाये थे। किन्तु मुबारिज़-उल्-मुल्क और महाराजके गुप्तवेशमें लड़ने कारण कोई कृतकार्य हो न सका। पहले महाराजने शत्रुको मार भगाया था, किन्तु नदीपर मुबारिज़के दिल तोड़कर लड़नेसे राठोरोंको पीछे हटना पड़ा। राठोरोंने इकट्ठे होकर फिर भीषण रूपसे आक्रमण किया, अन्तमें शत्रु का बल अधिक रहनेसे सरखेज लौट आये। महाराजने मुबारिज़का यह हाल देख मोमिन ख़ां और अमरसिंहको सन्धिकी बात करने भेजा था। अन्तमें एक लाख रुपया लेकर मुबारिज़ अहमदाबाद छोड़नेपर राज़ी हुए और उदयपुरकी राह आगरे चले गये। महाराजने बाबियों के साथ गुजरात-अधिनायकको पिलाजी गायकवाड़, हमीद ख़ां और कांताजीसे माहीपर युद्ध करने में साहाय्य पहुंचाया था। महाराजके पुत्र रामसिंह और उनके चचा विजयसिंहमें युद्ध होनेसे महाराष्ट्र मारवाड़पर टूटे।
अभया (स॰ स्त्री॰) नास्ति भयं यस्याः, ५-बहुव्री॰। १ हरीतकीभेद, ख़ास किस्मकी हर। यह चम्पादेशमें बाहुल्यसे उपजती और पांच मुख रखती है। इसे लोग नेत्ररोगमें प्रशस्त समझते हैं। २ श्वेतनिर्गुण्डी।
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