पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२०

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, रोमकूप-गोमश सोमप (म पु०) रोमणा कूए । लोमयिवर, शरीरफे 1 ट ग मुनि लाये गये और यूब वृष्टि हुइ। तव राजाने धेशि जिनमेसे रोप निकलते हुए होते हैं। अपी या शाताका उनसे विवाद कर दिया । रोमकेशर (स.पु०) रोम्णा पेशमिय। चामर, चरा रोमपुलक (स.पु०) रोमणा पुलकः । रोमहर्ष, रोमाञ्च । रोमगर्त ( स० पु०) रोमणा गर्त । रोमप, लोमछिद्र। रोमफला (स० स्त्री०) तितिा डे दसी। . रोमगुच्छ ( स० पु०) रोम्णा गुच्छ । चामर, चर। | रोमयद्ध (M० त्रि०) १ जो रोयोंसे या या गुना हो । रोमगुच्छर (स० पु०) चामर चंवर। (पु.) २ वह वस्त्र ज्ञो रोयोस घधा या युना हो। रोमगुत्स (स.पु०) चामर, चंपर। | रोमभृमि ( स० सी०) रोमणा भूमिरिव । त्वक, रोमरावत् (स० वि०) १ रोमयुक्त, रोए वाला ।२पूछ चमडा। रोममूर्द्धन (सं०नि०) रोमयुग मस्तकावशिष्ट, जिसके चाला। रोमतक्षरी ( स० स्त्री०) अरोमा स्त्री। - शिरमें दाल दो। रोमत्यज ( स०नि०) लोमनाशक । रोमरतासार ( स० पु.) उदर, पेट। रोमद्वार (स० पु०) रोमकूप देखो। रोमरन्ध्र (E0ो०) रोमकूप, शरीरके वे छिद्र जिनमेसे रोमद्वीप ( स० पु०) मि किरमिजो। रोए निकले हुए होते हैं। रोमन् (स१०) रौतीति रु (नामन सोमन व्य मन । रोमराजि ( स ० सी० ) रोम्णा राजि । १ रोमावलि, रोमन्निति । उया १११५० ) इति ममिन् प्रत्ययेन साधु । । रोयोंकी पचि । २रोपोंकी वह पति जो पेटके बीचो पीच नामिसे ऊपरकी ओर जाती है। १ शरीरजातादुर, रोगा। पर्याय-लोम, अड्लज, मगज, रोमलता ( स ० स्रो०) रोमणा र तेव, रोमायलि, रोम घराज, सनूरुह । (रामनि० ) राजि। रोरफ रहस्यान अर्थात् गोपनीय स्थानमें तो रोमलतिका ( स० सी० ) भिके ऊपर स्त्रियोंके रोमा उत्पन्न हो उसे स्पर्श नहीं कराा चाहिये । (वर्मपु० लोमकी रेखा १५ म०) २ जनपदविशेष । ३ उस देशका यामी । (पु० रोमलवण (मलो०) शाम्भर ल्यण, शाकभरी नमक। ३भूमि । ( भारत ६०५५) रोमवत् (स.वि) रोमन् अस्त्पर्थे मतुप मस्य य रोमन कैथलिक (य० पु० ) ,इसाइयो प्राचीन सम्म नात्य लोपा रोमविशिष्ठ रोयाँवाला। दाय । इसमें इमाफी माता मरियमकी तथा अनेक सात | रोमपल्ली ( स ० स्त्री०) फपिकच्छ, पेचाच । महात्मामीको उपामना चलती ६ आरगिरजाम मूत्तिया रोमयाहिन् (स.त्रि०) रोमाकाटीक योग्य तेज धार भोरवी जाती हैं। वाला।- रोमय (स.पु०) सींगयाले चौपायोंका निगले हुए | रोमविशर (स.पु.) गेम्णा विकार | रोमाञ्च । चारको फिरसे मुन्में ला पर धो धोरे चबाना, पागुर। रोमविक्षिा (स. स्त्री०) रोमाञ्च, आनन्न्मे रोओंका रोमपार (सं० पु०) ऊनी कपडा, दुशाला आदि। उमर माना। रोमपाद (स.पु० ) अष्ट्र देशा एक माचीन राना। इनका रोमविध्वस (स.पु.) १ लोमनाशकारी । २ खटमल । उल्लेघ घाल्माकीय रामायणम (बाल साह) है। रोमवियर (सजा ) रोम्णा विवर। लोमकूप । कहते हैं, कि यह राना पहा अन्यायी, और अत्याचारी | रोमवेध (स.पु०) पत्र प्राची प्रग्यकार था। इनके पापोंस एक बार मयकर मनानि हुई । राजान रोमश (म० पु०) रोमाणि सत्यस्येति गेमन् (क्षोमादि नाम प्राणों को बुला र उपाय पूछा । उत्तरमें सपने | समादिपिच्छादिभ्य शनेनच । पा .) इति । प्राप्यभृग मुनिको लाकर उसके साथ राजकरया शा ताका १ मेप भेना। २ पिण्डालु, रसादु। ३ कुम्मो। ४ पियाह कर देनको राय थी। घेश्यामीको चेपासे प्राप्य । शार, सूमर । ५ पिविशेष | इस पिता एक एक Vol aab