पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३४४

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लुद्दार-लुता ३४६ साथ अभी मी सदायके साथ वाणिज्यकार्य परि | रपट । २ पता लाड़ी जिसका छोर दहकता हो, चारित होता है। रत्तो। ३ मछली पंसानेका पर प्रकारका जाल । १८८३ :०में चमाम पाहात्य सीमा तमें लुसाइ | लूप (स नि० ) रक्ष, लस्य र य । रुक्ष, रूखा। दल रागामारा दीमें सिपाहियोंकी दो नौकाओं पर लूघा (हि.पु०) पत्र पोदनेवाला, गोरकन । आक्रमण रिया। एष सिपाही माहत तथा एक मारे। लूट (दि. सो०)१ वजात् अपहरण, रिसीके मालका गये। धे लोग नौकास्थित धन तथा वनादि कर जबरदस्ती छीना जा, डकैती। २ र टनेसे मिला चम्पत हुए। रोगो की धारणा है, कि लुसाइ जातिने || हुआ माल ग.हत धन । अपने चिरशनु होलौंग जातिके ऊपर अङ्ग्रेजोंको कोप लूटक (दि. पु०) १ जवरदस्तो छीननेवाला, लटो दृष्टि पर, इसलिये सेन्दृजातिको अत्याचार करनेके याला। २ याकू, लुटेरा । ३ कान्ति हररोवाला शोभा लिये उमाहा था। अगरेजोंने गुप्त रोतिसे इस घातका | में बढ जानेवाला। पता लगा कर भी विश्वास नदी पिया। इस विरोधा | रसूद (दि.श्री०) लोगोंको मारने और उनका धन जातिसे छुपारा पानकी माशासे उहो फेवल | छाननेका व्यापार, डाया और गा लूट मार। सोमा स्थित पाको घर वृद्धि कर एव अगरेजी लूटना (दि. मि०) १ यलात् अपहरण करना, जवर पक्षके प्रामरासियोंको बन्दूक तथा बारूद द कर | दस्ती छीना।२ घरवाद करना तबाह करा।३ घोरपे अपनी शात्मरक्षाका उपाय निर्देश कर दिया था। १८८४ | से या अयायपूव क्सिीका धन दरण करना, अनुचित ६०१ जनवरी महीने में चट्टप्राम पायल्य प्रदेशके टेपुटो | रोसिसे विसीका माल लेता। ४ मोहित करना पशी कमिश्नरने रागामाटा एक दरवार तथा मेलाका अनुभूत करना। ४ बहुत अधिर मूल्य लेना , ठगना। छान पिया। उसमें प्राय समोर साइ सरगण इक लूत-यहूदियोंक एक पुराने पैगम्यरका नाम । हुए थे। पेयल दो प्रधान हेउलोग सदार उपस्थित लूता (स. स्त्री० ) ल नातीति बाहुलकात् तन, गुणा नदी हुए। उन घपमें भामाग तथा चट्टग्राम सीमारतमें मात्रश्च । १ कोरविशेष, मकडा । पयाय-त तुमय ए साइयों के पुनरायमणका घला हुआ, पितु ये लोग | ऊणनाभ मर मर्कर, उतिका, उर्णनाम, शना, फिर कभी भी उपाय करने में साहस नहीं कर सके। तनपाय । २रोगविशेष । पर्याय--मगमण, पृया। लदार (हि.पु.)१ लोहेका काम करनेवास, लोहको। (राजनि) वाजे बनानेवाला । २ यद ज्ञाति जो रोहेकी चाले । लूनाप काटनेसे यद रोग होता है, इमीसे इसको दशाती है। लूनारोग कहते हैं । वैद्याशास्त्रमें लूताको उत्पत्ति, वगन लुहारिन् (दि० स्त्री० ) लुहार जातिका यो। और मोपधादिका विषय रिखा है। पर दिन राजा लहारी (दि.सा.) १लु हार जातिको स्त्री। २ लाहे विश्वामित्र तिष्ठ मुनिये पाश्रममें गये। यहा दोनों में को यस्तु बनानमा काम। वातत्रात चलने एगी। वरिष्ठ विश्वामित्र पर घहे दिगडे। ल (दि. खी०) गरमोके दिनोंका तपा हुया, गरम । छोघसे पशिष्ठये गारम तीक्ष्ण मोविशिष्ट पमीना रप दयाशरपट-मा मोती कने रगा। गायफे लिपे जो घास घदा कार पर जमा (हि. खो०)। मनिका माटा, मागणी लपट ।। वो गा पी, उमी पर पमीना गिरा। पीछे उसीले मोर २पतला लकड़ी जिमशोर दहपता हुआ दो, रसा। मारकी पान शारोली भयङ्कर लूता उत्पन्न हुई। मुनि ३ गरमीप दिनोंको तपो दया, तप्त यायुका फोका जो के पसीने घास पर गिरनसे यह कीट उम्पनमा था शरीरमें रपरकी सग लगे, ल। ४ हा या तारा | सास इसका टूता नाम हुमा । नारा विर बहुरा बना होता । मन्द युनिघाले मा (दि. पु.) १ अपि ज्याग, भाग या चिकित्सा सी गति सदसा समय नहीं सात। Tol, .