पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१५५

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१६० लखिमपुर-- लखीपुर डाला। पीछे १८३६ ईमें अगरेजराजने आसामप्रदेश- कारकी देख-रेख में हर साल पक मेला लगता है। कलकतं. का पूरा शासनभार अपना कर पहाडी शत्रु का आक्रमण | से धुवडी, डिन गढ और फाछार जाने आनेके लिये रेल रोकनेके लिये खूब कोशिश की। तभीसे यहा शांति राज्य चलाई गई है। इस रेलपथसे तथा स्टीमर और नावोंसे कायम हुआ। यहांका वाणिज्य व्यवसाय चलता है। इन जिलेमें एक ____ आवर, आहम, टफला, काछाडी, खमती, कुकी, शहर और ११२३ गाव लगते हैं। लालङ्ग, मणिपुरी, मटक, चुटिया, मिकिर, मिशमी, नागा, २ उक्त जिलेके उत्तर पफ उपविभाग। यह उत्तर- नेपाली, राभा, सन्थाल, शिम्पी आदि असभ्य जातियां लजिमपुर कहलाता है। भू-परिमाण १२७५ वर्गमील है। इस जिले के पहाडी प्रदेशमे वास करती हैं। औपनिवे इसके उत्तन्में दफठा और मीरीशैल तथा दक्षिणमें ग्रह्म- शिक हिन्दुओं से घ्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, अगरवाल ! पुत्र नद है। लखिमपुर नगर इसका सदर है । जनसंख्या वनिया और फलिता (ये लोग असभ्य और पहाडी ८४८२४ है। आसाम-राजाओंकी पुरोहिताई करते थे। आज कल सभी | ___ ३ उत्तर-लत्रिमपुर उपविभागके अन्तर्गत एक बड़ा खेतीवारी कर अपना गुजारा चलाते हैं। ये लोग यहा गांव । यह अक्षा० २७ ५७ उ० तथा देशा० ८०°४७ पू०. सत्शुद्र कहलाते हैं ) आदि जातियां मौजजूद हैं। के बीच सुवर्ण श्रीनटीकी गडियाजान शाखाके किनारे अवस्थित है। यहां अगरेज राजकी एक छावनी है। इस सुदूर पूर्वप्रान्तमें इसलाम-धर्म नही फैला। मुगल-सम्राट के समय मुसलमानी सेना आसाम प्रदेशमें लखमपुर-१ अयोध्याप्रदेश के मेरो जिलेको पक तामील। घुसने पर भी जलवायुका प्रकोप सहन न कर सको। यह अक्षा० २०४७ से २८ ३० उ० तथा देशा० ८० उन्हें यह देश छोड देनेको वाध्य होना पड़ा। आहम १८ से ८१.१ पू०के बीच पड़ती है। इसका भूपरिमाण राजाओंने राजसमृद्धि वढानेकी इच्छासे कई घर मुसल- १०७५ वर्गमील है। मेरो, श्रीनगर, भूर, पैला और कुकड़ा- मान कारीगरको राजधानी में लापर स्थापन किया। मैलानी परगने इसके गन्तभुक्त है। जनसख्या ३६६३२६ है। इस समय ढाकासे भी कुछ मुसलमान दूकानदार लखिमपुर आ कर रहने लगे। वे सभी फरोईजीले मताव- २सेरो जिलेका प्रधान नगर और लखिमपुर तहसील. लम्बी थे। मरन या मोयामारीगण इस समय वैष्णवधर्म | | का सदर । यह अक्षा० २७°५७ उ० तथा देशा० ८०४७ में दीक्षित हुए हैं। शक्तिउणसक आसाम राजाओंके पू०के मध्य उल नदीके दाहिने किनारे एक मील दूरमें अत्याचारसे इस वैष्णव-सम्प्रदायमें कई बार विद्रोह उप- मस्थित है। यहां वाणिज्यका कारोवार जोरों चलता है इसलिये यह बडा समृद्धिशाली हो गया है। स्थित हुआ। अन्तमें वैष्णवोंने ही प्रधानता पाई। लखीपुर (लक्ष्मीपुर)-आसामके ग्वालपाडा जिलेके दक्षिण यहांके अधिवासियोंकी अवस्था उतनी खराब नहीं है। एक बडा गांव। यद्द अक्षा० २२ ५७ उ० तथा देशा० नमक, अफाम आदि कई द्रव्याका छाड व अपना जरूरा १०५१ पू०के मध्य गारो पहाड़के उत्तर पादमूलमै अब. चीजे मेहनत कर उपजाते हैं। सूती कपडे के अलावा | स्थित है। यहा भेचपाडाकं प्रसिद्ध जमींदारका प्रासाद -यहाके लोग रेशमी कपडे भी चुनते हैं। यहां दो तरहका | है। यहां जो बालक और वालिकाको पाठशाला है उसका रेशम तैयार होता है। उसका कीडा पड़िया या मूगा| खर्च इन्ही से चलता है। जनसख्या ४७६४ है। इष्ट- कहलाता है। स्त्रिया खास कर रेशमी कपडे तैयार इंडिया कम्पनीने १७५६ ई०में यहां एक कपड़े का कार- करती हैं। मर्द वागानमें पिल्लू पालते हैं। खाना खोला था। त्य | लखीपुर (लक्ष्मीपुर)-थासामप्रदेशका एक गाँव। यह तथा सूती कपडा, मूगा और अंडी रेशमी कपडा, मिट्टी | काछाड जिलेके पूर्व वराक और झिरो नदीके संगम पर का वरतन, पाटी, चटाई, रवर और मोम यहासे प्रचुर वसा हुआ है। गावमें मणिपुरके महाराजको एक कब- परिमाणमें बंगाल भेजा जाता है। सदियामें ब्रिटिश सर- हरी है।