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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/७५५

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अभिक—अभिक्षद

अभिनिवेश। इच्छा—'कामोऽभिलाषः'। सौम्य—अभिजातवाचि, मधुर सम्भाषिणीमें। आभिमुख्य—'अभ्युपेत्य —सामने पहुंच कर। वचन—'अभिधत्ते' बताता है। आहार—'अभ्यवहतः' भक्षित यानी खाया हुआ। स्वाध्याय—'वेदाभ्यासः' वेदका अभ्यास।

वस्तुतः, अभिके बाद जो शब्द आता, उसीका अर्थ झलकता है। अभि उस अर्थका द्योतक मात्र रहेगा।

अपि शब्दकी तरह अभिको भी क्रियाके साथ योग देनेसे उपसर्गसंज्ञा एवं गतिसंज्ञा मिलती है। इस अर्थमें यह भाग-भिन्न लक्षण, इस्थम्भूताख्यान और वीप्सा बतायेगा। लक्षण–'हरिमभिवर्तते' हरिकी लक्ष्य लगा रहा है। इत्यम्भूताख्यान—'भक्ती हरिमभि'-भक्त हरिविषयमें भक्तिविशिष्ट होगा। वीप्सा—'देवं देवं अभिसिञ्चति' सब देवताके मस्तकपर जल चढ़ाता है।

अभिक (सं॰ त्रि॰) अभिकामयते, अभि-कन्। कामुक, मैथुनेच्छाविशिष्ट, जिसको शहबत करनेकी खाहिश पैदा हुयी हो।
अभिकरण (सं॰ क्रो॰) १ प्रभाव, असर। २ मोहिनी, जादू।
अभिकाङ्घा (सं॰ स्त्री॰) अभि काङ्घयते, अभिकाङ्घ-भावे अ टाप्। अभिलाष, वाच्छा, ख़ाहिश, चाह।
अभिकाङ्क्षित (सं॰ त्रि॰) अभि काङ्क्षते स्म, अभिकाङ्क्ष-कर्मणि क्त। अभिलषित, वाञ्छित, लिप्सित, चाहा हुआ, खाहिश किया गया।
अभिकाङ क्षिन् (सं॰ त्रि॰) अभि-काङ्क्षते, अभिकाङ्क्ष-णिनि। अभिलाषयुक्त, आकाङ्क्षाविशिष्ट, चाहने या ख़ाहिश रखनेवाला, जो आकाङ्क्षा करता हो।
अभिकाम (सं॰ त्रि॰) अभिकामयते, अभि-कमणिच्-अच्। १ काममान, इच्छुक, खाहिशमन्द, चाहनेवाला। (पु॰) भावे घञ्। २ अभिलाष, खाहिश पर। (स्त्री॰) अभिकामिकी।
अभिकामिक (सं॰ त्रि॰) इच्छाविशिष्ट, मरज़ीका।
अभिकाल (सं॰ पु॰) रामायणोक्त सुप्राचीन नगरविशेष।

(रामायण २|६८|१७)

अभिकृति ( सं॰ स्त्री॰) सौ मात्राका छन्दोविशेष।
अभिकृत्वन् (सं॰ त्रि॰) अभि-कृ-वनिए तुगागमः। आभिमुख्यकारी, सामने आनेवाला।
अभिलप्त (स॰ त्रि॰) अभि-कृप्-क्त। सम्पन्न, नियत, सर्वथा प्रकाशित, सम्मुख प्रकाशित, भरापूरा, तैयार, ज़ाहिर, हाज़िर।
अभिक्रतु (सं॰ पु॰) आभिमुख्येन क्रतुः युद्धकर्म यस्याः, बहुव्री॰। बलवान्, युद्धकर्म करनेमें समर्थ, गुस्ताख, गर्म मिज़ाज।
अभिक्रन्द (सं॰ पु॰) जयजयकार, ललकार, ऊंचा शोर, जोरकी आवाज।
अभिक्रम (सं॰ पु॰) अभि-क्रम भावे घञ् न वृद्धिः। १ आरम्भ, आग़ाज़, इब्तिदा। २ आरोहण, चढ़ाई। ३ आक्रमण, हमला।
अभिक्रमण (सं॰ क्ली॰) निकट आगमन, नजदीककी आमद, प्राप्ति, पहुंच।
अभिक्रान्त (सं॰ त्रि॰) १ आगत, प्राप्त, पहुंचा हुआ। २ आक्रमित, हमला किया गया। ३ आरब्ध, जो शुरू हुआ हो।
अभिक्रान्ति (सं॰ स्त्री॰) अभि-क्रम-क्तिन्। अतिक्रम, उपक्रम, आमद, पहुंच।
अभिक्रान्तिन् (सं॰ स्त्री॰) अभिक्रान्तमत्वेन इष्टादि, इनि। उपक्रमकर्ता, उद्योगकर्ता, चलनेवाला, कामकाजी।
अभिक्रामम् (सं॰ अव्य॰) अभिक्रम आभीक्षस्यणमुल। अभिमुख आकर, नजदीक पहुंचके।
अभिक्रोश (सं॰ पु॰) अभि-क्रुश भावे घञ्। निन्दा, हिकारत।
अभिक्रोशक (सं॰ त्रि॰) अभि-क्रुश-ण्वुल्। निन्दक, आक्रोशक, हिकारत करनेवाला, जो किसीको बुराई बताता हो।
अभिक्षत्तु (सं॰ त्रि॰) अभि-चद-तृच्। हिंसक, कातिल, मार डालनेवाला। (स्त्री॰) अभिक्षत्री।
अभिक्षद (सं॰ त्रि॰) अभि-क्षद-अच्। हिंसक, कातिल, मार डालनेवाला। (स्त्री॰) अभिक्षदा।