पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१५०

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लखनऊ १५१ था, उस समय घेचारो क्षधित प्रजाको मान सर आदि स्थापयिताकी हही गाड दो गह। वितु सिपाही विद्रोह मिलता और इसके बदले उन लोगोंमे ग्मामयाडा यनानेमें के समय मुसलमानोंने मकबरा पोद कर होको बाहर काम लिया जाता था। कहते हैं, कि प्रथामायके कारण निकाल दिया। नगरके तिने मान्यगण्यने मो इसमें काम किया था। सासफ अहीलाके शासनकालमें लखनऊ-इम पार दिनको कही लोगोंसे पहचाने न नाये, इस जिसे वे बहुत मडकीला दिखाई देता था। इस समय राज्यसीमा दोपहर रातको अपनी मजदूरी देते थे। उस इमामदाडे की वृद्धिके साथ साथ राजस्वको मो यथेष्ट वृद्धि हुई थी। का एक प्रकोष्ठ १६७ पुट:५२ पुट लगा है। उसके , नवाव आसफ उद्दौलापात उदार और शौकीन थे। बनाने में करीव एव परोड रुपया सच हुआ था। उसमें उसी में यह अपना पजाना खाली कर गये। पाश्चात्य घमशीले और प्रमासम्पन्न तो सब चायशिल्प चित्रित । ऐतिहासिशेका कहना है, कि यूरोप या भारतवर्ष में हुए थे, यमी पेपर उनका विद्यमान रह गया है। मूल ! आसफ उहीलाके गौरवमय कीर्त्तिक्लाएका मुकाबला कोई द्रव्य स्थानभ्रष्ट या अपहत होने के कारण लोगों को देखने भी राना नहीं कर सकता। उनके उद्यामिलापने उहे में नहीं आता। उक सधान दुर्गसीमा मन्य रहनसे | साधारण सीमासे बाहर कर दिया था। उस समयका मी टिश सरकारते उसमें अनादि रमने की व्यवस्था प्रसिद्ध मुसलमान-राजा टोपसुलतान या निजाम जिससे की है। आश्चका विषय है, कि अट्टारिका काठका | छाया था हीरतादि सम्पत्तिमें उनके समान ऐश्व पान् कोई शिला देखने में नहीं आता ! फागु सन माहव इसके | न हो सके, इस ओर उनका विशेष लक्षा था। अपने गुभ्यमकी वढी तारीफ कर गये है। | लडफे घजोर खाक (जिसने मि० चेरीके इत्यापराध इमामबाडे को छोड रूमोदरवाजा मा आसफ उद्दीला | चूनार दुर्ग में बन्दो रह कर भवलीला सम्बरण को यो) को एक प्रधान कीर्ति है। इसके बाद दुर्गके पश्चिमस्थ के विवाहमें उन्होंने धारात साथ १२ सौ हाथी मेजे नदी-तोरबत्ती दौलतसाना नामक प्रासाद है। वही पाछे थे। उस समय सलीके शरीर पर करीव २० लाप रुपये सरकारी रेसिडेन्सीम परिणत हो गया था। गोमती तोर का हीरा यार मानिका भरद्वार शोमता था। यहीं यद मुवृहत् अट्टालिका रखनऊबा पर गौरयम्पल यह अतुर सम्पत्ति उहोंन भारतीय प्रजाका पून चूस नाव सयादम् मग जर फरात्ववम नामक सुरम्य । रसग्रह की थी। Ten nantar विवरण पढनेसे इसका प्रासादमें अपना यासभयन उठा ले गया, तब इस मट्टा । पता चलता है । उहोंने लम्बनऊफे सम्य धमें लिया है- रिकामे अगरेज रेसिडेट रहने लगे। नगरके वहिर्भागमें | Jnever witnessed so many raned forms of तथा नदोके दुसरे किनारे नयाव आफ उद्दौला प्रतिष्टित | wretchedness filth auct occ अर्थात् ऐसी विवियापुर नामक प्रासाद है। नगाव वहादुर जव शिकार भोपण पाप कर कालिमालिप्त नगरी मो कभी नहीं कोपाहर निकलने, तब इसी प्राम्य मधनमें आ कर रहते | देखी। उस समय खोजा मिया मालममके शासित धे । पतन्निनगरक दूसरे दूसरे स्थान भी इन नयाद प्रदेशको छोड़ कर यासफ उद्दीलाश सारा अध्योध्या में उद्योगसे निर्मित और मा कितनी महालिाये मौजुद राज श्मशानभूमिमें परिणत हो गया था। हैं। ये सब महालियाप ल्पनऊ शहरफा गौरव भासफ न्हौलाफे लडके सयावत् अली खां ददाती है। । (१७६८ इ० ) ने अगरेनोंका आनुगत्य स्वीकार किया इस समय सेनापनि नामाश्मिने fart nacre | पा। पद अगरेजी सेराकी माध्यछायाम निर्धिन हो नामर सुपमिद विद्यालय स्थापन दिया। यह बिलकुल । पर ऐश्वर्यसुबके भोगक्लिासको सप्नमें देन रहा था। इटली दग पर बनाया गया था। पीछे कही मुसल मयादत् पूरापुरुषों की तरह यलयौर्य में जातीय गौरवको मानराम उसे छान म रे, म भयस उसके मध्य ! पुष्टि न रफ भागविगस मत्त हो गया था । यह