पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३३४

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लीनारघूत-सकसाज ३३६ ३ पुराणानुमार मरिपिन राजाका खी। (माकपल्यपु० का छोटा टुण्डा, तहगत। इस देशगें मुसलमान १२३३१७) ४ पुगणानुसार एक पेश्या। (मत्स्यपुराण) मदरासी और वरमा लोग इस प्रकार पडा लपेटन है ५ग्यायप्रन्यायिशेय। सपूण जातिकी एक रागिणी। जिसमें पाछे लाा नहीं पायी जाती । २पडेका इसमें मय शुत म्यर लगते हैं। यह रागिणी रहिता गुण्डा जो हमामत बनाते समय ना इसलिये पैर पर जयनी मौर देसारसे मिल कर बनो पदी गई है। आगे मार देता है जिसमें पाल उमो पर गिरे । ३लोर कोर कोई इसे दीपा रागको पुत्रवधू पाते हैं। एक रगका एक मोटा कपडा, पाण्या। (स्रो०) ४एर यही छद। इसप प्रत्येक चरणमें १०, ८ मी. १४ रिराम | चिडिया। यह हिमाल य ज गर्गेमें, पुमायूनसे र पर स ३० मात्रा होती है और मातमें एर जाप होता है। नेपाल और भूटान तक तालोंके बिगारे पाई जाती है। लोलपधून (स.नि.) म्पच्छन्दसे विनेगा सकार या साया देढ दायक गमग और भारति लायापी (स० प्रा०) पद पुष्परिणी यो ताव | मोरकी सी होती है। इसा अगला भाग पाला गौर जिमों जरोडा को जाय। राल होता है। मफेद चित्तियां मा होती है । इसको लोगयेश्मन (स.को०) रोलार बेरका घर। चौच भूरे रगती होतो ६ । जाड फादनाम यह मदानम गलाशुरु (स. पु०) भक्तपरि विल्यमगरको एक उतर आती है और कोडे मकोडे था पर राती है। नाम । कुत्तोंकी सहायतासे लोग हमका शिकार करते हैं। साध्य (स.वि.) सदनमाध्य, जो महनम या उन (हि.वि० ) १ विना हाथ पैरका, रंगडा लगा। लिसी झमटये शिया पाय। | २ विना पचेका पेट, हठ। लीलाधर (स.पु०)मोनापरनेशा स्थान। लुद (दि.३०) १ विना सर धड, श्यप । सोलापारमप्रिय (स.पु.) पर तान्त्रिाचाय। लु मा (६ि० वि०) १ जिसकी पूछ और पर झट गए शनि । दुर्गा) भक्तोंमें सपरिचित आरितार, दया उमाइ लिये गये हों। २ जिमी १० पर वार इनका नामोल्लेख है। हो। (३०) ३ साफ किये हुए -पेटे सूतको पिंडी, माली (हि.सा०) नोले रगरी, गोला। पुषही। लागेधान (स .) लागयमुपान । दयरन । 'उमाठा (हि • पु० ) यह साधा जिस पर छोर जन्ता "भय मानमासम्म दररित्रावरोविवम् । हुमा हो सुलगती लपटो। मात्य गरी मोक्ष धान मोक्तान लुमाठो (हि. खा० ) मुलगती या दासी मुलाया। (कथासरित्सा.) लुमाव (म.पु.) रसदार गूदा, लासा। तो (१० स्रो०) पर उन्द । सफ प्रत्पर चरणम लुमावदार (फा० वि०) १ -सदार, चिपचिपा । २ जिस में रमदार गूदा हो। १४ गुप या दोत है। उक् (स० पु० रोप, प्रशारणा पा समा। तुम भोर 14 (मजा.) एस गया । गेपन प्रभेद है। नगर (म.पु.) पर गिर। पदयो। 13( माम (म. पु०) समोर या मरो सिो म्यापर पु.) १ यह जिम फेरनस मिट्टी परतन मादि पर समा मा जाना , घमादार रोगा, पानिन । मापत्रिके मागमाता पिार पस मोरिसोयो पोरन २मागाए । पनवामिति काटफलिप दिया ज्ञाप पर। . सुना (दि.दि०) ऐमी अगद दो रना ना योग (it ) पवाय पान रोपने करोति ममप माना । मा। २सुगारगो। (उपमा (म.१०) ग्राम, पीर। सुंगा (दि. पु. ) शोहदा एमा। पुरमा (फ.पु.) पापा थममा नो सिमापा तुगो (हिना.) १ पोतोपान पर मान रपेरन मोर चमकारा रियामा दोवा है।