पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२५२

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माया २५७ सुनते ही छाबमएडलो नाग उठती तथा अपने अपने । कोइ पक ही अपगध वारयार करता है, तो यह घरके और छालोंको घटा बजा कर उठाती है। तब | अपराध गुफ्तर सममा नाता है और अपराधी उम के ये सब मुह और हाथ पैर धो कर कपडा बदर लेते हैं। मनुमार सना पाता है। यदि कोई छाल शराब पीता पीछे शिरको ज्ला गमसे ढक कर तथा हल्दी रगको टोपी या चोरी करता है तो उसके शिक्षा और छात्रावासके पहन कर ए कटोरा और मैदेको थैली हाथमे लेते और पग्नि विचारसभासे निदा समझे जाते हैं। पीछे महारी मैदा लाने नाते हैं। उमके बाद वे मन्दिरके दो मनु'य इस छात्र के पैरमें डोरो वाध र मदिरके प्राङ्गणमें प्रणाम पर मठका प्रदक्षिण करते तथा को बाहर लाते और उसे वेत मारते हैं। कडी मार देनेके कोइ मन्जुश्री मन्दिर में जा कर गोम ह पत्र मढि मात्र बाद यह मठसे बाहर कर दिया जाता है। जो अपनी पाट क्यिा करते हैं। इच्छामे ब्रह्मचर्य भग पर मठ छोड़ देता है, यह उगली ____एक बजे मिग त्में म लामा निगसेंम स्तोत्र उच्च पहलाता है। स्वरमे गाते है । उस समय छातगण उसी दरवाने पर महके बाहर भी लामाओंका प्रभाव फैग हुआ है। या पर शिरम पीला साफा बाध पर एक स्वरमें यही | यदि कोर पिसीके ऊपर जुल्म करता है, तो हेइ हो मन स्तोत्र पढ़ते हैं। कुछ देर बाद हविल आ र द्वार सोठ या ललाटमें फाली रेमा लगानाले गेकोर लामागण देता और ये सपके सय मन्दिरमें घुसते हैं । भीतर जा| मटके पाहर आ कर उस जुल्मीका दमन कर साते हैं। कर सप अपने योग्य स्थान पर पैटते और सिको टोपी पे गेकोर लामागण मठा पक्ष अपर दो प्रतियोगियोंकी मोर नीचे रख देते हैं। उस समय अपनी थैली और सहायतासे लामा या ग्रह्मचर्याश्रमका नियम पालन करी क्टोरा टेहुनेके नाचे छिपापे रहते हैं। पीछे प्रधान | हैं। ये लामा प्राचीन बौद्धस यासियोंकी तरह सुख गायक के देवपदाश्रयभीत गाने पर अब कनिष्ठ मटपरि | स्पृहायनित नहीं हैं। सम्यासोफे समान वे अर्थलालसा दर्शक पीला साफा गिरमें लपेट पर रोहेके हथोडेसे | और मोननलिप्सात्याग नहीं पर सकने । गे लुगप लभेमे चोट देता, तब सब छात्र जलपर जा पर आदि तिम्वतीय प्रधान सघारामके अधीन बहुत सा भू चाय पाते है और फिर वापस आ कर अपने अपने सम्पत्ति है। उसकी आयमे उनका खच चलता है। इसके मासन पर बैठ पाते है । इस जलनाघरकी स्वतन्त्र मलामा धान कटोके समय सैक्डा लामा मटम निकल पर ध्यस्था है। जिस नियममे लडके चाय पीते है यह धान, चाय नेनू, नमक, मास आदि मागते फिरते हैं। जो विस्तार हो जाने मयसे यहा पर लिपा नहीं गया। मिलता है यह मठके भडारमें जमा रहता है। कोई कोई चाय वारनेके लिये पाच नौकर नियुत्त है । मठके यति लामा पुतली बना कर या मूत्ति काट कर छाप मार कर, दिनमें तोन दफे चाय पीते है। बदमे अधिकाश चाय कोष्ठी दना पर, चिकित्सा कर और भाई पर दायमूर होती है। कोट कोर धना, प्रादेशि शासन, ना उपायसे अर्धा सच कर मठका पर्ग चाते हैं। कर्ता और घीन सम्राट त्योहार मादिमें गमाओंकी! नो ऐसा नहीं कर सकते, ये मठम रहकर दूसरा दसरा चाय पिलात हैं। सामामठको सिमसाम पाया। काम करते हैं। कोई कोह याणिज्य परफे स धारामा जर गरम दोता है उसमें करीब दो मी मन | गौरव बढाते हैं। ये सब धर्माचा सूद रेनेसे जरा भी मरता है। वाज नहीं भाते। सचमुच ये मुष्यवसारी और देश ____ मठकी प्रनारिन प्रयास उलयन करने, पिसी प्रकार | महानन गिन जाते हैं। का मसौम्य पा असथाहार विनाने अपना ब्रह्मचर्य भारतीय बौद्धोका घेशभूषा भारतीय ऋतुमाके अनु मग रास प्रातिमोक्षविधिके अनुसार उमा विचार सार बना था। शव बौद्धधर्म तिब्वन आदि तुपारमय . होता धीर सजा दो भाता है। सामाय अपराध होन। दशमि फैर रहा था, उमी समयसे घेशभराका पग्यिरान पर तिरस्कार या लायना द्वारा छुटकारा पाता है। यदि हो गया है। तिम्दतीय लामा या वीरमति भयानक Tot 10