पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२७४

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सानच-लासपुर २७६ लालच (हि.पु.) कोई पदार्थ विशेषत धन मादि प्रात। कर मात्रय रिया था। भ गरेन और मद्योध्याराको परनेको इतनी मधिक और पेमा कामना जो कुछ मदी। सेनाने जब इनका पीछा किया, तोरहोंने कोई उपाय न भोर येढ गीहो, कोई चीज पानेकी यहुन युरो तरह इन्डा देख यहीं अगरेजोंसे सन्धि पर ही था। परना गोमा लालदरवाजा-उत्तर पश्चिम प्रदेफे महारनपुर और लार यी (हि. पु०) भैसा। देहरादुन निलेको मध्यवती शियाटिक गिरिमालाका एक लारयाद-ए भाषा कयि । कवित्त और पुएडलिया, गिरिपध। पद समुद्रका तइसे २६३५ फुट ऊचा है छन्दोंमें इनकी करिता बहुन सुन्दर हुइ है । इनकी कविता, और अक्षा० ३३ १३ उ० तथा देशा० ७७ ५८ पू०के प्राय कृ'मय होती थी। वीच पडता है। रार रन्द्र (स.पु०) भापालीलावतीके प्रणेता। 'लाल द्रवाजा-मुगेरसे बहुन समीप ग गाके तट पर भर लालचाच (हि • पु०) शुक, तोता। स्थित एक रेल्वे स्टेशन । यहासे मुगेर चदरी प्राय एक राल्चांद-उत्तर पश्चिम प्रदेशमें रदमेगाले एक हिंदू माल दूर पडती है। ग गा पार करने के लिये यहा जहाज कपिरहोंने फारसी में एक दीयान पनाया। १८५२६०में भी लगता है। इनको मत्यु हुई। 'लालदाना (हि.पु०) लाल रंगका पोस्तेका दाना, लाल लालजी (हि. पि. ) जिसे बहुत अधिर लारच हो, अमावम। लोमी। ।रालदास-अलवारवासी मेमोजातिके एक साधु । पे लालचीता (हि.पु०) लाल फूलका चिपक या चीता। लालदासी नामक पैष्णय मम्प्रदायफे प्रवर्तक थे तथा चीता देखो। १५४० इ०मैं विधमान थे। इन्होंन कुछ दिन तग धौलीपुर सालयीना (हि० पु०) एक प्रकारका कबूतर । इसका सारा बजोली भीर गुरगांव जिले के सोही गांवमें जा कर अपना शरीर मफेद और शिर पर लाल छिरक्यिा होती है। । मत प्रचार किया। बन्दोली में रहते समय इनके एक राल्टेन (हि. ना.) पिसा प्रकारका यह दाना आदि पुत्रको मृत्यु हो गइ । यहीं उसका सस्कार किया गया। जिसमें तेल्या खजाना और जलाने के लिये वत्ती ल्गो। १६४८ १०में जब इनकी मृत्यु हुा, उस समय इनके एक रहता है । इसके चारों भोर तेज हया और पानी आदिसे। पुत्र और पक ग्या नोषित थी। पसानफ रिपेशीया रमी प्रकारका और कोई पार लालन (म० मा.) एल णिच-च्युट । मत्य त स्नेह करना, दशी पदार्थ रगा रहता।। इसाव्यपदार प्रकाशके, प्रमपूर्व वारकोंका मादर करना, लाट । लिये ऐसे स्थानों पर होना है जहा या तो प्रमाणको लालन (हिं० पु०) १ प्रिय, प्यारा पचा। २ कुमार, वारक। प्राय पर स्थानसे दुमरे स्थान पर ले जानेकी मायश्य (स्त्रो०) ३ चिरौंजी, पियाल । पता होता है या ऐसा जगह भ्यायिरूपमे रम्बनके गालनपालन (सं० पी० ) यत्नपूयक प्रतिपालन, भरण लिपे होता है, जहा चारों ओर हया भाया करता है। इसे पोषण। फटील भी कहते है। राल्नीय (म०नि०) लम णिच् अनीयर । लालन करने के लारसी (हि.पु.) लाल रगका एक प्रकारका नगाना। योग्य दुलार या प्यार करने के लायक । यह प्राय नषों और मालियों माविम मोतीफे दोनों भोर लाल पानी । हिं० पु०) राय, मद्य । लगाया जाता है। गरपिलका (दि. पु०) लाल रगका पर प्रकारका क्यूतर। शल्पा-युकप्रदेफे विजनौर जिलास्तात एक बडा उसी दुम गौर ने सफेद होते है। गांय। यह मशा० २६ ५२ उ० तथा गा० ७. २३ गलपुर--पूणिया मिरेक मतर्गत एक नगर । यह मशाल पू०क मोच पाता है। यहा १७७४ १०म रोदिला मावार, २५ २६ उ० तथा देशा० ८७ २० पू०के मध्य मयस्थित जिल्ला जाने ततुनाको लडाइ म गरेजो से हार या । है। पूणिया नगरसे २१ मोल उत्तर पश्चिममें परता है।