पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१९८

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लना गु-ललितपुर २०३ ललामगु (स० पु०) शिश्न लिङ्गोदिय। |होती हैं। मतमें दो गुर रखे जाते हैं। हमे साप, नरेन्द्र ललामन् ( स ० क्लो०) १ल्लाम। २ पुरुष । और दौवे भी कहते हैं। ललामात् ( स० वि०) सुन्दर अलपत। ललितपुर (स० को०) एक नगरका नाम । लामी ( स० स्त्री०) १वर्णभूपणविशेष, कानमें पहनने (राजतरङ्गिणी ४११८५) का एक गहना । सुदरता।३ लालिमा, सुनीं। । | ललितपुर-१ युक्तप्रदेशके झासो जिलेग एक उपविभाग। यह ललितपुर और महरोनी तहमोल ले कर बना है। ललित (स० को०) लल-त । १वारमायज क्रियाविशेष । २ मामी जिलेको एक तहसील । यह अक्षा० २४१६ हाररसमें एक कायिक हार या अट्टा । इसमें मुकु 1 से २५ १२ उ० तथा देशा०७८ १० से ७८ ४० पू०के मारता (मनाक्त) के साथ भी, आँप, हाथ, पैर आदि | मग दिलाए जाते हैं। कहीं कही भूपण आदिसे सजाने मध्य थपस्थित है । भूपरिमाण १०५८ वर्गमीर और जन कोरलित भाव कहा है। (०) लल्यते इप्सते इति लल सख्या डेढ लापसे ऊपर है । इसम ललितपुर और ताल फर्मणि च ।२ पाडव जातिका एक राग । यद भैरपराग घहत नामक २ शहर और ३६८ प्राम लगते हैं। इस तह सोलके पश्चिम और उत्तर पश्चिममें येतवा राज्य है। का पुत्र माना जाता है। इसमें निपाद स्वर नहीं लगता तथा धैरत और गा धारके अतिरिक और सव म्यर यहाँकी जमीन काली है। ३ उत तहसील का एक शहर । यह मक्षा० २४ ४२३० कोमर लगते हैं। इसके गानेका समय रात्रिके तीस दण्ड यीत जाने पर अथान् माताकाल है। ३ एक यिपम प्रण तथा देशा० ७८२८ पू०के मध्य भयस्थित है । जनसण्या ११ हजारस उपरह। धृत्त । इससे पहले चरण में सगण नगण, सगण,लघु , दूसरे चरण, गण, सगण, जगण, गुरु तीमरेमें नगण, ____ ललितपुरका कोई प्राचीन इतिहास नहीं है। पहले नगण, सगण, सगण, और चतुर्धाम सराण, जगण, सगण पहा असभ्य गोंड जातिका वाम था। माज भी विस्थ्य जगण होता है। ४ कुछ आचायाँके मतसे एक अलङ्कार । शैलमालाफे शिखर पर उम पहाडी जातिका प्रतिष्ठित । इसमें यर्य घस्तु (पात) के स्थान पर उसका प्रतिविम्ब देवमन्दिरादि उस मतीत स्मृतिका परिमय देता है। पर वर्णन किया जाता है। मान समयमें भी पर्वत परके कुछ प्रामो गोद जातिको यास देखा जाता है। (त्रि०) ५मुन्दर, दिया । ६सित, मनचाहा। परबत्ती में यहां जब आर्य उपनिवेश स्थापित चलित, घरता हुमा। हुआ, तय ये गोंर लोग प्रमश हिन्दुधर्म पर विश्वास कर एल्तिक (स.की.) एक प्राचीन तायका नाम। उसफ मगुरागी तथा थोडे ही समयके अन्दर शिक्षा भीर ललितकला (स. मो०) घेवलाए या विद्याप जिनके पद परनमें किसी प्रकार के सौ दयको अपेक्षा हो। | सभ्यताके गुणसे उनत हो गये। उन लोगों की स्थापत्य ___विशेष विवरण 'कला' शम्दमें देखा। । विद्या परिचय स्वरूप आज मी अट्टालिका और जल नालियां यहां विद्यमान हैं। उनक अध रतनफे याद सैल्तिकान्ता (स.सी.) ललिता वान्ता च । मगर महोवाक च देशीय राजन यहा आधिपत्य फैलाया। चण्डिका, दुर्गा। पाना और हमीरपुरम उनको राजधानी थी। हलिन (म.पु.) चैत्यभेद, प प्रारको मन्दिर बनभौर हमीरपुर द देगा। या धर्मशाला। १श्यों सदाके शेष मागम इस चम्देल रानाश अधा रहितताल ( स० पु०)सगोतका एक ताल। पतम हुआ। उस समय यह स्थाा छोटे छोटे सामन्त हरितपद (स. त्रि०) १ सुन्दर पदयुक्त जिसमें सुन्दर रानो शामनाधीन हो गया । उ7 मामन दिली पर याद हो। (बु.)-पकमात्रिक छ। इसके | प मुसलमान रामोको प्रधानता स्वीकार नहीं को। उन प्रत्येक चरणमें १६ भौर १२ हिसायसे २८ मावाए लोगोंी मम्पूर्ण स्वाधीनभारसे राज्यशामन किया था।