पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२३५

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लाजहोम-लाट लाजहोम (सं० पु०) प्राचीनकालका एक प्रकारका होम || गुजरात तथा पादेश विभाग ले कर यह प्राचीन जनपद इममें खोई या धानका लावा आहुतिम दिया जाता था। संगठित था। प्राचीन मरकत प्रन्या यद लाट नामसे लाजा (सं० स्त्री०) लाज घञ्-टाप् । १ चाचट । २ भृष्ट प्रसिक है। मुसलमान भौगोलिक मसूदी ( A D. 910 धान्य, लावा। गुण-तृष्णा, छदि, अनीसार, प्रमेह, मेद 1ol 1 381), डालविरुणी (4 D, 1020 n Elliot 166) और कफनाशक, कास और पित्तोपशमक, अग्निकारक, तथा टन्लेमी (A D. 160 Vol 11 63 ) पेरिष्ठम आदिने लघु और शीतल। इसके मॉडका गुण-अग्निकारक इसका लाड, लारिस वा लारियक नामसे उल्लेख किया दाह, तृष्णा, ज्वर और सतीसारनाशक, अशेष दोपनाशक है। वे लोग इस जनपद के स्थाननिर्णय के सम्बन्ध में अनेक और मामपाचक । (पु० ) ३ भूमि, पृथ्वी।। स्थानों के नाम बतलाते हैं। सलविवणी, अबुलफदा लाज़िम ( अ० वि० ) १ जो अवश्य कर्त्तव्य हो । २ उचित, और इयन सैयदका कहना है, कि थाना और सोमनाथ मुनासिव । पत्तन ले कर यह लाटदेश बना है। मुसलमान वणिक, लाज़िमी ( अ० वि०) जो अवश्य कर्तव्य दो, जरूरी। सुलेमान फाग्ये उपसागरसे ले कर मलयार-उपकूल तक लाचुल (सं० क्लो०) धान्य, धान । सागराशको लाट-समुद्र बता गये है। मसूदीने सौमूर, लान्छन (सं० क्ली० ) लाञ्छ-ल्युट । १बिह, निशान। सुपर, थाना और अन्यान्य नगरोंको ले कर लारिमा २ दाग । ३दोप, फलंक । (पु०) ४ रागीधान्य, मडवा।। (लाट ) प्रदेशको सीमा निर्देश की है। वर्तमान प्रस्त लान्छनी (सं० स्त्री०) लिन्छन देखो। तत्त्वविदोंका सिद्धान्त है, कि सूरत, भरोंच, कैरा और लामी-मध्यप्रदेशके वालाघाट जिलेको बुर्हा तहमीलके ' । बडोदाका कुछ अंश लेकर यह लाट देश बना था। अन्तर्गत एक नगर । यह अक्षा० २७३० ३० तथा देशा० इस स्थानके अधिवासी लाट कहलाते थे। ये लोग ८०.३५ पृ०के मध्य अवस्थित है। यह नगर चारों ओर अनहिलवाड-राजके अधीन थे। किसी कारणसे उन तालाबप्ले घिरा है। उत्तरी भाग घने जगलसे ढका है। लोगों पर असंतुष्ट हो राजा कुमारपालने लाटों को वहां एक प्राचीन शिवमन्दिर और कुछ खंडहर देखे राज्यस भगा दिया । तभीसे वे भारतवर्ष के नाना स्थानों. जाते हैं। वह प्राचीन लामिज नगरका अवशेष समझा में जा कर बस गये हैं। राजपूतानेके मरदेश, बेरके जाता है। यहां एक किला दृटो फ्रटी हालतमें पड़ा है। मेकर विभागमें गाज भी इन लोगों का वास देखा जाता शायद १७०० ई०के लगभग गोंड राजोंने वह किला वा • है। परन्तु अभी चे उग्न प्रकार सुविस्तृत भावमें तथा वाया था। किलेके महातेमें लाझकाई नामक काली- प्राचीन नामसे परिचित नहीं है । ये सबके सब हिन्द हैं। मूर्ति प्रतिष्ठिन एक देवालय है। उक्त देवीमूर्ति के नामा- बहुतोंने जैनधर्म भी ग्रहण कर लिया है। राजपूताने के नुसार ही नगरका नामकरण हुआ है। लाड व्यवसाय वाणिज्यमें लिप्त हैं, वेरारके लाड रेशमी लोट ( पु०) १ किसी प्रान्त या देशका सबसे बड़ा कपड चुनते हैं। विरयात भ्रमणकारी टाभर्नियरने मल- शासक, गवर्नर । २ वहुत-सी चीज का वह विभाग या वार उपकूलम तथा थुनवर्गने सिंहलद्वीपमें लाडो नामक समूह जो एक ही साथ रखा, वेचा या नीलाम किया जाय। एक प्रकारको मुद्राका प्रचार देखा था। शायद वह लाट (सं० पु०) १ एक अनुप्रास जिसमें शब्द और , मुद्रा सुप्राचीन लादेश में प्रचलित थी। पीछे उस । नामके अपभ्रंशसे उसका लाडी नाम हो गया था। अर्थ एक ही होते हैं, पर अन्वयमें हेर फेर होनेले । भार्यावर्त भौर लाहुरी चन्दर देखो। वाक्यार्थ में भेद हो जाता है । २ वह लंबा वांध जो किसी लाट (हिं० स्त्री०) मोटा और ऊचा खंमा। उत्तर- मैदानके पानीके वाहवको रोकने के लिये बनाया जाता है। पश्चिम भारतमें बहुत प्राचीन कालसे अनेक प्रत्थरके लाट (सं• पु० ) देशविशेप, वर्तमान गुजरात प्रदेशका | खंभे चिराजित हैं। प्राचीन कीर्त्तिके आदर्श होनेसे वे प्रान्त भाग। विशेष विख्यात और जनसाधारणके आदरको वस्तु ।। नर्मदा नदीका मुहाना और मही नदीके तीरस्थ इसके सिवा इन सय स्तम्भों पर अति प्राचीन भारो में