पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१३८

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२३॥ लादमणमाथुर कायस्य- लदाणादित्य राजपुत मी राजाफे सम्बनार्थ स्वयं उपस्थित हुए। उनके | भी एक सुप पि हो गये थे। पद्यापही इनकी बनाई साथ एक भी मिपाही न गया था। मन की गय पर बहुत सी कविता उस त हुई है। प्राचीम ताप्नलिपिमें चढते ही ये पदीमामें चद्रदीप लाये गपे। यहा। ये यक्षिणाधियिजयो थे ऐसा उरलेख देखा जाता है। कारागृहमें रहते समय एक दिन राम दासे मिले। जब महम्मद खतियारी पदापण किया, उस समय इस समय लक्ष्मणमाणिक्यने उन्हें बुरी तरह घायल घूस नेपाले परितोकी प्ररोचनासे पुढे राजा किस रिया पा। इस पर उन्होंने क्रोधसे अधीर हो रमणके । प्रभार राय छोट पर जगनाथ दर्शनफे बहाने भाग प्राण रेनेशा हुकुम दे दिपे। राजारा हथुम फौरन | गपे यह पात पिसोसे छिपी नहीं है । फुर शास्त्र में पे तामिल किया गया। पुलपद्धतिसहकारक नामसे विख्यात है। रमणमा पुर कायम्प-मणोत्सा और ये घसस्त्र सनराजबश देखो। नामक य क पन्ध प्रणेता। पेममरमिहफे पुत्र थे। लक्ष्मण सोमयाजिन-सीताराम विहारकान्यके प्रणेता एक्ष्मणराज-चेदीराय काष्टीय शीय राना तथा मोर्गएिटारके पुत्र । तथा यूरजप १म युवरानदेयके पुत्र। पिता रमणलामी-काश्मीरफे मन्दिर में प्रतिष्ठित रक्षमण मिधारने पर १५०१०में पेराजगद्दी पर बैठे। रहोंने मूर्ति । (राजत० ४१२७५) राज या राहदासे विवाह किया था। उनकी एडको लक्ष्मपा ((सं० सी०) लक्ष्मणमम्त्यल्या इति शर्श घोधादेवीफे साथ पश्चिम चाल्पप चित्रमादिरयको मादित्वात् राम् । १ श्वेताएटकारी। २ मारसो, गादी हुइ घो। राजदीहित य तैलपो ६७३ ६६७ सारस पक्षीको मादा । ३ पक जड़ी जो पुपदा मा जाती ताप्रभूत प्रताप सारा राज्यशासन किया था। है। यह जान पर्वतों पर मिलती है। इसके पत्ते चौडे पिलदरिफ्लामे माम होता है कि राजा लक्ष्मण होत है और उन पर लाल चदनको सी चू दे होती हैं। रामदेव कोशलाधिपतिको हरा कर पत्रिमप्रदेश जीतने ! इसका बन्द सफेद होता है और यही गोषधक काममें को गये थे तथा गुजरातमें मोमेश्वरसिदकी उपासना आता है। इसका सस्रत पर्याय-लक्ष्मणाग्द, पुत्र पी थी। पन्ना, पुत्रदा, नागिनी, नागाहा, नागपत्री, तुलिनो, रश्मा य दोपाध्याय-पर पगाठी कवि ने सम्भ | मजिका, अरवि दुच्छदो, पुच्छदा । गुण-मधुर, यता यशिपरत अध्यात्मरामायणका पंगानुराद रिया गीतल, खीव ध्यताक, रसायन, परपर और त्रिदोष पा। इस रामायणमा दो सौ या पुरानी पुस्तक TTI (रा.) मिरो। ___ मदेशक राजा दत्सेनकी कन्या। यह एपीसे एक्ष्मण यातायायल्यायमाशिका मा धीमाप्य । याही गई थी और उनकी माठ पटरानियों से एक थी। साफ रमपिता। ( भागवत्त० १०।१८५७) ५ दुर्योधनका पेटीश शाम। समण शारा-ममरकोपयाण्याफ प्रणेता तथा विश्व इम न्याश जब स्वयम्वर दुमा तप धोरण्यके पुत्र भर गाग्रीक पुत्र। | साम्इने इसे दर पर विवाह किया। एक्ष्मणसिद-शतकोटीमण्डप्रणेता। (मागत. 18511) रक्ष्मणसेन-यगारफे मेनपोप एका राजा। पे पागल ६नराका पेट। ७ मुचुरक्ष। सेन पुर थे। इन समय मुसम्मानो सेनाने लक्ष्मणाचाय (स.पु.) एक प्रकारका नाम। बंगाल पर याममण किया था। पायल्सयदीपारिश मामा भाचार्य देयो । पप्रपेशा लपाणि, गयुष, पशुपति, नयर और लक्षमणाजग (म. सी.)मणामूल। घोरी पिनेरी ममा रपर समाप उरल लक्ष्मणादित्य राजपुव-एक पयिापेक्षेमेन्द्रफे शिपथे। पियापा। इन राप पगिहतोष Rमग होमि प} विषण्टाभरणी इनपे बनाये गये कृत हैं।