पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३३०

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निविङ्कर-निम्बु लिविङ्कर ( म • पु०) लिविक्रीतानि हद पोदरादि । मोटा सूता कपडा तप्यार होता है। भारगर गोण्डाल त्वात् द्वितीयाया अलुक् । लिपिकार। रेलपथ खुलनेने पहले यहाका उत्प-न द्रव्यादि घोलेरा लिथी (स. स्त्री०) लिदिदिकारादिति डीप। लिपि बन्दरसे विमिन स्थानोंमें मेजा जाता था। लिमाट। लिमरी राज्य काठियावाड विभागके मध्य द्वितीय लियुना (स. स्त्री०) लतिका, येल। श्रेणाका सामन्त राज्य गिना जाता है। यहाके सरदार लिम्प (स० पु०) लिम्पनीति लिम्प (मनुपसर्गात् लिम्माविन्दति ।। बहरेन गार्मेण्ट के साथ १८०७ ६० मघिसूत्र में आवद्ध पा ३।१।१३८) इति शालेपना , पोतनेवारा। हुए । ज्येष्ठ पुत्र ही राजसिहासन के अधिकारी हैं। इहे लिम्पट ( स० पु०) पिड ग, लपट! गोद लेनेका सनद नहा है। ठाकुर साहब यशोवत लिम्पाक (स. क्लो०) १ निम्बूकविशेर, एक प्रकारका सिहजी फ सिहना झालावशाय राजपूत थे। इहे नियू । वैद्यकमें इसे सुरमि, म्यादु थोडा अम अन्न राजकोटके रानकुमार कालेजर्म शिक्षा मिलो थी । १८७६ रुचिकर, वातश्लेष्महर, हृद्य छबिनाशक थोडा पित्त १०में उहान शासनाय अपने हाथ लिया था। यहाके चद्धक कहा ह । (राना.) (पु०) ३ निम्बूब वृक्ष पक | सादार पालिटिक्ल एजेएट की सम्पत्ति विना अपराधी प्रकारके नोवूका पेड। ३ खर, गदहा । प्रजाको प्राणदण्डको सजा दे सकते है। लिम्पि (स.पु०) लिपि, लिनायट । राजाका यागिय राजस्व २२१३७० रुपया है। जामेसे लिमरा-यम्बर प्रदेशके गोहेलनाप्रान्तस्थ एक छोटा, ४ ५३४ २० गृटिश सरकारको और जूनागढके नयाको सामन्तराज्य । अमो यह राज्य तीन पट्टीदारों में चंट | देना पड़ता है। राजा पण्यद्रव्यके ऊपर किसी प्रकार- गयाहे। वार्षिक थाय २० हजार रुपपेको है।। का महसूल नहीं लगाते । राजाके पास ७७ सिपाही है वडोदाके गायकवाड यागिक ६३४ और जूनागढके | जिनर्मस २७ घुडसवार है। इसके सिमा ३४ हथियार नावको २७८ रुपया कर देना पडता है। लिमरी नगर| यद सिपाही भी हैं। राय भरमें १७ स्कूल, १ कारागार शोनगढमे वोस पश्चिम उत्तरम अपस्थित है। नगर | और १ अस्पताल है। भाग समृद्धिसम्पन है। २ उक्त राज्यकी राजधानी । यह अपा० २२३४ उ० रिमरी-वम्बा प्रसिडे सो गुजरात विभाग अन्तर्गत तथा देशा० ३१ ५३ पू. भोगार नदीके उत्तरी, किनारे मालगयार प्रातका एक देती राज्य । यह अशा० २२३० अपस्थित है। जासरया १२ हजारसे ऊपर है। यह से २. ३७३० तथा दे०७७ ४४ से ७१ ५२ पू के | Tगर पहले धनजनपूण और समृद्धिसम्पन था । यहाका मध्य अप्रमियत है। भूगरिमाण २४४ वर्गमाल और | प्राचान दुर्गादि अभी टूटी फूरी अवस्थामें पड़ा है। जनसरया ३१ हजारसे ऊपर है। शहर में एक अस्पताल और एक पुस्तकालय है। ___ यह स्थान स्वभावत ही समतल है। वालुकामय लिम्वमट्ट ( स० पु०) एक सम्रतज्ञ पण्डित । ये पूर्णानन्द भूमिमागर्म खेतो-चाराको उतनी मुविधा नहीं है। कहीं| प्रयधके प्रणेता नारायणके पिता थे। पहों काला और लाल मिट्टो नजर आती है। यहा र लिम्यु-नेपाल और मिश्मि सीमान्तवासी जातिविशेष। तथा अन्याय माना जातिका अनाज उत्पन होता है। यह पहाडी किरात जातिको एक शापा समझी जाती मोगाती नामक एक छोटो नदो राज्य हो कर बद्द गइ है। पौद्धधमावलम्बी होने पर ये लोग बहुत कुछ ब्रह्मण्य है। प्रोप्नकाल में उस जल मारा हो जाता है। कमी | धर्मसेवी है। ये लोग ह क्ढे, मजबूत और कर्मठ भी नदी याद था पर पसलको बहुत नुक्सान पर होते हैं। गाय, सूमर और पालित पशु पक्षीकी रक्षा करने दी है। यहाके साम तराज रुपयेके बदले मनाज म तथा पहाडी भूमिमें अनाज उपजानेके सिवा ये योर को। परमें लेते हैं। , यह स्थान उष्णप्रधान होने पर भी मो कार्य नहीं करते । वासको फररी तथा इलायो पेटके विशेष स्वास्थ्यप्रद है। लिमरी नगरमें एक प्रकारका । पत्तोंसे ये रोग अपना घर बनाते हैं। दार्जिलिङ्गके