पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१०२

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रोगनिया नियाम नहीं करता यह मूग है। वैसे अहद्वारविमूढ वयानिदके प्रति स्वय परमेश्वरके उपदेशकी बात है। व्यक्तिको ऐणिक ऐश्वयमें कोई अधिकार नहीं है। उस हालनामा उदी के धममतका इतिहास है। यह धगमत मश और जीय मृत व्यतिके यशधर भी नद मृतवत् ! बहुत कुछ सुफिमतके जैसा है। माचरण करेगे तव जोनित और शानी हो उस सम्पत्ति | ___ ययाजिदके इस नये धममनमें विश्वास परफ बहुतेरे के प्रश्न उत्तराधिकारी माझे ज्ञाये गे इम सस्कारके | अफगान उसके निध्य हो गये । कायुल धार, युसुफ पात्ती हो पर उसने बहुतमे मारोगाम काम तमाम | आदि प्रदेशवासोने उसका मत प्रहर शक्ति करनेका हुकुम दे दिया था। यहा तक फि उमने तथा सम्पर अफगान सम्प्रदायको सृष्टि की । वे उद्धत उसके चार पुत्रनि दस्युति द्वारा अमीर उमरा आदि | साम्प्रदायिकगण उस समयके समृद्ध मुगल साम्राज्यके धनाढर मुमलमानोंका यथार teय लूट लिया था। विपद्धाचरण करनेस दान न मापे । सम्राट अश्यर लूटप मालका पाचन हिस्सा यह ए जग जमा शाहक शासनकालसे ले कर गाहजहाको समृद्धि के शेष रसता था और जरूरत पड़ने पर उसे अपने विश्वस्त तक रोशेनियों ने दिल्लायरका प्रतिपक्षताचरण पिया था। अनुवरों धीच वाट देना था। चयानिदक जात जो इस सम्प्रदायन बडो उनति की थी। दस्युत्ति में लिप्त रद कर भा वयाजिद या उसके उस समय उहोंने धर्मगुरु ययापिदको अपमा अधिनायक चार पुत्र कमी मो धमपयसे प्र नहीं हुआ था। ये मन । पना पर सावरफे शातिमय राज्यका शान्तिमन किया ___ सब सयमी और जिनेद्रिय थे, कभी भा कोइ कुकार्य । था। अफगानिस्तानके यति मातापुरम ययाजिदका मही करते थे। ये एफेश्वरोपासनाकारीका न कमी धन | मरामोजद है। टूटने और न उहे पिसी प्रकारका तरलीफ ही देते ययाजिदके उमार शेख, माल उद्दान, नूरउदीन और थे। सलाम धमके क्रियाकर्ममें बडे कट्टर थे। नित्य ५ धार नमान पढन थे। और तो पया, पकवरमें जलाल-उदोन नामक चार पुत्र तथा मार पातुन नाम एक कन्या था | मिया वयाजिदको मृत्युके बाद जलाल विश्वास करनेवाले के सिना दूसरे हाथ माग हुआ पशुमास तर भी नही बात थे। एक दिन ययाजिदने उद्दान धमगुरु धन पर गहो पर बैठा। २००७ हिजरीम मदुलासे कहा कि पैगम्बर महम्मद यणित सरियात् गजनोके अधिकार करने पर वह अक्सर द्वारा भेजे गये सनापतिके हाथ मारा गया । उसके मरने पर उगार रातिको समान, तरिकात् तारसाफ समान, इविक्न् शेखकालका मिया आहादाइ गद्दी पर बैठा । १०३७ घदमे समान और मारिफन् सूप्यक समान है। मामा को उचल करन रिमारिफ्त मिन्न गोर दुमरा कोई ) जिरीमें जहागोरके सनापतिने नवागढ दुगर्म उमा उपाय नहीं है। इसलाम धर्मका मरिपात् वा पञ्चाङ्ग काम तमाम दिया । शिष्यमण्डली उसे माहाद या साधन दर पर मुसलमानका पत्य है। नित्य इश्वरका इश्वरका भरतार मानता थी। माम अपना मजन करना तथा तसरिया और तदरील । वाद मादादादका लडा भवदुला कापिर गदी पर पाना मुसलमानका कत्तष्प है। मधिरुद हुआ। शाहजहाको सभामं उसको यही कातिर धयाजिदफे बनाये हुए कर उपदेश मध मिलते हैं। पा। १०४३ हिजराम उमा देहान्त हुमा। लाश पेशा घे मय प्राय भरवा, पारसा हिन्दी और पेगु (अफगानी) घरमं दफनाई गई। इसके बाद मुगलथे पडयनसे एक मापार्म हुए है। उसका 'माद पर मुमनिन' अन्य एक कर ययानि आरोप हुआ। आजदाके जमानमें भरवा मापा रा गया है। उम अधर्म लिया है कि नूरउद्दानफे पुन मिना दीरतापाद गुदमें मारा गया। परम पिता परमभ्याने मियाना बराइल द्वारा उसे पे] मरार दान एर पुत्र परिमदादने मुगल मेनापनि सैयद प्रेमको सिमा दो थे। उसका मायर भर रियान । पाके कीगलसे १०४८ १०म मयलीला शेष पी। इसग मामा पम्प उपरोद चार भाषामें लिखा है। इसमें स्नु गल्गवाद परमादनासो उपाधिष साथ दाक्षि