पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३३५

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380 लुका--लुवा लुका-आसाम प्रदेशमें प्रवाहित पक छोटी नदी। यह । पिया, तब यहादेः सरदार ११ ग्रामों के अधिकारी थे। पहाउसे निकल कर उत्तर-छार और जयन्ती शैल होती। उन्होने गरेजगजका शानुगत्य स्वीकार तथा यन्योधम्नी हुई चली गई है। जयन्तीका पवित्यजिलो पार पर यह । पत्र पर म्यानर किया था, इसी कारण निज सम्पत्ति श्रीहट जिलेके मृलाघृल प्रामये समीप सुरमा नदीमे योर मामन्त पद पाया था। १८५७ ई०के गदर में यहां के मिली है। सामन्त सरदारस्तिहको गोजराज के प्रति विशेष अनु. लुबाट ( हिं० पु०) एक प्रकारका पेड। इसके फल रक्त देर कर विद्रोहिदलने लुघासीको टूट फर तहस आमडे के दरावर ओर ग्वाने मे सटमीठे होते हैं। नहस कर डाला। राजाने विद्रोहोफा अत्याचार सहने हुए लुकाना (हि० कि० ) ऐसी जगह करना जहा कोई ठेस न | भी अविचलित भावमे यंगरेजोंका पक्ष समर्थन फिया सके, आडमें फरना, छिपाना। था। अगरेजगजने इस राजभक्तिके पुरस्कारस्वरूप लुकिविद्या (सं० स्त्री० ) १ गुप्तविद्या । २ रहस्यपूर्ण उन्हें राव बहादुरपी उपाधि, गजपरिच्छद तथा २ हजार भौतिक प्रक्रिया। रुपये टायकी एक जागीर प्रदान की। इसके सिवा लुकेश्वर (सं० लो०) एक तीर्थ का नाम । सनद द्वारा उन्द गोट लेने का अधिकार मी दिया गया। लुकारित (सं० वि०) लुक कायम्य यस्य तादृश इवा- | उनके पौत्र राय बहादुर क्षेत्रसिद्द १८८६ १० पैतृकराज. घरतीति लुकाय कि तनःक्त । अन्तहित, लुका एना! पद पर अधिष्टित थे। उनकी नाबालिगीमें अदरेजोंने राज- लुख (हि स्रो०) गर या सरपतकी तरहकी एफ घास। । कार्य चलाया 1 इस समय लुघासो गज्यकी वडी उन्नति लुखिया ( हि स्त्री० ) १ धूर्त स्त्री। २ वेश्या, रडी।। हुई थी। वर्तमान सरदारका नाम दीवान छत्रपति पुंश्चली, छिनाल। सिह है। ये १६०२ ६०में सिंहासनारूढ़ हुए। दली लगडा (हिंदु ) लगदा देसो। (Dally ) कालेज में इन्होंने शिक्षा पाई थी। इस राज्यमें लुगडी (हिं स्त्री०) लूगटी देखो। १७ ग्राम लगते हैं। जनसंख्या ६ हजारसे ऊपर है। लुगदा (हि. पु०) गीली वस्तुका गोला या पिडा, लौदा।। राजस्व २० हजार रुपया है। लुगदी (हि स्त्रा०) गीली वस्तुका पिड या गोला. छोटा २ उक राज्यका प्रधान नगर । यद अक्षा० २५५ बोदा। | उ० तथा देशा० ७५३५ पू०के मध्य कालपोसे जव्वल. लुगरी (हिं० स्त्री० ) फटी पुरानी धोतो। पुर जानेके रास्ते पर अवस्थित है । जनारया दो हजार- लुगाई (हि स्त्री०) खो, औरत । के लगभग है। यहां एक सुन्दर बाजार है । नगरमें राज लुगु-विहार और उड़ीसाके हजारीबाग जिलेका प प्रासाद और दुर्ग म्थापित है। उस दुर्ग राजाके १० बड़ा पहाड। यह अक्षा० २३ ४७ उ० तथा देशा० पैदल सिपाही और ७ मान तथा मानवाही सेना ८५.४२ पृ०के मध्य अवस्थित है। इस शैलपण्डसे | दल रहता है। उत्तर २२०० फुटको ऊंचाई पर एक प्राचीन दुर्गप्रति- लुङ्ग ( स० पु०) मातुल वृक्ष, विजौरा नीबूका पेड़ । ष्ठित है। वह स्थानीय प्राचीन समृद्धिका एकमात्र परि- लुङ्गमांत ( स० लो०) मातुलुङ्ग-मांस । चयस्थल है। लुगाम्स ( स० लो०) मातुलुङ्गाम्स। लुगासी-१ बुन्देलबएड विभागान्तर्गत एक देशीय सामन्त लुङ्ग प (सं० पु० ) मातुलन, विजौरा नीबू । राज्य। यह भारतगवर्मेण्ट और मध्यभारत एजेन्सीकी लुचकना ( क्रि०) दूसरेके हाथसे झटका दे पार ले देखरेख में परिचालित होता है। इसके दक्षिण-पश्चिम- लेना, झटकेसे छीनना। से दक्षिण पूर्व सीमा तक छत्रपुरराज्य तथा पूर्व, उत्तर लुचधाना ( हि ० कि० ) नोचवाना, उग्वड्याना, चौंथ- और पश्चिमांश हमीरपुर राज्य द्वारा परिवेष्टित है। । वाना। अंगरेजराजने जव वुन्देलखण्डका आधिपत्य लाम | लुच्चा (हि. वि०) १ दूसरेक हायसे वस्तु लुचक कर