पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२६१

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लापा लामो तसोड ख-प के भतीजे गेदेन डब उक्त , है। उनमें से बहुतेरे लामाधर्मोपासक हैं। पूर्व भोटयासिगण सम्प्रदायके प्रधान धर्माचार्य (Giand Lama ) हुए। योन यमसेवो है तथा कुछ दोनों ही धर्म को मानते हैं। लोगोंके निकट वे अवताररूपमें समझे जाते थे। वोन धर्माचारिगण लामाधर्मके भी पृष्ठपोषक हैं। १६४० ई० में मुगलराज गुसरी खाने तिब्बत जोत फर यूरोपमें कालम तातार जातिकी यामभूमि भलगा पञ्चम लामाचार्य डग-वड लौ-जङ्गको दे दिया। तभोसे नदीतीर तक लामाधर्मको अन्तिम सीमा है। तोरगोत् गे लुग-प सम्प दायके लामाचार्यगण राजशक्तिसे भूपित । जातिके भागनेके बाद भी यूरोपके स्मराज्यमं इन और हुए । १६५० ई० में चीन सम्राटने उन्हें तिब्बतका अधि. धैक नदोके मध्यवती स्थानमें २० हजार घर कालमक राज कबूल कर मोगलीय 'दलई' (समुद्र )की उपाधि तातारका बास धा। उनमें से परीव लाख मनुष्य लामा. दी। तभीले यूरोपीय परिव्राजकोंके निकट वे तथा उनके धर्मावलम्बी हैं। तोरगोत् जाति जवसे भागी है, तवसे वशधरगण दलई लामा नामसे परिचित हुए हैं। तिब्ध वह देवरूगी पुरोहित लामाको श्रेष्ठ नहीं मानती मोर न तीय समाजमें वे गल व-रिन-पोछे नामसे प्रसिद्ध है। उनका आदेश ही पालन करती है । उन लोगोंमें एक श्रेष्ठ १६४३ ई०में उन्होंने लासानगरके समीप पहाडके पुरोहित है। बाज भी ये लुकछिप कर उन लोगोंको धर्म- ऊपर सुप्रसिद्ध पोतल प्रासाद-मन्दिर बनवाया । रक्षाको व्यवस्था देने या रहे हैं। मज भी भलगा नदोके तिब्बतके दूसरे दुसरे लामा-साम्प्रदायिकगण उन्हें तथा | किनारे उनको धर्मशक्ति फैल रही है। कालमाकोंके श्रेष्ठ उनके वशधरोंको अवलोकितका अवतार मानते हैं। पुरोहित अभी भी लामा नामस पूजित है। दलई- किन्तु राजशक्तिप्राप्त लामा डग बट अपना शेष जोवन लामाको सर्वश्रेष्ठ नहीं मानने पर भी रुस गवर्नमेण्टके शांतिसे दिता न सके । प्रभुत्वस्थापनमें उहाम आकाडमा निर्वाचित एक प्रधान लामाके उपदेशानुसार वे लोग तथा आञ्चुजातिके विद्रोहसे प्रपीड़ित हो वे इस लोकसे अपने धर्मकी रक्षा करते हैं। चल वसे । छठे लामा चीन-सम्राटके हुकुमसे मारे गये। इतिहासका अनुमरण करनेसे जाना जाता है, कि पीछे उन्होंने अपने हाथमें तिब्बतका कर्तृत्व ले कर सारे | पहले भलगा नदीतट तक दलई-लामाका यघिकार विस्तृत राज्यमें धर्मनीति और राजनीतिका सामञ्जस्य विधान था। उनके निकट दायित्वमस्त अनेक वौद्धपुरोहित प्रति करके वहां महन्त नियुक्त करनेको व्यवस्था दी। पिन्तु वर्ण उन्हें लानानगरी में राजकर भेजने थे। ये सव लामा गेलुग प सम्प्रदाय पञ्चम लामाकी चलाई प्रथासे दिनों पुरोहित अभी स्काविनर नामसे प्रसिद्ध है। तोरगीतोंके दिन उन्नति कर रहे थे। इसी समय कुछ चीन राजकर्म भागनेके वादसे स्काविनरोंने कर भेजना बन्द कर दिया। चारियोंके तिब्बतमें आने पर भी इस सम्प्रदायके लामा अवशिष्ट उल्लुस (Ulluse) के स्काविनरगर अभी चार्यगण यथार्थ में राज्यके अधीश्वर समझे जाते थे तथा विभिन्न चुसल्में विभक्त हैं। १८०३ ई०के विवरणसे पता सभी सम्प दायभुक्त लामा उन्होंको श्रेष्ठ समझते थे। । चलता है, कि कालमा जाति की जनसंख्याका दशमांश ___ यह लामाधर्म केवल तिब्बतमें ही नहीं, दूर दूर पुरोहितप्रधान होने तथा स्वजातिसमाजमें प्रभाव फैला देशों में भी फैल गया। अभी वह पश्चिममें यूरोपीय कर उनके अर्थसे प्रतिपालित होनेके कारण रूस गवर्न- कासससे ले कर पूर्व में कामश्कटका तथा उत्तरमें | मेण्टने १८३८ ई०में प्रधान लामा जम्बोनमककी सहा- बुरियात् सडिवेरियासे दक्षिणमें सिकिम और युन-नान् यनासे उक्त अयौक्तिक प्रभावको खा कर डाला । पहले तक विस्तृत हैं । इस विस्तृत भूभागमे लामाधर्म विस्तृत | दुष्ट और मालसी आदमी अर्थोपार्जनमें अक्षम हो इस होने पर भी वहांकी अधिवासियोंको संख्या बहुत थोडी पुरोहित-सम्प्रदायका आश्रय लेते थे तथा धर्मप्राण-निरीह है। किन्तु सव कोई लामाको राजा और धर्मगुव | वौद्ध-कालमकोंसे धर्मशा वहाना कर रुपका संग्रह करने मानते हैं। थे। रूस गवर्नमेण्टने हजारों कर्मण्य पुरोहितोंको सारे तिब्वतराज्यकी जनसंख्या ४० लाखसे ऊपर नहीं| सम्प दायसे निकाल दिया था।