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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu/६

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कपिलाचार्य-कपिल्लिका

कपिलाचार्य (सं० पु०) कपिलः कपिलनामा प्राचार्यः, कर्मधा०। १ कपिलऋषि। २ विष्णु।

"महर्षि: कपिलाचार्यः सम्भूतो मेदिनीपतिः।" (विष्णुस०) कपिलाजन (सं० पु०)कपिलं अञ्जनं यत्र, बहुव्री०। शिव, महादेव।

कपिलातीर्थ (सं० क्ली०) तीर्थ विशेष। इस तीर्थ में ब्रह्मचारी रह स्नान और पितृलोक तथा देवताओं की अर्चना करने से सहस्र कपिला गोदान का फल मिलता है। (भारत ८४।४५)

कपिलादान (सं० क्ली०) कपिलाया दानम्, ६-तत्। कपिलागोदान। मत्स्यपुराण में कपिला के दान का यह मन्त्र लिखा है—

"कपिले सर्वभूतानां पूजनीयासि रोहिणि। सर्वदेवमयी यस्मात् अतः शान्ति प्रयच्छ मे।।"

घण्टा, चामर, किङ्किणी, दिव्य वस्त्र एवं हेमदर्पण भूषित, पयस्विनी, सुशीला, तरुणा और वत्सयुक्ता कपिला देना चाहिये। इस दान से स्वर्गलाभ होता है।

कपिलाधिका (सं० स्त्री०) तैन्तपिपीलिका, तेलचट्टा।

कपिलापुर—दक्षिणापथ का एक नगर। (रेवाखण्ड १०।६) यह सम्भवतः नर्मदा किनारे अवस्थित है।

कपिलार्जक (सं० पु०)कपिलवर्ण-तुलसीविशेष, भूरी तुलसी का पेड़। कपिलावट (सं० पु०)कपिलया कृतोऽवटः। तीर्थविशेष। (भारत, वन ८४।२८) कपिलावर्त—बम्बई प्रान्त के भड़ौच जिले में नर्मदा और कपिला नदी का सङ्गमस्थान। स्कन्दपुराण के रेवाखण्ड में इसका नाम रुद्रावर्त लिखा है।

कपिलाश्व (सं० पु०) कपिलाः कपिलवर्णा अश्वा यस्य, बहुव्री०। १ इन्द्र! २ एक राजा। ३ सूर्यवंशीय कुवलयाश्व के पुत्र। कपिलासङ्गम—कपिला और नर्मदा नदी के सङ्गम का स्थान। यहाँ स्नान करने से अशेष फल लाभ होता है। इसके निकट अनेक पवित्र तीर्थ हैं। (रेवाखण्ड १३।५०) यह बम्बई प्रान्त वाले वर्तमान भड़ौच जिले के अन्तर्गत है। कपिलाहद (सं० पु०) तीर्थ विशेष। (भारत, वन ८४।१०)

कपिलिका (सं० स्त्री०)कपिला संज्ञायां कन्-टाप, अत इत्त्वम्। १ शतपदीभेद, किसी किस्म की कनसलाई। "शतपद्यस्तु परुषा कपिला चित्रा कपिलिका पोतिका रक्ता श्वेता अग्निप्रभा इत्यष्ट।" (सुश्रुत) २ पिपीलिकाविशेष, एक छोटी चींटी।

कपिली—नदीविशेष, एक दरिया। इसका प्राचीन नाम कपिला वा कपिलागङ्गा है।

कपिलोकृत (सं० वि०) अकपिलं कापिलं कृतम्, कपिल प्रभृति तद्भावे च्वि-कृ-क्त। कपिल बनाया हुआ, जो भूरा किया गया हो।

कपिलेन्द्रदेव—उत्कल के एक राजा। बाल्यकाल में यह किसी ब्राह्मण के मवेशी चराते थे। फिर इन्होंने उत्कलराज नेत्रवासुदेव के निकट जा नौकरी की। कार्यदक्षता गुण से यह नेत्रवासुदेव के अत्यन्त प्रियपात्र बन गये। वासुदेव के मरने पर इन्होंने अपने साहस बल से उत्कल का राजसिंहासन पाया था। इनके राजत्व का काल २७ वर्ष (१४५२-१४७० ई०) था।

कपिलेश (सं० क्ली०)- कपिलेन प्रतिष्ठापित ईशलिङ्गम्, मध्यपदलोपी। काशीस्थित शिवलिङ्गविशेष। "कपिलस्य महालिङ्गं कपिलेन प्रतिष्ठितम्। मुच्यन्ते कपयोऽप्यस्य दर्शनात् किं पुनः नराः।।" (काशीखण्ड)

कपिलेश्वर—१ एक प्राचीन नगर। २ मद्रास प्रान्त वाले गोदावरी जिले की रामचन्द्रपुर तहसील का एक ग्राम। यह अक्षां०-१६°४६' उ० और देशा०-८१°५७' पू० पर अवस्थित है। यहाँ की लोकसंख्या, पाँच हजार से अधिक है।

कपिलोमफला (सं० स्त्री०)-कपीनां लोम इव लोमावृतं फलं यस्याः, बहुव्री०। कपिकच्छु, केवांच।

कपिळोमा (सं० स्त्री०)-कपीनां लोम इव लोममञ्जरी यस्याः, बहुव्री०। रेणुका नामक गन्धद्रव्य, एक खुशबूदार बीज।

कपिलोह (सं० क्ली०)-कपिवत् पिङ्गलं लोहम्। १ पित्तल, पीतल। २ राजरीति, बढ़िया पीतल। पीतल देखो।

कपिलक (सं० पु०) कम्पिल्लक, नारङ्गी का चूरन।

कपिलिका (वै० स्त्री०)-कपिवर्णा वल्लिका, पृषोदरादित्वात् साधु। १ पित्तल, पीतल।