पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१४

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रोगविहान्-रोटास (रोहितास)

रोजयिहान् (शेस)-एक मशहर मुसलमान पहित और। देख कर उसका पीछा किया । नी-गाय वही तेजीमे माग साधु ।होंने तफशीर आराएम नामको कुरानको टीका, पर उसी चारण रमणीक आश्रम घुम गइ । राजा भी और सफ्यत् अल मसारिन् आदि कितने प्रा लिये। उसरा पीछा करते हुए यहा पहुचे । वृद्धा चारण १५०६ ई०में ये करार कार के गाल में पतित हुए। रमणीका जय मृग दिपला दन कहा गया तय यह योली, रोना (410 पु०) १व्रत, उपवास २ यह प्रत जो मुमा 'याप चाहे मेरो गरदन ले लें, पर मैं उस आधित मृगको मान रमजानके महान ३० दिन तक रहते हैं गौर । नहीं दे मकती।' इस पर राजान मृगको बाहर निकाल निसका मत होने पर इद होती है। पर मार डाला। वृद्धासे यह अन्याय देखा न गया, रोजाना (फा० कि० वि०) प्रति दिन, हर रान। उसने राजाको शाप देकर आत्महत्या करली । उसकी रोगी (फा० स्त्री०) १ रोजका पाना, नित्या मोनन । अक्षयकीर्तिमा स्मरण रखने के लिए समुद्र के किनारे २१ प्रकारका पुराना रया महसूठ जिसके अनुसार जहा उससा आश्रम था एफ मन्दिर बनवा दिया गया। व्यापारियों के चौपायोंको एक दिन रायका काम | यहा नो भालेकभवन है उसे १८६७ ६० नवानगरके करना पड़ता था । ३ यह जिसके सहारे क्सिीको राजाने बनाया था। आमाश परिच्छन रहने पर भोजन पख प्राप्त हो, काम धधा जिसस गुजर हो। । समुद्र के किनारेसे मील दूरम इसकी रोशनी दिपार राजा (हिं० स्त्री०) गुजरातमें होनेवाली एक प्रकारको देता है। कपास । इसके फूल पोरे होत हैं। रोट ( स० वि०) रुट ( अन्यभ्याऽपि दृश्यते । पा ३।२७५) रोजीदार (फापु०) यह निसका रोजाना पर्चक लिये इति विच । हिंस्र, हिमा करनेवाला । २ वधक, मारने कुछ मिलता है। वाला। राजीना (410 पु०) १राजका नित्यका । २ प्रतिनिकी | रोट (हि. पु.) १ गेह क बाटेकी यहुत मोटी रोटी, मजदूरो, चेतन या वृत्ति आदि । निर। २ मीठी मोटी रोटा या पूझा जा हनुमान आदि रोजीनिगाड (फा० पु०) लगी हुई राजीका बिगाडनेवाला, देवताको चढाया जाता है। जम पर काइ काम धधान करनेवाला। | रोटक्यत ( स०पी०) व्रतभेद । (प्रतप्रकाश ) रामद (हि.स्त्री० गयय, नोलगाय। रोटका (हि.पु. ) वानरा। रामन-पक्षापदेशके डेरा गाजो खा जिलातर्गत एक | रोटास (रोहितास )-पावप्रदेशके झेलम जिलातिगत मगर। यह अक्षा० २८४१ उ० तथा देशा० ६६५८ पू०के पप गिरिदुर्ग । लघण परतफे जिस स्थानसे कुहान नदी मध्य सिधुदके याय किनारे अपस्थित है। ननसप्या | निलो है उसके समीपपत्ती प शैलपर यह मक्षा ८ हजारसे ऊपर है। मजारी बलूध जातिके सरदार, ३२ ५.३० तथा देशा० ७३ ४८ पू०क मध्य अव घहरामन १८२५६०म इस नगरका वसाया। वर्तमान स्थित है। मरदार द्वारा प्रतिष्ठित विचारगृह और उसके पिता तथा अफगान सरदार शेरशाह जिम ममय हुमायको मतीनेका मपरा देखने लायक है । पामी रग वा| भगा कर दिल्लीका सिंहासन अपमाया था उसी समय थाच्छादन वस्त्र के लिये यह स्थान प्रसिद्ध है। अर्थात् १५४० ईमें उमने गकर जातिका दमन करनेके रोमो-वम्या प्रदेशके काठियायाइ विभागके नचागढ | ममिप्रापसे यह दुग स्थापन किया। उस गिरिपथके राज्य के अतर्गत एक द्वीप । यह च्छउपसागरको ना । सामने स्थित एक शैल-रहको परिवेष्ठिन पर उसने मगर साहा मुहाने पर नयानगरस ४ कोस उत्तर | दुगके चारों ओर प्राय ३ मोल विस्तृत एक ल यो दीवार अवस्थित है। यहा चारण रमणीरे उसे स्थापित वही कर दी। उस दीवारको मजबूत रखनेक लिये जहां एक मन्दिर है। कहते हैं, कि पक दिग नागरराज | तहा उसको मोटाइ ३०से ४० पुर तक कर दी गई है। निकार येलन जगल गये। यदा उन्होंने एक मीर गायइमका प्रवेशद्वार थाज मा जात्यो दिखा देना है।