पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२०२

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ललिथ-बग २०७ रसिप (सपु०) जातिविशेष एप (स० को०) लू गप । १ ज्ञातीफल । २ लया। लली (दि. स्त्री०) १ एडकाके लिये प्यारका गम्द।। ३लामनर, वराव श नामका तृण । ४ ईपत्, यहुत २ दुलारी लडकी, लाडली लडकी। ३ नायिकाफे लिये | थोडी माता । (पु०) लपर्णामति ल भए । ५ लेश। प्यारको शब्द, प्रेमिका ६ विनाश 10 छेदन, क्टाइ। ८कारका परमान, दो सलोतिका (स. स्त्री०) एक प्राचीन तीर्थ। यह चम्पा | काष्ठा अर्थात् छत्तीस निमेषा अल्प समय। कुछ लोग जनपदम गपस्थित है। (भारत १२६ ) एक निमेष साठवे मागको ल्य मारते हैं। पक्षिमेद, सयान (१० को०) एक प्राचीन जनपद। लवा नामका मिडिया । १० ऊन, वार या पर जो पशु (रानतर० ६।१८३) पक्षियों के शरीरसे कतर कर निकाले जाते है । ५गो ल- भारतीय एक प्राचीन ज्योतिषी। इस सिद्धान्त | पुच्छलोम, सुरागायका पछके याल सो चंवर यनानेके मार्य ज्योतिपमें दडे आदरसे (देखा जाता है। लिये पतरे जाते हैं। लल-विधानमाला प्रणेता। दुढिराज ललोपाप्य य-रामचन्द्र पुन । रामायणके उत्तरकाण्डमें लिखा है, नामक और एक परतिकार देखे जाते हैं। इनश रखा कि रामचादने सीतादेवीकी गर्भावस्थाम लोकापचादसे मृतपनीयाधान, स्वगद्वारेएिसतप्रयोग और हीलसामान्य भय खाकर उन्हे छोड देने के लिये क्षमण पाशा दी। प्रय देखासे योध होता है, कि धोनों पर व्यक्ति थे। लक्ष्मण मी आत पाटन करते हुए सीताको ले कर बल्ल-ज्योतिपरतकोष गणिताध्याय और गोपाध्याय यामोदि तपोयना छोड भाये। यह सीताफे यमज तथा शिषधीद्धद महानन्त्र नामक ज्योतिर्मथकरच दो सप्तान उत्पन्न हुए। इन दो पुौका नाम लय और पिता निविक्रम भट्ट पुन। मास्कराचार्यन मिक्षात कुरा पडा। बाल्मीफिोह रमायणको गाम सिखा शिरोमणिक शेयोत धर्म उल्लेख किया है। दिया था। जब होरामचद्रकी समामें जा कर यह लल्छन्द-छिन्दयशीय पक राजा । पेमल इनके पुत्र और गाना सुनाया, तव रामने दे पहचाना। पैरवमा पौत्र थे। माता राणहिला चुलुकीवर सीता और राम शब्द देखो। शकी थी। सयाराहमुत (स.पु.)१ तथा धाराहके पुत्र ।। | लयर (म पु०) १ छेदक, रह जो छेद करता हो। २ नक्षत्रसमुच्चयके प्रणेता। २व्यभेद। सल्लादीक्षित-मृच्छकटिक्टीका रचयिता।ये रमणके | ल्या (महा० ) लुनाति श्लेष्माविक मिति तु (वरच्या पुत्र और गहर दाक्षित पांत थे। इन्होंन १८२१ में , । दिभ्याउण ११११६) इति बच । स्वनामख्यात यणिक उक्त प्रपसल्न किया। यभेद, सँग। मिन भिन्न देश में यह मि भिन्न नाम लरिपशाहाकायुल के पाहायशीय प६ दिदू राजा। से प्रसिद्ध है। यथा-महाराष्ट्र और कलिङ्ग र रङ्ग दूसरा नाम धाम। उदभाएठपुर में उनको पलिका, लयित तामिल-चिरमवर, विराग्नु, धन- राजधानी घो। मnिation.mal अप्पु क्याप्प इस यु तेल-बगल,द्रापिष्ठ-लयन प्रमारदेयके मन्नो गोपालमान इनक पत्र तोरमाणको मल्योर म-छडि शिङ्गापुर-वरल, पारम्य-मेखक, सिंहासनध्युत दिया था। पेपुरासान पति माम | बाल-लहाल्यग। सस्त पयाय-देयकुसुम, श्री चन साये सममामयिक थे। प्रसून लयगक, व्यङ्गकलिका दिव्य शेखर, लय, श्रापुष्प, टल्लूजी लाह-एक हिन्दा प्रचार। रुचिर, वारिसम्भय, भृङ्गार, जोणि कुसुम, धन्दनपुण। एल्लो (हिसा०) पोम जयान । इसक पृत मलयार, मनिशाके समुः तट पर, जो एलो चलो (दि. खा) चिनी चुपष्टी यात जो यार मलाया जाषा मादिमें दोन । बङ्गको खेती केयर ग्मिीको भमन पर प्रिये हो जाय, अर | लिपे काली मिट्टी मीर यिशेरता यद मिट्टी से ज्याला मुहाता। | मुखाकी रासदो या जिमर्म बाल मिला हो, अच्छी