पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३४

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रोम साम्राज्य युनानीद् त मिनियास यपतृताच्छासे सोरपे सदस्य, पासिंफोन वीक मनिका धनरत्न अपने व्यवहारमें सचिर लेनके पक्षपातो थे, किन्तु स्वदेशरत्स 37 लापा। इस काण्डमें उसका एक लदो लवाद नाय या क्लडियास विश्सक उद्दापनापूण चापय मधि हो न जवाज व गया। इसमे पिरहाम पासिफानपिह सकी। उस समय पिरहास धारे धार सन्यो मायरोम | ममझ मग्नोत्साह हुआ। की ओर अग्रसर हुआ। पीढिाल र भान दुसरे वा कस7 विडरियमो पिरहामरे विमक्ष पारक मानपके लिये टेरेटपम मा पहुचे। ! युद्धया की। घरिमेण्टम् नामा प्रसिद्ध स्थानमै दोनो रोमयाने फैदियों के वदना प्रस्ताय दून द्वारा पिरवाम गोको फोने आ कर आपममें जुट गई । घोरतर युद्ध के पास भेजा। पिरहासने रामोचित सम्मा दिखा र' । युद्धर्म पिरहासकै दो हाथी मारे गये भीर रोमन दूता नियासको अभिनन्दन स्पिा पनि चार हाथी रोम प हाय लगे। पिरहासका फौजे रण शियस अत्यन्त मत्यनिष्ठ आर विस्मशालाश। यह । सेबसे भाग पडी हु | पिरहास कह सेना या में मपन हाथी हर बाता धा। पिरहासन उसको हाथ चारिपाक माथ यूनान भाग गया। अगम नगर पर परनेफ ठिये साम, दाम, दण्ड और भेदस पाम लिया। अधिकार परत ममय एक स्रोको चलाइ एक हरस सिफाभूत हो न सकाप्रिनिशियन मत्त गज उसकी मृत्यु हुई थी। राज मूडके सामने मी मचलरूपसे सहा था। पिर। पुरा समयर्म रोगको ने ममचे इरती पर करना हामने निरुपाय हो घर कहा, शिरोम कैदियोंशे वह कर लिया। सबको दृषि राम पर पहो। मिश्र राना साटारिया या प्रति उत्मरम शामिल होका हुपन रठेमी फिलाडेर फामने दुत मेज र मित्रता स्थापित दिया और कहा, यदि 'सनेट सधिक प्रस्ताव पर सम्मत का। रोमके अधित प्रदेशक अत्रियासी तीन भागामें न हो, तब पैदा फिर लौट आयेंग।' सनटक सरस्थाने विमन हुए। सायचरित मासे साधका मस्ताय सम्वाकार कर (१) रोगवासी या रोमनगरको ३३ यिमिन जातिया। दिया। उत्सबफे उतम रोम को फिर रिहास । (२) रोम ओपनिगेशिक अधिवासा। प्रेम मेन दिए गये। (३) रोमक भधिकारमुक्त म्यूनिसिपल (स्यायत्त माके - धर्म पहले फिर युर भारम्भ हुना। नामन) चालित नगर । अस्कुलम नाम स्थान युद्ध में रोमक सैन्य पिर पराजित म्य निसिपल नगरयासियो सदम्योका पूर्ण अधि दो गए। ६००० रोमा सैनिक युरक्षेत्र में काम आये। कार था भीर व रोमवासियोफे साए वाणिज्य ता युद्धम नयी होन पर भी पिरहाम सिया नुकसान मतरिंग करने अधिकारो ये, सिवा इसके मित्र और को लाभ न हुआ। इसी समय पिरदास राज्य पर सहयोगी छोटे छाट रायो को भी रोमकशासनको गोश भामाण हुगा, जब यह पुरी बला पसापर सुविधा मिला था। चारो भोर स्वाधीन राजे साथ सिसिरी पासियोंने मा उसको सहायताको प्रार्थना महापाको प्रार्थना रोम का मिलना स्थापित हु। इस तरह रोमकोका को। इसमे घथहा कर पिरहामने रोमा पैदिको राज्यासाहटनर मित्ति पर कायम हुआ। मामाजिक सम्मान रोम भेन र मधिश प्रायना की। किन्तु यिधि-यरम्याप भी बहुन अशमै सुधार प्रणालीममसे रोमरामिारन उसे इनकार कर दिया। प्रतिष्ठित हु | निपो भोर व्ययमायो घोर दनेक मधि पिपासो सिसिल पाकर भामणशारी पाएँ कारा हुप । गुलामोंकी भा पिमा पिसा विषयमें मिशहराया। वि सिसिर्गवासी उसके मत्या / सुविधा यो गइ।मो समय कानूनी और सरकारी कामे चार म प्रपारित हुए। इस साद सा २७६ में सुधार होने लगा। उमने पहले पुरोहित दा कानून पहल फिर परम परगट भाया गौरीपरी भीर घमारा अनुगमन किया परत थे। किन्तु

  • अपिएन किनगर पा अधिकार पर योगायम' डियसन इस समय सरकारी और सामालिक पाया