पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२७३

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२७८ लालगञ्ज-मालक रखा। अङ्गज राजने यादमे यह सम्पत्ति अलीमर्दन मां ८१०१० मध्य पटना है। इस नगर, पाम ही एक नामक इस के एक व्यक्तिको दे दी। अभी छितानी, हफ्ते में दो दिन बाट लगनो। पहले यहा नरसीली पहासु और धर्मपुर आदि स्थानों यह सामन्तवंश यड़ी मदर था। १८६० में बददलमा नगर उट कर चला प्रतिष्ठाके साध वास करते हैं । ये आज भी अपनी हिन्दू याया है। मर्यादा भूले नहीं हैं। कुमार और ठाकुरानी उपाधि तथा लालगह-दिनाजपुर जिलान्तर्गत एक गण्डमाम । यही विवाह-कार्या में हिन्दू पद्धति आज भी इनमें चलती है। एक प्राचीन परीयान । छितावी-शाहवंश इस ममय गाँडा मसलमान होनका (भविन्य ROYEE) उद्योग कर रहे हैं। लालगला-उड़ामा प्रदेश में प्रयाहित एक नदी। यह बहुतेरे इन्हें नौ मुसलिम नामसे भी पुकारते हैं। जयपुर सामन्तगव्या. उत्तर ( अक्षा ५५ ३० तथा इनका आचार ध्यवहार हिन्दू और मुसलमान दोनों सा देशा० ८३°१८० से निकल कर जयपुर और विजा है। ये इसलामधर्म दीक्षित ठाकुरबको छोड कर, नापट्टम जिले के योग हो कर यदती हुई बंगाल को (अन्ना और किसीके साथ पुत्र-कन्याका बादान प्रदान नही , ८१२३० तथा देशा० ८४ पृ०) गादी सागिरी है। करते । विवाह के समय कुलमर्यादा और गोत्रादि पर लालगिरिधर-- एक भाषा वि। ये यसबारे के रहनेवाले विशेष लक्ष्य रखते हैं। विवाह. जन्म और मृत्यु सरकार प्रामण धे। इनका जन्म-चिन् १८०७ में gमा था। मुसलमानों सा है। विवाहमें साजी पुरोहिताई करने है इन्होंने नायिकामेरका एक प्रत्य बनाया जिसे भाषा कवि तथा शवदेह दफनाई जाती है। कोई भी कलमा नहीं उत्तम समझते है। पढ़ते । ये हिदू-देवदेवीकी भी पूजा करते हैं। लालगुली-यम् प्रदेश चेलापुर उपविभागका एक लालगढ-मुजफ्फरपुर जिलेको हाजीपुर तहसीलका एक प्रसिद्ध मारना । बेलापुर नगरसे ८ मोल उत्तर काली नगर और वाणिज्यकेन्द्र । यह अक्षा० २५५२३० तथा ' नदी प्रायः ३०० फुट मे गिरती है। इन भरने के पास देशा० ८५ १० पू० के मध्य गएडकके पूर्वी किनारे अव- एक प्राचीन दुर्गहै। कहने ६, फिगोंद-सरदार लोग स्थित है। जनसंख्या १९ हजारसे ऊपर है। यहांसे ' दुन्ति जन या कैदियोंको दुर्गकी छनसे इस गभीर अल- चमडे, तलहन, अनाज, सोग आदि द्रव्यों को रफ्ननी दोतो पारामें फेकने थे। है। नगरसे एक मील दक्षिण जिम गाघाट मे माल-अस लाल गुरु-उत्तर भारतमें रहनेवाली भंगो शानिक एक वाव नाव पर लादा जाता है वह वसन्तबाट कहलाता है। पूजिन देवता। ये राक्षस आरण्य किरात नामसे लालगज-युक्तप्रदेशके गोरखपुर जिलान्तर्गत एक छोटा, परिचित है। नगर। यह कुचानू नामक एक छोटी नदीके किनारे : लालगोल-मुर्शिदाबाद जिलान्तर्गत पक बड़ा गांव । यह अवस्थित है। गोरखपुर-सेनानिवाससे सुलतानपुर पद्मानदीके किनारे भवरिधत है और एक याणिज्य केन्द्र में जानेका गस्ता इसी नगर हो कर गया है। यहां एक , गिना जाता है। सुन्दर बाजार है। लालन-आसामको एक पहाडी जाति। आसाम देखो। लालगज-युक्तप्रदेशके मिर्जापुर जिले के अन्तर्गत एक नगर। लालचंदन (हि. पु०) एक प्रकारका चंदन । इसका पेड़ यह अक्षा० २५ १ उ० तथा देशा० ८२.२५° पूल्के कदमें छोटा हाता है और मैसूर प्रान्त तथा अर्काटमें बहुत! मध्य गाथेय उपत्यकाके ताराघाट पहाड पर भवस्थित ! यतसे पाया जाता है। इसके ऊपरकी लकड़ी सफेद और है। समुद्रकी तहसे इसको ऊंचाई ५०४ फुट है। यहा हीरकी लकडी कुछ कालापन लिये लाल होनी है। इसे एक,दाजार है। घिसनेसे बहुत ही लाल रग और अच्छी सुगंध निकलती लालगञ्ज-अयोध्याप्रदेशके रायबरेली जिले की. दलमौ। है। यह भी चदनकी तरह माथे पर लगाया जाता है। तहसोलका एक नगर । यह अक्षा० २६६ उ० तथा देशा० । विशेष विवरण रक्तचन्दन शब्दमे देखो।