पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३३३

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युक्ता लोला-लोलावती लोला (हिं० पु० ) १ स्याद रंगका घोटा। (वि०) लीलाभरण (म० लो० ) वह अलङ्कार जो पद्ममालास २नीला। । बना दो। लोलाकमल ( स० क्लो० ) लोलार्थ कमलम् । कोडापद्म, , लीलामनुष्य (सं० पु० ) छावेशी मनुष्य, चद्द जो मनुष्या- कमलका फूल जिले क्रोडाके लिये हाथमें लिये हो। फार हो किन्तु मनुष्य न दो सिर्फ इस प्रकार देवाशति- लोलाकर (सं० पु० ) छन्दोभेद । विनिष्ट हो। लीलाक्लह (सं० पु०) क्लहका मान या प्रकाश लीलामय ( स० त्रि०) लीलाम्बरूणे मयट । लीलास्वरूप, लोलाखेल (सं०वि०) क्रोडाशील, खेलनेगला। । कीडा भावसे भरा हुआ। लीलोखेलो (सं० स्त्रो०) छन्दोभेद । इसके प्रत्येक चरण में लीलामात (स अव्य.) गेलने पेलते। पन्द्रह अक्षर होते है तथा सभी गुरु होते हैं। लीलामानुपविग्रह ( स० पु० ) १ छमवेशी मनुष्य।२ श्री. लोलागार (स क्लो०) लीलार्थ आगारं । लीलागृह, खेल । कृष्ण । का घर। लोलाम्बुज (स० क्लो०) लोलापद्म । (कथासरित्सा० २०६९) लीलागृह (सं० लो० ) पेलका घर । लीलायुध (सं० पु०) एक जाति | नोलायुध देखो। लोलागेह ( स० क्ली०) क्रीडागार, रोलका घर। लोलारविन्द (सं० क्लो०) कीडा, पेल । लीला ( स० वि०) चंचल या निरन्तर क्रोडे च्छु अंक-लीलारविन्द (सं० लो० ) लोलाकमल । लीलावज्र (स० क्ली०) एक प्रकारका शस्त्र जो चनाकार लोलाचन्द्र-एक प्राचीन कथि। लीलाजन-हजारीबाग जिलेमे प्रवाहित एक नदो। यह लीलावतार (२० पु०) लीलाप्रकटनाथ विगुका अवतार, गयाधामसे तीन कोस दक्षिण मुहानेसे निकल कर फल्गु | वह अवतार जिसमें विष्णुने लीला दिग्नाई थी। नामसे गगामें मिल गई है। लोलारत् (सं० दि०) लीला विद्यतेऽस्य मतुप नस्य व. । लोलावल (सपु०) जनपभेद । नीलाचल देखा। लीलाविशिष्ट, मोडायुक्त। लोलातनु (स ० स्त्री०) लोलाप्रकटनार्थ धृतदेह, वह रूपया | लीलावतो (स० वि०) लोलावत् स्त्रियां डोप । १ विलास शरीर जो खेल दिखलाने के लिये धरा जाता है। वती, कोड़ा करनेवाला . ( स्त्रो०) २ प्रसिद्ध ज्योतिर्विद् लीलातामरस (स'० क्लो० ) क्रीडाकमल, लीलाकमल। भास्कराचार्यकी पत्नी का नाम । इस लीलावतीने लोला- लीलादग्ध (सं० वि० ) जो अपनो इच्छासे भस्मीभूत हो | वती नामको गणितकी एक पुस्तक लिखी थी। लोला. गया हो। वतीमङ्गलाचरण श्लोककी टीका गणेशने लिबा है- लीलाद्रि (सं० पु०) लीलाबल । ___ "गोदावरीतीरनिवासिनः महाराष्ट्र देशोद्भवस्य श्रीभास्करा लीलाधर भट्ट-दाक्षिणात्यवासी एक कथि। कवोन्द्र- | चार्यस्य ग्रन्थकत: मुप्रिया लीलावती विरहविक्षिपणहृदयस्य ता चन्द्रोदगमे इनका उल्लेख है। पटैलीलावत्या लीलावतीमिव" । लीलानटन (स० को०) कोतुकावह नृत्य। ___ भास्कराचर्य भी लीलावती नाम की एक गणितकी लीलापद्म (स० क्लो०) लीलार्थ पद्म। क्रीडाकमल। । पुस्तक लिग्न गये हैं । इस ग्रन्धका मङ्गलाचरणश्लोक मीनाकमान देग्यो। इस प्रकार लिखा है- लोलापात (० पु०) लोलाचता । "प्रीति भक्तजनस्य ये जनयते विघ्न विनिधनन् स्मृत लीलारुपोत्तम ( सं० पु०) श्रीकृष्ण। राम और कृष्ण स्तंवृन्दाकवृन्दवन्दितादं नत्या मतङ्गाननम् । ____ इन दो प्रधान अवतारों में राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने पाटी मद्गणितस्य वच्मि चतुरप्रीतिपदा प्रस्फुटा __ है और कृष्णलीलापुल्पोत्तम । संक्षिसादरकोमलामनपदानित्य लीलावतीम् ॥" . 1 (सं० क्लो० ) लीलाकमल । (लीलावती)