पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२३२

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लोग नाङ्गल २३७ भादान प्रदान नही चरा पागजाता प्रतिमूर्ति , विशेष कौशल हो और जी जल्दी ममझमें न आये। और तिरूपतिको ध्यडोपामुत्ति हो गयी उपास्य गरी ७ जादू, सोना। ८ यैर, दुश्मनी। धानुको हक है। विवाहादि वे लोग शराब पात है। । पर तैयार किया हुआ रस, भस्म । १० एक प्रकारका खिया और वाट वच्चे चूडी यनाने पुरुषको मदद नृत्य। १ भूमि पपरगान। १२ यह चेर जिससे देन हैं। ये लोग स्थानीय कुनयोंसे मामानिक मर्यादामें चेवाका अपवा इसी प्रकार और कोई टीका लगाया उने तथा प्राहाणीस नीचे हैं। सिमगा, दारा दोचालो जाता है ।।३देनिस भोगनको सामना, रसद । १४ पद पकादशी और शिवरात्रि पर्ग ये लाग उपवासादि निधन धन जो विवाह आदि शुभ अवसर पर ग्रामी, घरते हैं। नातकग और अत्येटिको छोड कर इनके भारी नाइयो आदिको अलग अलग रस्मोंके सम्ब धर्म और पोद सस्कार नहीं है। ज्ञानम बहुत बुर च दिया जाता है। हिंदू-सा है। विवाहपाम प्रिया मारवाडीमापार्म लागॉट (दि. स्त्री०) १ शतता, दुश्मना। २ प्रति गाता हैं। ब्राह्मण आ फर कन्यादान करते हैं। मिदूर। स्पर्धा, बढी ऊपरी। नृत्यका एक क्रिया। दान ही विवाहका प्रधान मन है । यिराहक बाद घर लागत (हि. स्त्री० ) यह खर्ब जो किसी पोजकी तैयारी पन्याको अपने घर ले आता तथा आत्मीयकुटुम्बौको एक या बनाम लगे, कोह पदार्थ प्रस्तुत करने में होनेराला भोज देता है। यालिवधू ऋतुमती धोनस तीन दिन ध्यय । भशीच रहता है। चौथे दिन उम उबरन लगा कर गाम' गाडिक (स.लि.) १ लायुक्त, जिसके द्वारा लाठी सरस हरयाया जाता है। पीछे स्त्रिया पार वालि हो। २प्रहरी, पहरा दनेवाला। को गोदमें चायल, नारियल, पञ्चफल भोर पान देतो 'राघr ( म.पु.)ीमक नाम रोग। हैं। इसके बाद पद स्वामिसहयाम करने पाती हैं। लाघा (म० सी० ) लधोमा कम या (गन्ताय नए एक पगसे कम उमरपारे व क मरने पर उन्हे गाद पूर्वात् । पा ११३१) इति भण। १ लघुत्य, -घु होने दिया जाता है। उसस ऊपर होनेसे दाक्षम होता का भाव । २ अपत्य, योहा होनेश भाष, कमी। है। मृतका पुत्र घा निकट मात्म य दाहफे बाद क्षारकम दाधका सफाइ पुता । ४ आरोग्यता, मोरोगता, करके शुम होते हैं। उस दिन यह अपने हागम पा संदुरुस्ना। ५ नपुमक्ता । । अध्य०) ६ फुरतीमें, मही करता किमी आत्माप घर बिचडी का कर सहजर्म । रहता है। मामरे दिन ये मतको भस्मराशिको पात्र लायचापन (स. पु.) एक प्रग्यकार । दो ने एक करते हैं या दही भोर भात कराते है। दो दिन धीतस्त और उसका मार मणपन किया। प्राणपुग र मृतफ उस पिण्ड तथा प्यार में लाघविक (स.लि.) सक्षिप्त, योडा। दिन आत्मीय कुटुम्योको एक मोन देते हैं। छ मासम' लाद (म सो०) १ कमर, करि। २ परिमाण, मिक पदयानिक धार तथा पफ अन्नमें पाiिr श्रार होता धार। है। उस ममम मोघेातिमोज गते है। महालयाय , लाडाकानि (स.पु.) लड़का पर | दिन मा ये पितरोंक उद्देश्यस धाव रते हैं। जातीप। (पा०४५) पचायत सामामि विवादको निष्पत्ति करती हैं। इन 'लडायन (म.पु०)लाका गोतापत्य । लोगों में पापियाद, बविवाद और विधयो विवाद (RI. VIRL) प्रयलित है। । लाह (स ) घोतोका यह भाग सो दोनों शा हाग (दि. नी.) १ सप, गाय ताल्लु । मरगा | मावस निररपाछे। भोर कमरसे बोम लिया पर, सपन । ३ग, मुहलत । ५ युक्ति, तरकाव । ५ मति, जाता है । म्पर्धा, घडापरा । ६ यह म्याग आदि जिसम कोई लाल (म. पु०) लगनाति लगि गती वायलसात् भवन् । Vol, A, 60