पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२२

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रोम साम्राज्य विनिया और पेएटस-पृणसागरके दक्षिण और । दुगम दिखाई देने लगा। गत सन १९२८ ६०में भी मान्य एशियामाइनरके दोनों प्रदेश। स्फुरण हुया था। कासनिसमटोरिका-युरोपिय सियाका निमिया । इस प्राचीन समृद्ध रोमराज्य पाणिज्यमभावको विभाग। याद करने पर मनमें अभूतपूर्व विस्मय जागरित हो कलकिस, इयेरिया, अल्याशिया-फाक्सस (कोहे । उटता है। जिस समय जलद्वारा पाणिज्य करनेका काफ ) पहाडफे दक्षिण मौर अर्मेनियाके | पोइ द्रुतगामी टोमर न था, उस समय रोमक्ने भूमध्य उत्तर और प्रणमागरसे कारगीय झील तक सागरफे यक्षस्थल पर नायों पर चढ़ मिनसे भारत विस्तृत भूम्बएड। और पारस्यको चोजे सपने देशमें ले आते थे। गय, फिजिया, पिसिमिया, गेरेसिया, लाइकोनिया, ! FT, भाण्डाल और पर्चर जिस समय पश्चिम एशिया पापाडोक्यिा और अमनिया माइनर-पशिया माइ के पाश्चात्य जातिमान के लिये भय कारण हो उठे थे, नरके अतगत । उस समय निसर रोमजाति अपने वापर से उस दुर्दम अमेनिया-समोरियाके उत्तर । नोय पशिया वामियोंका दमन कर अपण मायसे यसीरिया, मेसोपोटामिया धारिलोनिया, कातिदया | तुओं के बीच पुश्कीकी राहले कारोबार करते थे। राज्य, भररिया पिटियाराज्य, सिरिया और पार्थिया - युद्धकालमें जैसे रोमक शिप्रहस्त थे, वैसे ही गरमशस्त्र लिमाएट उपमागरके किनारेसे पारसके । यनानमें भी यह पम न थे। पश्चिमाद्ध, अरबफे उचर और ममनियाफे रोमराजधानीमें भारतीय मणिमुकाका यथेष्ट भादर दक्षिण तक फैला हुया भूपण्ड। था। यह पात पुस्तके पक्षनेम बात होती है, इमी फारण समुद्र में चलनेवाली पडी वही नापोंके थरिकाके भन्तर्गत राज्य। चलाने में भी यह पढे कुशल और धमशील थे। उस - मौरिरानिया, यूमिडिया, गझिा (राजधानी | समय सार और पालकी सहायतासे जहाज समुद्र में चरता कायेंज) लिरिया और इजिप्टस नामक भूमध्यमागर | था। काजिनीय सरदार हानिवलफे रोम भाक्रमणके फे किनारक अफरिकामा नरोय प्रदेश 1 पे सव राज्य | समय और रोम सेनापति सिपिर्यो युनानी माक्रमण भाग इस समयके मोरोको, बलजिरिया, ट्यूनिसो, काल्में ऐसी मार और पालने चलनयाले जहाजे व्यवहत द्विपाली, पार्श और इजिप्ट (मिन ) राज्यका कुछ मशहुए थे, ऐसा उल्लेख पाया जाता है। इतिहासमें ले कर गठित हुआ था। रोमकोंकी फर्मोनतिका पयेष्ट परिचय दिया गया है। इस समय यूरोपके प्रदेशों में जो पर्णत और नदियो । इटलीके अन्तर्गत दाइयर नदी किनारे रोम दिखाई देती हैं, उस समय भी ये सब उसी मापसे ( Roma) नगरी इस विस्तृत साम्राज्यको राजधानी मौजूद थी। घिसुवियस, ट्रम्वारी मोर एटना नामक | थी। यहां सासे दो शतादी पहले इसाको १५वीं माग्नेय गिरिफे माग्युगमन उR समय राम रामधानीको शता दी तक कारीगरी, शिल्प, वाणिज्य और सङ्गीतादि पम्पित कर दिया था। अत्यन्त प्राचीन दालेनियम कलाविधान जैसी उन्नति हुई थी, पैसो युरोपको किसी और पम्पिया नगर शिसुवियसके सरन्त घातय | राजधानीमें किसी विपकी उन्नति देखो नहीं जाती। निम्नापस और उत्तप्त भस्मोसे मर गया था। दो धर्म रोगमा पालामिगम' महल कारीगगे या स्थापत्य तक उसका हिसाम था। इस समयका रोमराज्य | पियाका परम निदर्शन (नमूना) है। यह जगत्मा इमानुपेलफे शासनकालमें उस दुप्तप्राय दामों नगरोंगी। सात माश्चयों पर है। भी कीर्ति प्रकार हुई थी। पुछ दिनों तक यहा भान्य परामान जगत्की उन्नतिके साथ साथ टीमें भी सूम नहीं था। सन १९०५६०स फिर पारे धीरे अन्य | नाना विपर्योको उनति हुर। गिनु म ममय रोमनों