पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१४४

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योग्पा लातम्याराम-लग्वनऊ एम्याराम (स.पु.) लक्षम्या मारामः। पक यनका रक्ष्यार्थ (स० पु० ) वह अब जो लक्षणासे निकले। नामा लखतार-वन्य प्रदेश काटियागड विभागके भतर्गत रक्ष्य (स.सी.) लक्षाते पदिति रक्ष ण्यत् । १शर पर देशो सामत राय। यह मक्षा २२ ४६ से २३ घेघान वह जगह या वस्तु पिस पर रिसी प्रकार | उ० तथा देशा०७१ ४६ से ७२३ पृ०के मध्य मयस्थित का निशाना लगाया जाय। पर्याय-रक्षा, शरण्य, है। भूपरिमाण २४८ वर्गमीर और मनसप्या १५ प्रतिकार, येध्य घेछ । २ यह जिस पर किसी प्रकारका | हनारसे ऊपर है। इसमें ५१ ग्राम एगते है। राजम्व आक्षेप पिया साय। ३ प्याज वाधा। ४ अनुमय, ७० हजार यपयेसे ज्यादा है।पान और लत्तार नामक यह जिसका अनुमाय किया जाय। ५ अत्रीका एक | दो भूसम्पत्ति तथा सामावाद क्लेिके कुछ ग्राम ले कर प्रकारका महार। ६ ममिपित पदा' उद्देश्य 101 यह राय सगठित है। पद म जो याय, रक्षा गार ध्यङ्ग इन तीन प्रकारफे यहा एक भी नदी या पहाड ही है। अधिकाश शम्दोंकी रक्षण शक्ति द्वारा मिलता है उसे रक्षा | स्थान समतल है । यह और धान दो यहाँश प्रधान कहते हैं। समया खो। (नि.) दशनीय, देखने | उपज है। घेर और योराणोके मुसलमान स्थानीय पाससे एक प्रारका मोटा कपडा तैयार करते है। लप्त्यमम ( स० वि०) १ जिस अशात प्रणालीके द्वारा धानको कुम्हार जातिका मृत् शिलप प्रशमनीय पर अदिष्ट यस्तुका भाकार मीर इङ्गित ज्ञा जाय।२ फसिया यहा और किमी प्रकारका रोग नहीं दिगाई कायोति में मनिह श्यबोधन शान जिसके प्रकाश परनेकी | देता। यह स्थान बहुत स्याथ्यपद है। भावश्यकता नहीं रहती। यहाके सरदार तृतीय श्रेणोके साम त कहलाते हैं। लत्यछत्य ( स० को०) १ विहानुशीलन ज्ञान, यह छान १८०७६०को सधिके अनुसार ये लोग भी अगर मौको जो चिटोंको देख कर उत्पन्न हो। २ यह शान जो दृष्टात अधीनता स्वीकार करने वाध्य हुए। दावादके राजा के द्वारा उत्पन हो। सादर चन्द्रसिहनीफे रडके अभयसिंहनीको लपतार लक्ष्यता ( स० रो०) रक्षास्य भावः तल राप। रक्षाका | तालुक भागधा राज्यसे मिला था। अभयसिारे १६०४ भाय या धम, रक्षा १५६०फे भीतर पान तथा भास पासके दश याररियासे रक्ष्यमेद (स.पु.) चिद्वितस्थान विच्छिकरण, एक छीन रिपे। वर्तमान सरदार उदोंके पशघर हैं। सकर प्रकारका निशाना निसमें तेजोसे परते या उहते हुए हाको उपाधि है। जूनागढरे नवाव और अगरौंको लक्षाको भेदते हैं। मजुनने मागमागमें “यस्त मत्स्य । पर देना पड़ता है। निही पापसे घिद किया था। रखन (दि. खो०) षोकी निया,या भार । एश्यपीणी (स० सी०पल्याषीया । १ मनुष्य जीवनशे रचनऊ- अयोध्या प्रदेशके कमी नरके धध पक उद्देश्यसाधर पाया, यह उपाय या मजिससे जीयन विभाग। यह युरप्रदेश के छोटे राटफे सोहै। का उद्देश्य सिद्ध होता हो। २ ब्रह्मलोकका मार्ग, देव | अक्षा० २५ से २८ ४२१3० तथा देश ७ ४१ यान पथ। से ८१ ३४ पू०फे मध्य भयस्थित है। भूपरिमाण सत्यधिन् । सं० सि.) निहयिकारी, लक्ष्य येघ कान | १२०५१ वर्गमील है। इसम ४४ शहर और १०५० धारणा प्रग रगते हैं। लखनऊ शहर सबसे बड़ा है। पनऊ, रस्पसुप्त ( म०वि०) नोंद तोडनेगा उनार, एवरेग, सीतापुर, हरदोई और बेरी भिग पान (म. 1ि०) लसा दन्ति न कि । १रक्षामेद ले पर यह विभाग सगठित है । जनमप्या ६० के Pा , असते या सेतोस घरे हुए पदाधों या जीयों पर करीब है। ठी निशाना करोगाला (पु.)२ तीर। । २ दिमाग पर पिया यह सपा० २६ ३० Tolx3.