पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२०८

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लवणे प्यासाय वाम र लेने अभिप्रायमे काम्येक नवायको महसूल रेख भारतराज प्रतिनिधिने भारवपमें तमाम वार्षिक ४० हजार रुपया क्षतिपूरणम्यरूर देकर स्वण ममान महसूल लगा कर मन पो २०, २० कर दिया । का ध्यासाय उठा दिया। कितु सीमान्त प्रवेशमें गोलमाल हो जाने के डर से कोहाट पक्षाव-यहा प्रधानन से घरहरण हो निकाला और मण्डीको लवणको खान पर उन्होंने कोई कर न जाता है। सिधुनदके दूसरे रिनारे पनू जिले कोहट रना। केरल कोहारको सानमे जो लवण अफगान और कालायाग तथा लरणगिरि (tringe ) म सीमा त पर जाता था उस पर मन पीछे (सिका वजन मधय बहुतायतसे पाया जाता है। कारावाग और १०२ पौड) ० माना कर दिया धो। मण्डीको सान लपण गरिफा सैघय सिलिउरोय युगस्तराय कानड में उत्पान हैम लवण पर उससे अधिक महसूल लगाया और कोहटम मण्डिस्तर ( Hindi deposits) के जैमा । रितु अरजी लवणकी अपेक्षा वह भी बहुत है। पतदिन पहा गुमान जिलेके सारे काजलोंसे कम था। लपणका यह महसूल लेनेके लिये अङ्करेज़ लयण बनाया जाता है। यह शाम्भरहद जात लवणसे गधमे एटने देशी रोजे सरदार और जमादारों को क्षति निष्ट होता है। पुरणस्वरूप रानस्वका कुछ अशमाफ कर दिया। युक्तपदा-लपणात काजल से इस frभाग वाणिज्य और कारवारके लिये भारतवर्ष मे जितने नाना स्थानों में उरण तय्यार हाता है। तु यह दूसरे प्रकारका मक प्रालित है, भारत गवर्मेण्ट की राज दूसरे स्थानोंक लवणफे जैसा विशुद्ध नहीं होता। वियरपोमें उसको एक तालिका देसी जाती है। यह यहाक लरणमें Sodium sulphate magustum sut भिन्न भिम प्रकारको लवण मिन मिग्न श्रेणी में रखा phates odium carbonate और nitre मिला हुआ गया है- देखा जाता है। युल दशहर और मुजफ्फरनगरमें खनिज या सैधव लवण (I ork silt)-कोहट, बहुत थोहा नमन तयार होता है। मएडी आदि स्थानों की खानस यह नमक नाना स्थानों में भासाम-लपणात कृप तथा जोरहार और सदिया भेजा जाता है। कल्वण प्रसरणस काफी लपण प्रस्तुत होना है। २द और ऊपज लवण (like and pit salty- पछाड, मायापुर और चट्टग्रामक पहाता प्रदेशी भो शाम्मर, दिदगाना, पचमढ़ा और दिल्लीके लयणके कार कृपस खारे रसे नमक तय्यार दिया जाता है। अशि गानों में यह नम्बार होता है। क्षित और अद्ध सभ्य जातिया नामक चोंग में वारे जल ३मामुई लपर्ण ( Salt और pit salt) भारतय को फुटाकर पण बनाती हैं। क समुद्रोपफूट उपपत्ती विभिन स्थानोंमे प्रस्तुत होता ___ग्रहम-पेगुफ रसियारी युगस्तराय पतों पर सैकडों । लपणक मनपण है । उनसे स्थानीय लोग लघण तप्यार ४ भानूगलवण ( Unrsh lt)-रवणात प्रलं करते हैं। मामायावसे मागुइ पर्यन्त समुद्र किनारे स उत्पन होता है दिली आदि स्थानोंको खारो मिट्टी समुद्रफे अरसे सामुद लवण बनाया जाता है। को खोदना जो गहा बन जाता है उसोके जलसे तैयार मुसलमान समाओंक जमानेम लवण पर महसूल । किया जाता है। लगाया जाता था। १८०३ ३०का ३८ धागके अनुसार । " वाहित लवण (swinp salt) समुदोपकूल सदरेम गरमे एटने पहले पहर मन पोछ । ८२ पत्ती साडियों खारे कोचस जमा किया जाता है। पौर) लमण रह० महसूल स्थिर कर दिया । धारे। ममुसा जल उन सब वाडियार्म घुस कर फिर निकलने घोरे यह ३२०२० तक बढ़ा दिया गया। १८८२ इ०में नहा पाना। पो यह मापे आप सुन पर मिट्टी अग्यान्य प्रदेशांशी अपेक्षा बङ्गालके लवण पर मधिक । क कपर दानेदार हो जाता है । यही साजि Voi, xx