पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१७

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(शुस्तित्त्व ) रोड़ा - रोधन पत्नीत्यागका कोई नियम नहीं है। कभी कभी अपने रोना चाहिए । मेनेने उसके नरक होता है। इसलिये समाजमे अर्थदण्ड देकर वह स्वजानिमे रह जाती है। रोना शान्मे नियिह कहा है। 'जानिनामा करन्य मा गदी पुन मात्रनम् । गेडा (हिं० पु०) १९ट या पत्थरका बडा हे ठा, बहा: ककड। २५ प्रकारका पजाबी धान जो पिना साँचे । गंदना प्रश्ननान् मृनाना नरक भुवम् ॥" ___ उत्पन्न होता है। (बापु० गणनिय० २७७०) रोढ ( स० वि०) उदमनशोल, उत्पन्न होनेवाला। "-लेमाश्रुगन्धय मुक प्रता मुक्ते यताऽवशः । रोण- चम्बई प्रदेशके धाग्याउ जिनान्तर्गत एक तालुक। अना न गदितच हि क्रिया कार्या विधानतः ॥" यह अला० १५.३० से १५ ५०3० तथा देशा० ७५ २६ से २ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण , गेदनिका (सं० स्त्रो० ) रोटनं अघ्र पात्यत्वेनासत्यसे नि, ४३२ वर्गमील और जनसंस्था लाग्नम्मे ऊपर है। इसमे , रोदन ढन् । यवास। २ शहर और ८४ ग्राम लगते है । इस नालुकमे दक्षिण रोदनी ( सं० स्त्रो०) रुयतऽनयेनि रुद-करणे त्युट टीप । महाराष्ट्र रेलवेके आलूर और मल्लापुर नामक मानमें दुरालभा, जवासा । दो स्टेशन है। | रोदस ( सं०डी० ) रुट अनुन । म्बर्ग। भृमि । २ उक्त तालुव का एक प्रधान नगर । यह अक्षा० रोदप्रिया (स० वि०) स्वग और मयंका पुग्णकारी। १५.४२ उ० तथा देशा० ७५.४४ पू०के मध्य धाग्वार "पारा पृथिव्योः पूयित" (ऋक १८८५ मायचा) शहरमे ५५ मील उत्तर पूर्व में अवस्थित है। जनसंख्या रोदसी (सां. सो०) रोदम गोरादित्यात टीए 12 म्बर्ग। ७ हजारसे ऊपर है । यहां काले, पत्थरके बने ७ प्राचीन २ भृमि । मन्दिर हैं। उनमेने एक मन्दिर में उत्कीर्ण शिलालेख दिग्त्य ( म० लो०) रोदमी देखा। पढ़नेसे मालूम होता है, कि ये सब मन्दिर १६८० ई० मे रोदा (हिं पु० ) १ कमानको डोरो, धनुषकी पतचिका । बनाये गये हैं। २ सितारके परदे बाधनेकी वारोक तांत । रोणाहि-अयोध्याप्रदेशके फैजावाट जिलान्तर्गत एक रोदितव्य ( सं० क्लो ) रद तप्य | रोदनीय, रोने लायक । नगर । यह घाघरा नदी तट पर अवस्थित है। यहां पाच रोद्ध, ( स० लि. ) रुध तृव । रोधकारी, गेकनेवाला। हिन्दू और पात्र जैन मन्दिर है। अवध-रोहिलखण्ड रेल राय ( स० वि० ) रुध तव्य । रोधनीय, रोकने योग्य । पथ इस नगरको वगल हो कर दौड गया है। रोध (सं० पु०) रुणद्वि जलमिति रुध पचायच । रोणीक (स० को०) एक देशका नाम । (पा ४११४६) १ किनारा, तट । रुध घञ्। २ रोधन, रुकावट । रोणीकीय ( स० पु०) उम देशका मनुष्य । ३ वारी। रोद (सं० पु०) १ ऋन्दन, रोना। २ शोम प्रकाशकरण, रोधक ( स० त्रि.) रुणहीति त्ध ण्वुल । रोधकर्ता, दुःख जाहिर करना। रोकनेवाला। रोदाकुहर (सं० क्ली०) स्वर्गमण्डल, आकाशरूप चन्द्रातप। रोघरुन् (रा०वि०) रोधं करोति क किप तुरन् । रोध- रोदन (सं० क्ली०) रुद-ल्युट । १ क्रन्दन, रोना। बच्चोंका ! कर्ता, रोकनेवाला । (पु०) २ साठ मंवत्सरों से रोदन ही बल है। | पैंतालीसवा सवत्सर । (वृहत्नहिता) "दुर्वलस्य वल राना वालाना रोदन यलम्। रोधचक्र ( रा०नि०) रोधनशीलानि चक्राणि यासु । नदीके किनारेका हया भंवरी। (चाणक्य ६२) रोधन (सं०नि०) रुणद्धीति रुष ल्यु। १रोधकर्ता, २ अश्रुकपिला धेनु यदि क्रन्दन करे, तो उसके कनेवाला । (क्ली० ) रुध भावे ल्युट । २रोध, नेवासे रत्न उत्पन्न होता है। मृत व्यकिके लिये नही रुकावट। ३ दमन ।