पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३४७

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लूता-लुनावाड़ है। नस्य, सञ्जन, अरञ्जन, पान, चूम, अबपीडन. गोधड़ा उपनिमाग तथा पश्चिममें महीकान्थाले इदर कवलग्रह, वमन और विरेचन इन सबका भी दोपके राज्य और रेवावांथाके अन्तर्गत बालासिनार राज्य है। अनुसार घ्यवहार करना उचित है। जोंक द्वारा रक्त इसमें लू नागड नामक १ शहर और ३१८ ग्राम लगते मोक्षण करानेसे भी लाभ होता है । (सुश्रुत कल्प० ८ अ०) | हैं । जनसरपा १६०० ई०के पहले ६० हजारग्ने ऊपर थी। ३ पिपीलिका, च्यू टी। अभी सिर्पा ८३ हजार ग्ह गई है। इसका कारण १८६६ ल ता (दि० पु० ) लकडी जिसका एक सिरा जलता हो, १६०० का दुर्भिक्ष है। उस दुर्भिक्षमे सैकडे पोछे ८८ लु आठा। मनुष्य परालकालके गालमें पतित हुए थे । हिन्दूको ल तानन्तु (रा० स्त्री० ) लूतायास्तन्तुः । लू तामा तन्तु, सत्या मुसलमानसे ज्यादा है। हिन्दुओंम ब्राह्मण, गज मकडाका जाल। पूत और फुनवी प्रधान है। ल नामर्कटक (सं० पु०) १ वानरश्रेणीभेद, बंदरकी एक | मदोनदी इस राज्यमे वहता है। वीच योचमे बडे जाति। २ अरव देशीय यूधिकापुष्प, जुही। बडे बांध है । कृप नादि चोद कर लोग तो जारी करते ल तारि ( स० पु० ) लू ताया आरिः । दुग्धफेनी क्षुप, | हैं । जलामाव दूर करनेका यही एकमात्र उपाय है। गुज- गोजापणी। रातसे मालव तक एक बड़ो सड़क चली गई है। इससे लूतिका (म० स्त्री०) ल तैव स्वार्थे कन टापि अत इत्वं । वाणिज्य व्यवसायको बडी उन्नति हुई है। गेह. उरट और मटक, मकडी। सेगुनकाप्ट यहाका प्रधान वाणिज्य द्रव्य है। गुजगतक ल ती ( स० स्त्री० ) पतली लकडी जिसका एक सिरा अन्यान्य स्थानों की अपेक्षा इस स्थानका जलवायु बहुत गलता हो, ल आठो। कुछ शीतल है। अरकं मिवा यहा और कोई रोग नहीं ल न (संत्रि०) १ मिम, कटा हुआ । २ लोन देखो। देखा जाता। लू नक ( स० पु०) लू न एव स्वार्थे कन् । १ सञ्जीसार। अहिलबाड़-पत्तन राजपूत-राजवशसे यहाँका २ अमलोनीका साग। राजवश उत्पन्न हुआ है। प्रवाद है, कि इस राजवंशके लू नकरण-बीकानेर राज्यके प्रतिष्टाना वीकाजीके पुत्र ।। पूर्वपुरुषोंने १२२५ ई० में वीरपुर नगरमें राजधानी बसाई बीकाजीके दो पुत्र थे। लू नकरण और गष्टसी । बीका- थो । पोछे १४३४ ई०में उस वशके कोई गाजा लुनावाड जीके परलोकवास होने पर राजाओंकी रीतिके अनुसार में राजपाट उठा ले गये। अधिक सस्मय है, कि गुज- उनके बड़े पुत्र सिंहासन पर बैठे । गजा लू नकरणने | रात प्रदेशमे जव मुसलमान-राजाओंफा प्रभाव फैला, तर अपने राज्यकी सीमा बढ़ानेके लिये भाटियोंके अधिकृत वे लोग राज्यम्र हो महीनदी पार कर यहा आनेको वाध्य कितने ही देशों पर अपना अधिकार कर लिया था।| हुए । इसके बाद यहांके सामन्त राजगण गायकवाड गौर इनके बडे पुबने एक स्वतन्त्र राज्यकी स्थापना की और | सिन्देराजके अधीन सामन्तरूपमें राज्यशासन करने लगे। वह पिताकी आमासे वहीं जा कर रहने लगा। लू नकरण- १८१६ ईमे अगरेज-गवर्मेण्टने सिन्देराजका कर्तत्व को मृत्यु संवत् १५६६ में हुई। अनुमोदन किया था । १८२५ ई मे लूनावाड महीकान्धा- ल नावाड़-बम्बई प्रेसिडेन्सीके गुजरात प्रदेशके अन्तर्गत | की पोलिटिकल एजेन्सीके अन्तर्भुक्त हुआ। १८३१ ई०में पोलिटिकल एजेन्सीका एक देशी सामन्तराज्य । यह | सिन्देराजने पाचमहाल जिलेके साथ इस राज्यका अक्षा० २० पू० से २३ १६३० तथा देशा० ७३२१ से शासन-कत्तत्व भी अगरेज गवर्मेण्टके हाथ सौंपा। ७३ ४७ पृ०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ३८८ महाराणा वखत् (भक्त) सिंहजो १८८० ईमें राज्या वर्गमील है। इसके उत्तर राजपूतानेके अन्तर्गत डूंगर- भिषिक्त हुए। ये सोलकी व शीय राजपूत हैं। इनका पुर सामन्त-राज्य, पूर्वमें रेवाकान्थाले अन्तर्गत सुथ पूरा नाम है, एच, एच महाराणा श्री सर वखतसिंहजो और कछाना राज्य, दक्षिणमें पांचमहालके अन्तर्गत | दलेलसिंहजी के, सी, आई, ई। इन्हे ११ तोपोंकी