पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१४७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


लखनऊ ४८ नगरोंमें गई हैं। उनमेमे जो सडके महोनासे कुसी और नगर युक्तप्रदेशमे सबसे वटा है तथा अंगरेजाधिकृत देवा होतो हुई धाराबंकी तक , गोमाईगा और मोहन- भारतीय नगरों में चौथा है। जनस'च्या नीन लाखके लालगञ्ज होती हुई कानपुरके राजवम तक ; वनिपुलसे करीब है। - मोहन और औरस तया, सई नदीके पके का पुल पार | बम्बई, फलकत्ता और मन्द्राजको छोड़ कर भारतीय कर मोहन-औरसके उत्तरसे रहिमावाद तक तथा लग्य- सभो नगरों में यह मनोरम है। मुसलमानी अमल के मऊसे विजनोर तक गई है, वे हो प्रधान हैं। जिलेको | आग्निरमे यद उत्तर-पश्चिम भारतको राजधानी रुपम उपरोक्त सभी सड़के पको है। वर्षाके समय उन पर गिना जाता था। अगरेजों दगलमें आने के बाद भी कोचड जमने नहीं पाता। सभी स्थानोंमें नदीके ऊपर यदा उम विभागका विचार मटर प्रतिष्टिते है। यही पक्का पुल है। सभ्यता और उन्नतिकी पराकाष्टा गधेष्ट यिमान है। ___ अयोध्या-रोहिलपण्ड रे पध इस जिलेके मध्य हो सङ्गीतविद्यालय, व्याकरण शिक्षासमिति और दम लाम- कर दीड गया है। इसकी तीन शारनाएं पूर्व दक्षिण- धर्म को मालोचनामे लिये कई एक साम्प्रदायिक विद्या- पश्चिम और उत्तर पूर्वको गई है। एक लखनऊसे यारंचंको, लय माज भी स्थानीय समृद्धिका परिचय देते हैं। और खर्वरा-तीरवत्ती बहरामघाट तक जा कर फैजाबाद- गोमती नदीके दोनों किनारे पडे बडे मकान है जिन- से वाराणसी पर्यन्त आई है। दूसरी शाखा लपनऊसे : से नगरकी शोभा और भी बढ़ गई है। नगरको सीमा कानपुर तथा तीसरी ककोरी और मलिहावाद नगर होतो पार करनेसे नदीके किनारे दरव्यापी उद्यानवाटिका हुई हरदोई नगर पार कर शाहजहानपुर, घरेली और ' स्थानीय सौन्दर्यकी मात्रा और भी धढाती है। नगर- मुरादाबाद तक चली गई है । लसनऊ नगर हो ध्यवसाय के एक छोरसे दूसरे छोर तक जानेके लिये गोमती नदी वाणिज्यमें प्रसिद्ध है। दूसरे दूसरे नगरोम सामान्य पर चार पुल वने है। उनमेसे दो स्थानीय मुसलमान तौरले वाणिज्य चलता है। राजाओंके यत्नसे तथा १८५६ ६०में गरमाके दसलमे इस जिले में ६ शहर और ६३२ ग्राम लगने हैं। जन मानेके बाद भंगरेजोंफे उद्योगसे दाकी दो पुल बनाये - संख्या ८ लासके करीव है। हिन्दुको संरया सैकड़े गये थे। नदी पर जो हालका बना हुआ पुल है उसे पार पीछे ७८, मुसलमानकी २० तथा वाकीमे दूसरी दूसरी करनेसे जगमगाता हुआ मर्मर-सा सफेद मुन्दर महल जातियां है । विद्याशिक्षा में यह जिला बढ़ा चढ़ा है। दृष्टिगोचर नहीं होता। उम समय फलफनके मारसे अभी कुल मिला कर दो सौसे अधिक स्कूल है । कालेज- झुके हुए श्यामल वृक्षोंसे समावृत उद्यान-धारिका ही की संख्या है जिनमेंसे एक लखनऊ शहरमे पांच कालेज लोगोंकी दृष्टि पर पड़ती है। इस प्रकार कुछ दर नदी में हैं। स्कूल और कालेजको छोड कर २५ अररताल हैं। जानेसे नवाव आसफ-उद्दौलाका प्राचीन पत्थरका पुल _३ लखनऊ जिलेको मध्य तहसील । यह मना० २६ दिखाई देता है । उसीके वाम भागमें मठियभन ३६ से २० उ० तथा देशा० ८०°३६ से ८१६ पू०के दुर्गका सुगृहत् प्राचीर है । उस प्राचीरके भीता मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ३६० वर्गमील और जन- लक्षमण टीला नामक प्राचीन नगरभाग है । इसके सस्या ४ लाखसे ऊपर है। इसमें ३२७ ग्राम और ३ बगलमें ही नाना अट्टालिकादिसे परिशोभित आसफ शहर लगते हैं। उद्दौलाका प्रतिष्ठित प्रसिद्ध इमामबाडा है। यहांसे कुछ ४ अयोध्या प्रदेशको राजधानी । यह अक्षा० २६५२ दूर आगे बढ़ने पर इतिहास प्रसिद्ध जुमा मसजिद उ० तथा देशा० ८०५६ पू० गोमती नदीके दोनों किनारे मिलती है। उस मसजिद पर चढ़नेसे नगरका कुल अवस्थित है। यह नगर फलकत्तासे ६६६ मील, वारा-1 भाग दिखाई देता है। इसके पास ही नदी के किनारे णसीसे १६६ मील और वावईसे ८८५ मोल दूर पड़ता रेसिडेन्सी भवनका भग्नप्राचीर है । वहांका स्मृति- है। समुद्रपृष्ठसं इसकी ऊंचाई ४०३ फुट है । यह | क्रोस ( Memorial Cross ) आज भी दर्शकके हृदय में