पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३२६

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लिच्छविराजवश ३३१ उपाधिमे भूपित थे। स्यय ममुद्रगुप्त प्रयागरे सुप्रसिद्ध । य शुरमा पहले महासात पद पर परिचित होने स्तम्मलिपिमें लिच्छरिदौहिवस्य महादेच्या कुमारदेच्या | पर भी अनेक श्रेष्ठ राजाओं के साथ आमीयता सूत्रमें मुत्परस्य महाराजाधिराज प्रीसमुद्रगुप्तस्य" इत्यादि। आरत हुए थे। उनको पहन भोगदेवो माघ शरसेन उपाधिसे सुपरिचित दे। अधिक्ष सम्भर है, किच? राजाका विवाह हुया था। यशुवर्माका गिलालिपिमें गुप्तने भारत मानाय अधिकार परनेये वाद शैवघम का लिया है, कि उनकी वहन शरसेन महिपो भोगदेवाचे प्रचार नाह्मण्य प्रधानताको स्थापना और दिग्विजयक | गमसे राजा भोगरमा जन हुआ। भोग घाने मी उपरभमे नेपारकी यात्रा थी। उस समय नेपालमे | पतिको पुण्य कामनास शरभोगेश्वर मूर्ति प्रतिष्ठा का बुद्धभुर यूपदेव अधिष्टित थे। लिच्छविपति १म था। गुप्तसम्रारस युद्ध में परास्त और अपनी पयार भोट और चीनर इतिहासस भी जाना जा सकता या आत्मीया कुमारदेयोग प्रदान कर याना| ६,कि भोट (तित्रत ) देशके प्रसिद्ध राना स्रोन त्सन परने को बाध्य हुए थे। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य | गमपो ने ६३७ १० नेपालपति अशुधर्मात कन्या प्रभारसे नेपाल राजकुमारने शैयधर्म स्वीकारणे माय भ्र कुटि देवाको शहा । बाज भी भोट देशर्म 5 कुटि हरदेव नाम ग्रहण किया था। नेपालको पावतीय देचा पूना जाती है। मामा दाद देवा । वशावरम मा लिखा है कि मानदेवके पितामह सदन ____ अशुपमा समयमें हो लिच्छटिम नरेद्रदय देवन पशुपतिनाथके निशरको प्रतिष्ठा की यो। पशु और उनके पुत्र शिवदेव याचिर्भूत हुए । नगारमें गोर पतिनाथ मन्दिरफ उत्तरो दरवाजे पर एक प्रस्तरीक मादिटोलस शिवदेवका पर शिराफ्ना पाया गया ऊपर प्राय १४ हाथ ऊचा शङ्करदेवका प्रतिष्टित रह है। उसम ३०६ वा ३१८ सम्बत् अङ्कित है। इस लिपिम विशल विद्यमान है। उस प्रस्नर-दिशमें मानटेवर महामाम त म शुरमका प्रसद्ग रहनस उसे हम लोग ममपर्मे ४१३ (क) मम्मत्में उताण छोदित लिपि खीं सदीकी लिपि आसानासे वह मक्ते हैं। गुप्त भी है। यह लिपि पढनेस मालूम होता है कि नययमाने सम्रारोंक साथ नपाल राजाका बहुत पहलेस सम्बन्ध मानदेय और नगको मलाइके लिये जयेश्वर रामक था । इस हिसावसे उस रिपिको गुप्त सपत् मापक रिद्धप्रतिष्ठा करके उनकी सेवामें यशयनीवी अथान् । मानन पर भी बद ३१६+३२८६.७०की होती है। चिरम्यायो सम्पत्ति दानवो थो। लिच्छनिएति शिवदेवक साथ मोम्बरोपति भोगवमा मानदेवये वाद उतरे मोटर TANT को नया और मगधपति महाराज आदित्यसोयी बैठे। महादेवके पुत्र वसन्तदेव थे। काठमाण्डुके लगन | दौहित्री धामनी वत्सदेचोका विवाह हुमा । उस बन्स तोरस्थ लुगाल्देवी मन्दिरसे वसतिदेवको १३ देयाके गमसे रिच्छवि उलवेतु परचक्रकाम उपाधि सम्वत्को रिपि माविष्कृत है। इस शिलाफ धारी २य जयदेवने ज मनःण किया। इन २य जयदेव उपर गड्ढवत्र चिहित रहनेये वसतदर विणुमत कोपिलालिपिमे जाना नाता है, कि उन्होंने गोड गोड समझ जाते हैं । २य जयदयका निलिपिम ये 'भाता कलिङ्ग और फोलपति भगदत्तपशाय गोहपदेवकी रिविप्र' और 'उद्धा तसामतान्दित इत्यादि विशेषण कन्या राज्यमतीको च्यादा था विशिलाफलकमें त्यागी, स पिथैपित हुए है। दसतदेरक पुत्र उद्य व ये। मानधन, विशालनयन और सौजन्यात्नाकर नामसे २१यदेवी रिपिके मवसे उदयदेयके वाद उस घा परिचित है। १३रानाने राज्य क्यिा। इन तेरह रानाओंक नाम ___य जय के श्वशुर श्रोहपदेषको ले कर बहुत नहीं मिलते। उनमेंसे केरल ध्रपदेय नामक एकराना दिन तर गोरमात चराया। भगदत्तवंशीय राने मग पानाम निकला है। इन्दों ध्र वदेवक समय मदा ! योतिष (आसाम) राय करते थे। ७वी सदोमें सामत अशुवर्माका अभ्युदय हुमा। ये वडे मतापा | पाणमट्टने हपचरितारचना 11 अपना इस प्रकार राजा थे। परिचय देगपे हैं-