पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१६०

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लग्न "लग्नम द्विगुण क्त्या गगनायस्तया ति। भामा दिनपर या नितनो हु है उस सध्या द्वारा पष्टिमान दए पञ्च पतनुच्यवें ।' उक्त निव रिमुक्तिको गुना परनेसे उम दिनको रवि (व्योति मारस०) भुक्ति पाइ नाता है । यहा पर दैनिक रयिभुतियो बाद जिस मामक निम लानर जितने दिनों की रवि । देकर निम्नोन प्रकारसे लानमा 'स्थर किया जा भुक्ति गणना करना होगो उमसनको दूना पर | मरना है। जैसे- गुणनाफाको मासा तान सपासे पु7 गुना करे। पृञ्चिालनमान ५१४०।२० । गुणना जितना हो उसे ६०मे माग दे। पांडे भाग -- ० द १० पल ३८-पि० मासको दिनसा या ३२ फलको दण्ड और भागापतिएको पत्र समझना होगा। इस प्रकार प्राप्त दएपर भोट दिनको रविभुक्ति दैनिक गरिमुनि ० ॥ १० ॥ ३८ थिए। + दैनिक होगा। रविभुनि २२ गमतारीख- ३६५४।५८१४५ अनुपल । उस इस तरह रविभुति धिर रियामागमें नम दिन हरेनी ६३७ मिशिदमें सूर्य अस्त हुए हैं। मतपत्र प्रहण परनेसे वा प्रश्न होनसे दोनों लगी रविभुक्ति पजे को नाम होनेमे स्याम्त २ घण्टा २३ मिनिट जानी जाती है। ति ममा न होने से बाद न म हुगा है ऐमा स्थिर करना होगा । इसको अस्तलम्नको रग्मुिक्ति जाना गया है। इस । दण्द पनगदिम परिणत करनेसे ५३० चिपल होता प्रकार निर्दिष्ट दिन गया स्तनको रम्भुिति है । अपर उस समय रालिजात दण्डपलादि होगा। बाद दनेमे गानका गिरभोग्य भी रहेगा उसके पूक्ति नियमातुमार शिव लाग्मान ५१४०१२० साथ दुमो दुमर लग्नका मान क्रमश योग करना से उत्त २०ीं जेठी रविभुक्ति ३२५४१५८१४५ घटनासे गावखानायक हाडपात ममात १४५।२१।१५ शिलानका मानिट भोग्यमान रहेगा नमानस मध्य शेष लग्ना दण्डपादिम अतनिक्ति | उसई माथ दुमग दुमरा ममा जोना होगा । इस हुमाता शप लान पहले लानक दण्डपलादिको | प्रकार जोड करा करते जव शेखा जाय, वि समष्टोस्त अतिकम किया है तब जानना चाहिये कि उस शेप लग्न हममान मध्य जिम राशिमें नातदण्ड पतित हुआ हा दण्डके उठित लग्न अर्थात् लग्नम ही कम या ) है, उस समय उस राशिम गम हुआ है, ऐसा मिधा प्रश्नमा करना होगा। यदि सृश्चिक लग्नके पशिष्ट भोगमान ____एक उदाहरण द नेमे यह अच्छी तरह समझ मा व मध्य जात दएडा समय पतित होता, तो इस जायगा। १२६६ ई.की ५२ जठी ६ वने रातको एक | परबत्ती सममान फिर नोग्ना नहीं होगा। सड का नाम हुआ। उस लडका कौन ठग्न होगा, यहा पर वृश्चिकभोग्य नमान-11४२१११५ यह स्थिर करने में पहले रविभुति स्थिर परलो होगी, धनुलग्नमान--५१७/२०१० श्रेष्ठ मासको शामिम शुषका उदय तथा शिक) समष्टि-911४११५ राशिमें अस्त हमारे इस पालमा रातमें ज होने । पहले ५५७१३० विपर बातदण्ड निणीत हुआ है। से मस्तरान मानना होगा। दिनमें जगम होनेमे दिया । वृशिवभोग्य रनमान अतिम कर धतु लग्नमानये लान और रात होनेसे बस्न माना होता है, यह मध्यवत्तियारम रके भूमिष्ट होनेसे धनुल ग्नमें उम पहले ही कहा जा चुका है। का नटुमा है, ऐमा म्भिर हुमा। यदि जातक बने शिधा राना मान ५४०१२० विपर है। उस रातको जम ले कर २ बने रातका नाम रेता, तो दुसरा सारका ज्येष्ठ मास (यगडा) ३२ दिशश हुमा है। दूसरा मान प्रमश जोडना पडता । मतपय उन गनमानको ३२ द्वारा भाग देनेसे इसी मियासे रन घिर परना होता है। दिनको प्रत्यक दिनको रयिभुति मालूम हो झापगी। एक जम होनेसे सूर्यादयकालमे मानस्चित करना होता है। Vol x2