पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२३६

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लाट २४१ जो मय इतिवृत्त लिखे हैं, वे प्रत्नतत्वविदो के बडे हो । भीमको गदा, मुसलमान लेग सम्राट फिरोतको टद चित्ताकपर हैं। उन विद्वानो ने बहु परिश्रम और आलो, स्नेको लाटी, कोई कोई महात्मा अक्सन्दरका पुरु चना द्वारा उन लिपिमालाका पाठ कर उनका प्रस्ततत्व विजयस्मृतिस्तम्म तथा टोम कोरियट आदि प्राचीन मन- निर्णय किया है। महामति जेम्स प्रिसेप्सने पहले रेज भ्रमणकारिगण उसे अगस्तम्म जानते थे। पर पहल रस वणमालाका आविष्कार किया। यह माला यत्तिकालम यूरोपीय प्रत्लतरयविदोंकी चेनासे जब उसका मी लाट वर्णमाला ( Lat charncter) कहलाती है। प्रत पाठ उद्ध त हुभा, नय लोका स देह नाता रहा। __भारत के विभिप देशों में इस प्रकारचे स्तिने यह स्तम्म पहले यमुनाफे दूमरे किनारे सलोरा गर लम्भ मस्तक उठाये खडे हैं। उनसे इलाहा जिले के शिवालि पादमूरस्थ खिजिरावादके समीप था। वादको नार हो प्रमित है। उस स्तम्मकी एक बगलमें पीछे यह दिली द्वारके बाहरमें ला कर गाड दिया गया है। गुमराज श मामयिक अक्षरो में तथा दमरो गठमे डा. कनिहमका कहना है, कि चद्दरतम्भ माचो ध्रुघ्न बौद्धसम्राट अशोकको मास्तिके जैसे अक्षरी लिपि राजधानीक किसी स्थानम था। चीनपरिव्राजक यूपन खोदी हुई है। दिल्लीको लारकी लिपिक साथ कटककी ! चुग उसको पाता वौद्ध विहार और धुस्मृतिसे धौली लिपि और गिरनरको पहाडी लिपिकी वर्णमालाका सयुक्त सम्राट अशोकके समकालीन सुद्यात् स्तूपका बहुत कुछ सादृश्य देखा जाता है। इसके सिवा उसमें उल्लेख कर गये हैं। स्थानीय प्रशाद है, कि उत्तमोचान कपद्दिगिरियोंको सेमितिक अक्षरमालाको जैसी लिपि भी देशसे यह स्तम्म बैलगाडी पर चढा घर खिजराबाद लायी देखी जाती है। उस साटम २६ श्लोक लिखे है। गया था। करीव १३५६ इ०में फिरोजशाह दिवे मुपसे उसमें भारतवर्गस्थिन जनपदादिका दिमाग और उस उसका निश्चलताका हाल सुन बहुत रुपये खर्स करके नाम, उस समयफे राजय का विवरण तथा पारस्य ! उसे दिल्ली रापे थे। उ हाने उसका शिखर मफेद और और शफजातिका विवरण लिया है। हस्तिनापुरमे काले पत्थरोंसे सुशोभित कर स्वर्णकलस रखा था। उस वाशीय राजो की राजधानी प्रतिष्टित होने तथा मनु समय मोनार गरिन नामसे प्रसिद्ध था । १६११ ६०में सहिता या महाभारतमें रसेनका कोई विशेष नहीं रहने रिलियम पिञ्च दिल्ली नगरम मा कर इसके स्यमय पर भी हमें उस लिपिसे मारम होता है, कि ताजमसे फ्लस और अर्द्धन द्राकृति चूडाका उल्लेख पर गये हैं। पहले श्री सदी में बौद्धसम्राट अशोषये राजत्यकालम ____ यह लाट अन्यान्य अशोषस्तम्भको तरह घोर लाल यह इलाहाबाद भूभाग एक प्रसिद्ध स्थान समझा पत्थरको वनी है। उसकी ऊचाई ४२ पुट ७ च है। ऊपरा जाता था। भाग ३५ पुर चौडा, पालिशदार गौर चिना तथा निम्न २भीतरी लाट-गानीपुर जिलातर्गत एक स्तम्म। भाग खरा है। यह क्रोध काठ सी मन भारो होगी। उसमें इलाहाबाद लारक जैसे राजर शक परिचय और उस स्तम्ममें दो प्रधान और यहुत सी छोटी छोटी लिपिया यशतारिफा विद्यमान है। उत्कीण हैं। उनमें से इसा जमकी श्री सदाके शेष भागमें ३दिलीलार-फिरोजस्तम्म नामसे परिचिन । पाठान | घौद्धसम्राट अशोक्की जो लिपि उत्तीर्ण है यही सबसे राजक्रोिज तुगलक ( १३५१ १३८८) ने इसके ऊपर पुराना है। यह प्राझो अक्षरम लिपी है। उसकी वर्ण सोनेका एक पलस लगा दिया है। तमासे यह खणलाट | माला भारतीय पणमालाका सनाची निश्शन है। नामसे प्रसिद्ध है। पूर्वकालकी सुप्रसिद्ध भारतीय राज | आज भी उसफ अक्षर साफ साफ दिखाई देत हैं । फेवल धानी मारे दिल्ली विभाग में इसके सिया और कोई दो एक जगह पत्थरको चिट उपपड़ पासे उस स्थानकी प्राचीन निदशा नहीं है। यही कौटिल्य विषयके गन्तभुत लिपि नए होगा है। उसफ शेर भागमें एन पर सम्राट पक मन त कोर्सिस्तम्म है। कालसे इम म्तम्भ, अशोकका आदेश लिया है जो इस प्रकार है-"धर्मको पिषपर्म नाना पियन्तिया प्रचरित है,-हिलोग उसे रक्षाफे कारण शिवास्तम्मके ऊपर एक पेमा शिराफ्टक Vol x 1