पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१०३

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रोप-रोहतक णायका ४ हजारी मनमनदार हुमा। १०५७ हिजरी में | अक्षा० २०३.30"३० नधा देशा० ७८२५ यूके उसकी मृत्यु हुई। | मध्य अवस्थित है। नगर के सामने छोटो नदी बानी रोप ( सं० पु०) रुप् वन् । १ कोध, गुस्मा२लदाईका | है। उस नदी अमर बाट आया करती है, इस कारण उमंग, जोश। ३ चिढ, कुढन । ४ वैर, विरोध, हेप। किनारे एका धावा कर दिया गया । उन वालुका- रोपण (सं० पु०) रोपति तच्छोला रुप (फ यमपटायेंभ्या ।। मयये किनारे प्रति सप्ताट लगती है। प्रतिवर्षक पा ३१२११५१) इति यु। १ पारद, पारा। पासीटा। माघमासो यहां तक मेला लगता है। राय देन मी ऊसर जमीन (ति०)। ४द्ध, गुरमा करनेवाला। वर्ष पहले शाणी सिन्द नामक पक व्यनिने यहांका रोपणता (सं० सी०) रोपणरय भावः तल टाप । रोपणका ) दुर्ग वनवाया। हैदराबाद आरमार उमः यह नगर माव या धर्म, कोध। बेटगान मिला था। शर्म या राशि जमरत पड़ने पर रोपमय ( स० लि.) रागयुक्ता, कुछ। उन्हें २०० पटमदार बनाने मदद देनी होगी। यहां रोपाक्षेप (सं० पु०) मोतिप्रदर्शन, रविताना । अफोम, टंग और इलायची की गेली होती। रोपान्वित (सं० वि०) नुस। रोहतुपा (मनी० ) चलिदा, मफेद दूध । रोपित (सं० वि०) ऋड, नाराज । रोहतक-पझाव प्रदेशके हिसार विभागका एक जिला । रोपिन् (सं० वि० ) रूप-दर्शन। रोपयुक्त, नारोज । यद अक्षा २८ २१६ १७ उ० तथा देशा० ७६ रोष्ट्र ( सं० लि०) रुप-तृच् । रोपयुक्त, कई । १३ मे ७६ १८ पृ० मध्य हाधिन है। भूपरिमाण रोस (सं० पु०) रोप देखो। १७६७ वर्गमील है। रोस (फा० सी०) रोम देखो। गोहाना, झाजर, शापला और रोहतक नामक चार रोसनाई ( फा० स्त्री० ) रोशनाई देखो। उपविभाग ले कर गह मिला बना है। र, शापला रोसनो ( फा० स्त्रो०) रोशनी तेसो । और गेहना तहसीट जहा मिली है यहां दुनाना और रोसा (हिं० पु०) लसा नामक सुगन्धित घास। महराणा नामक सामन्तराज्य सरयन । रोहतक रोह ( सं० पु० ) रोहतीनि रह-अच् । १ 'कुर, अग्युवा।। नगरमें जिले का विचार सदर प्रतिष्ठित है। २मली। ३ चढना, चढाई । (लि०) रोहणीय, चढ़ने । यमुना और मतद नदीकी उपत्यकाको विच्छिन योग्य। रण कर जो विस्तृत अधित्यकाभूमि विद्यमान हे उसके रोह (हिं पु०) नोलगाय। ठीक मध्यरयल में यह जिला अवस्थित है। यहांको रोहक (सं० पु० ) रह-बुल । १ प्रेतमे । (त्रि०) प्राकृतिक सौन्दर्य शोभा यमी नदी जो जनसाधारणके २ चढ़नेवाला । ३ रथ, घोडे आदि पर सवारी करने चित्तको चुरा सके। परन्तु पहाडी भूमिके छोटे घाला जंगली सूअर, परिन, परगोश और बनमुर्गा आदि पशु- राहग (सं० पू०) सिंहलद्वीपका पहाड़ जिसे अब 'आदमी पक्षी अधिक संख्याम रहने के कारण मृगया प्रिय शिका. की चोटी' कहते है, विदरादि। रियों के लिये यह बड़ा ही आनन्दवईफ है। रोहण (सं० लो०) रोहत्यनेनेति रुह करणे ल्युट । १ शुक्र, पहले यह स्थान प्राचीन हरियाना राज्यके अन्त वीय्य । २ चढना, चढ़ाई। ३ उगना, कुरित होना। भुक्त था। उस समय समृद्धिशाली महीम नगर ही ४ अपरको वढना (पु०) ५ एफ राजाका नाम। इसका प्रधान वाणिज्यकेन्द्र समझा जाता था। प्रसिद्ध ६ विदृरादि पर्वत, रोहग पर्वत । ( राजेन्द्रकापु० ५२) शाहबुद्दीन घोरीने भारतविजयफालमे इस स्थानको रोहणद्र म (स पु०) १ चन्दनक्ष। २ मलयागुरु। जीता और तहस नहस कर डाला । पीछे १२६६ (वैद्यकनि०)। ई.में इसका फिरसे संस्कार हुआ। किन्तु उसी रोहणा-मध्यप्रदेश वर्धा जिलान्तर्गत एक नगर। यह सालसे ले कर १७१८ ई० तक इस स्थानको किसी