पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/११२

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रोहिल्ला गान था। यह पधारमा परित्याग र कातिदारमा । याके हाथमे कायम जट्न यमपुर सिधारा । अव मफदर कर वस गया था। १७१०३०में रहमत्का जाम हुमा ने रोहिलखण्ड पर आक्रमण न पर कायमके पुत्र अाह्मद १७४० इ०में रोहिटबएड नाम पड़ा देशभाग मग सा पर फतेयादिम चढाइ कर दा। इस युदर्म विशेष महम्मदके अधिकारमुक्त हुआ ता सम्राट उमीको यहा रूपसे अपमानित लामि और पराजित हो मफदर का शासनक्त्ता माननेको वाध्य हुए । ५ वर्ष रायगासन | प्राण ले कर भागा। पोछे अफगानोंने इलाहाबाद तक करनेके याद १७४५६० में अयोध्या सूबेदार सादरनग । ला। • के साथ उस युद्ध हुआ। इस समय मम्राट महम्मदने इस अपमानसे दही मपदर महाराष्ट्र मेनापति पनीरको पक्ष रिया था इस कारण अगेमहमद उसको मलदार राव होलकर मीर जयापासि देशी सायासे पश्यता स्वीकार करने वाध्य हुमा। वह नजरयदीशे पुनः रणक्षेत्रमें उतरा। अहाद बारामत् और दुण्डी तौर पर दिलो में रहने जाने पर भी उसके अधीनस्थ पासे महायता पा कर युद्धको तयारी परने लगा। दुर्द्ध अफगानोंने अत्याचार और उपद्रय करना शुरू। १७२५ इ० महाराष्ट्र सेनाने रोहित वण्डमें घुस कर पर दिया। सम्राट ने थलोको मरहिन्दका शासनकर्ता ब्रह्मद खाको परास्त किया। इस प्रार असद खां वा कर मानों के हाथले छुटकारा पाया। फिरसे फर पावादर मिहासन पर बैग। १७४८६०में अबदाली भारत माममणका तयारी इम ममय फयजुला खां अबदुल्ला खा, हाफिज रह देख पर गली महम्मदने फिरसे रोहिग्मएड हम्नगन कर मत और दुण्डो सांके वीच राज्यविभागले पर झगडा लिपा तथा पोहोशियारीसे हरायासन चलने वडा हुआ। आखिर तारोंने ही मिल पर भलीकी एगा। शासनयिशरगाने सुदृढ़ करने के कुछ समय पान्द सम्पत्ति आपसमें पार ली। १७५४ ई० में मम्लो गाजी हो १७४६ इ०में उसका देहा त हुआ। उस समय उपशउद्दन् द्वारा सम्राट महादशाहकी राज्यच्युति तथा सफ पडा और ममला एका पमदुला और अबदुल्ला खा रजङ्गको मृत्यु भौर सुना उद्दौलाको अयोध्या मसनद अबदालीफे साथ पारमें था। इस कारण काकी प्राप्तिस रोदिला जातिका अदृएसूर्य धीरे धार अघासे चार नावालिग एइको के हाथ राज्यमार न माँ पर ढक गया। १७ ६ इमें अवदालीन री कार भारत अलीने अपने चचा रहमन् घाँको हाफिज' अर्थात् राज्य ! थप पर चढाई कर दी। इस बार उसन पूकि धित का प्रधान अमिभाया और रहमतके शातिमाता दुण्डी! नाजिष उद्दौलाको सेगपति और प्रधान मलो पाया। मोशे सेनापति बनाया। गाजी उद्दीनको यह भवनति गच्छो न लगा। वह ___ अली महम्मदको मृयुके दार उसके विण्यात सना मराठोंको सहायताले उसका साश परने तुल गया। पति मार विजनौर के नागीरदार नाजिर खाके दुण्डी खाँ १९९८ १०में मराठासेनाने नाजिव उद्दीला रोहिलखण्ड की कन्यासे विवाह किया और नाजिव उद्दौला नाम | मार भगाया। इससे भो सतुष्ट हो कर माविर धारण कर विजनौरमें खत त राजपार वसापा। मध्य । उहान १९९६ इ० नाजियको तप्त परसे उतार दिया। अन्तर्षदोमें बड़सयशोय अफगान कायमजङ्गने फरसा । हाफिज रहमत तथा अन्यान्य गेहिला सरदाराने मराठी बादमें अपना प्रभाव पैग पर अफगान शासनका का गति रोक्नेमें असमय हो सुजा उद्दीराको सहायता विस्तार किया था। इस समय पनीर सफदरजसने मागो। उसो सालके ननम्बर मासमें मिरित सेना उनका दप चूर करनको इच्छासे पहले सेनापति कुतुद दलसे हार पा पर महाराष्ट्रीय दल चम्पत हुमा । उद्दानको भेजा । दुण्डी खा परिचालित रोहिल्लाके । महाराष्ट्रीय सनाके भागनेके और भी का कारण दापसे दुशुव मारा गया। पोडे मफदरने पायम जङ्कको) थे। १७९६ इ०से सितम्मरके महोनेर्म अबदाली? महायनासे १७ ० इ० रोहिलखएड पर मामरण र, यो धार भारतवर्ष पर माममण परने के लिये दिया। ददाऊदी रडाइमें हाफिज रहमन भौर दुण्डी। पञ्जावमें पदार्पण किया। पक्षाव उस समय मराठोंके Vol,xx, 28