पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/११६

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रोहुन-चौद्र पोपल मूर, घई चातामून, सोंठ, धारचीनी, इलायची । रोगनी (म०वि०) १ तेलया। रोगन फेरी हुआ, तेजपत्र, रोतकी, यहडा गौर भायला प्रत्येक १ पलके| जिस पर लाय आदिका पका रंग चाया हो। शवाज चूर्ण का कपरसे सार देना होगा। पीछे उमे रोजनित (स० वि०) १ गोरोचन या रोसी सम्बधी पर परतनमें रथ पर उसका मुह अच्छी तरह पद | गोरोचन या रोसीसे ग्गा हुना। (को०) २ दातको कर दे और एक मास तक उमा अवस्थाम छोद का चमहेपे समान कठिन मैना पाद एक मासक उसे मालोदन कर छान है। यह रोग (म० पु०) रचेरपत्यमिति रचिप्पण। " रित्व शरि दिनफे समय २ या - यार परफे उटाक भर | दण्ड धारण करनेयाला मन्यासी, रोच्य मनु । गघि मेग्न करना होगा। इमये मयन होदा, गुना, उदरी | प्रनापतिके पुत्र का नाम रोज्य था। (मत्स्यपु०१.) माधिरोग प्रशमित होन हैं। रोच्य तेरहवें मनु थे। इस म त सुपा भादि (म.परत्ना० प्लीहायादपि०) देवता, इद्र दिवम्पति तथा धृतिमार, अश्य तत्त्वदशी, रोहन (हि.पु०) रोदन नाममा पेट। मित्सुक, निर्मोह, सुतपा, सिम्प, चित्रमे विविध रो(दि.सी.) एक प्रकारको बडी मही। इसका नयरत् निमय, दृढ, सुनेन, सनयुदि और सुरत ये मय ___मांस यति म्पादिष्ट होता है। इस मिरेको ग गत्यन्त मनुके पुत्र है। (माकपडेयपु०) स्वादीष्ठ पनात म जार सेरा होता है। एक २विश्यकाठदएड, घेरकी लकडोका दम । ३ मार पृक्ष जो पूर्ण हिमालयम पिचरत दामिलिट्नमें होता है। तरविशेष। (माएडेयपु० १००1३६) रौंद (दि० स्त्री०) १रोधारा भार या मिया । • चार रोनन (फा० पु०) १ छिद्र, सुराप । २ गवाक्ष, मोखा। ३ दरार, दत। सदन (हि. खो०) रौंदनेकी मिया या माय मान । | रोजा (१० पु.) १ वाग यगोवा। २पडे पीप बाद रोदना (दि०नि०) १ पैरोसे कुचरना, मन्ति परना।२ पाद या सरदार आदिको करके अपर धनी हुइ इमारत . गोसे मारना, नू पोरना। |दाय (स.यु.) एक व्याकरण सम्प्रदायका नाम सैमा (EिOपु.) १फेचा पेयों के योन। ३ रीताइन (हि. स्त्री०) राय या रायतकी रखा, ठग सोविपा दोहा। ४ लोरिया पीज। इन ।२त्रियों लिये आदर सुक मम्पोधन । रौ(पारना०) गति, चाट।२पानी बहाय, तोह। रीताइ (हि.सो.) राय या रायता माय । २ ३ घाल, दग। ४ किमी पातमा धु, पिसी कामने रार या रायता पद, युराइ, मरारी। करन मोक। ५येग, झार। रोट (संनो. ) यस्येद या रद्रो ररता यस्य रुद्र री(हि.पु.) एप्रार ! बगद्वारादिरसफ यतर्गत रमविशेष मा सपा (म.लि.) यम मण। १ ग्यम मम्मम्मी।. पर्याय उन है। यह रस मोधका साधय । इस रम गुयामित सोनेगावामा। वाघिपय मारित्यदर्पणा इम प्रभार मिस रोपिय (म.पु.) १ सपिमणापे गम से उत्पन्न । २ रममा स्थाविमार मोष , या मयुगा , गधिष्ठात्री रीक्षा (म.पु.) रक्षके गोवमें उत्पन पर पित देवता रद्र ६ गत मा मारत होकी मामा बेटा है तथा उहीपन, मुटियार, पनन, विनोद गैश्य (महो) सम्य माग पक्ष पन् । राना, रूपा भयारण संग्राम मौर मम्ममादि द्वारा उदास होता है। पा। भूविक्षेप, मोष्ठी, वाहम्पोग्न, तपा मा मायदा गगन (म.पु.) ११२ मादिका पनामा दान पे सप रराफे अनुमाय, आमेष मागादि पागोमाजों पर मार आदि ने लिये प्रया उग्रता पेग, रोगाश म्यपशु मत्तमा, म मौर पाता। अमर्यादिमा अभिगारिमार। (म.. ) rol 3120