पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२३८

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लाट-बाटी विशय और परपर पद पालि भिक्ति और प्रत्यययोग राज्यशासनके साथ वर्तमान निगिरोध राजत्वका माम से साधित तथा रियापद माघ सारतस लिये गये हैं। अस्य प्रचार। भिलमा स्तम्ममें भी गुमशीय फलकादिको जैमी भाषा मापौद्धधमका प्रचार के लिए धर्मगुरु और का प्रयोग है, हा पहरे पहर भिलमा स्तम्भको सख्या प्रचारकनियोग । तिरूपण कर कालनिणय करनम समर्थ हुए थे। बौद्ध छा-पतिवेदक, राज्यरक्षण, धर्माधिकरण आदि पदों स्तम्मादिमें पदचिन्यास द्वारा काल मान चणित देखा पर व्यनि विशेषको नियुक्त कर राज्यका मङ्गल ध्यस्था जाता है। प्रचार। पाटलिपिको परमाला प्राचान प्रामारिपिक सिवा श-विभिन्न धर्मसम्प्रदायके मनपाथष्यका साम और पुछ भी नहीं है। स्तम्मक ऊपर छोड कर दूसरी बम्य करफ ऐषयमत स्थापाम राजाका आप्रजापत जगह ऐसी वर्णमाला नहीं देखी जाती, इस कारण उसे स्या-पूवरत्ता राजाओंफ पाथिय भोगविलासके लालिपि कहते हैं। अफगानिस्ताका क्पदिगिरियोको साथ अपने निराइ भामोदका पाथषयनिर्देश और पवित वर्णमाला उमसे कुछ घहो तथा प्राचीन सेमितिफ ढग पर माधुपुरुष सदर्शन, मिक्षादान और धर्मगुरु मादि मान अङ्कित है। रितु करक, दिल्ली, लाहाबाद, घेतिश, मुल , नायोंहो यथायोग्य सम्मानना दानकी अनुशा। रिया और राघिया आदिकी स्तम्मलिपि मारतोय ग्रामो यां-धम और नीतिविपया कथा, धर्ममहल, धर्म सेवीका सुन भिक्षुकोंको दान, सभी पर दया और गुरु ऊपर जिनने लार स्तम्मोको पात लिखा गइ उ7को | जनोंके प्रति मान्यका निर्देश और उसकी पर्याध्यता आरति मिग्न मिन है । विलोम पिरोनम्नम्भ नामक जो फ सम्बधमें मादेश प्रचार) लार है यह किसीस भी छिपी नहीं है। यह एक वा--'पशी या क्षिति या बादकी मीमासा, अनित्य सची भट्टालिकाये ऊपर स्थापित है। इसके ऊपरकी ससारके अविधाजनित गर्म का प्रत्याख्यान और जीव छालिपि बहुत प्राचीन है तथा निम्नदेनों में अपेक्षाकृत मुक्तिका प्रष्ट पधानिश। परवर्तिकाल म संम्रत भतरो में घोदित एक दूसरा शिला ११वा-धौला और गिरनार प्रशस्तिम यर्णित 'धर्म फरक उस्कोर्ण है। हो इश्वरका सर्वश्रेष्ठ दान है।' मेमो पौद्ध मत्राट अशोषक प्रयत्तित जो सोलह राट. १२या-चौदधगर्म विश्वासियोंके साथ अनुनय स्तम मायित हुए हैं और उनम जिन सब राजानु पूर्णक मताभिव्यक्ति। शासनका हाल दिया गया है उसे नीचे लिखते हैं- १३वा-सारे गनुशासनका सारमर्ग और सक्षित भीमा भनुगासन और उनका हात । उपदेश। लाट-कुरानके अनुसार पर अपदेयता । महम्मदके समय ला-वाचाय या यशार्थ पशुदिम का निषेध तथा यागिया और कोरत नाति इस देवताकी उपासना करती धर्मनोतिको परिशि गावे।। रा-रायमप आयुर्पद शिक्षा प्रवार और विना साटम (स निक) लार जाति सम्पधोय। - मृत्यके दुन्वित प्रजाओंकी चिकित्मा व्यवस्था, रासोकीहाट डिपोर-4 प्राचीन फदि । क्षेमे द्रात सुवृत्त बगलम फूमा खोदना और यक्ष रोपा। तिल कमें इनका डालेन । ३-प्रियदीके शासनकालका द्वादशवार्षिक समा | लाटपत्र ( स० पु०) दारची। रोप्रचार और पञ्चमयाधिक राजानुगन्य या रानभक्ति लारपर्ण (स. पु.) दारचीनी ! प्रदर्शन। लाटरी (म. स्त्री०) एक प्रकारको योज। इसका ४था -प्रियदीक Mसनकालके गन द्वादापि आयोजन विशेष पर क्सिी सार्वजनिक कार्यके लिये