पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३४८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


टूनापाड-रेहन सलामी मिलती है और गोद लेनेका अधिकार है।। मध्यमारत रेलयेकी गोधडा शाके अन्तिम स्टेशन पालिटिक्ल पजेएन्की बिना अनुमतिके पे अपरायी गरो नगरसे लूनावाट तक पक पको सहक दौड गई प्रजा प्रागदण्डी सना साने। राजस कुल है। यहा पानम नदीके किनारे अगस्त और फरवरी मिला फर दो लाख रूपयेरे करीब है 1 दृटिश सरकार महीने में दो मेले लगते हैं। शहरमें पैदपाना, विद्यालय और वडोदा गायकवाद दोनों को मिरा कर १४२३२ , और चित्मिाल्य है। रु. पर देना पडता है। रानसेन्यतया २०४ है। राज्य | 0 नि (स. स्त्री०) लू चिन् ( ऋकारल्बादिम्यरचिनिष्ट भरने १२ विद्यारय २ मस्पतार और १कारागार है। यद्मवतीति वक्तव्यं । पा 5RW) इत्यस्य धासिकोक्त्या महाराणाके एक सुपुत्र हैं निनका नाम महाराना कुमार) तस्य न । १ छेद सूराम। २ नोहि, धान । साहब श्री रणनिसिहती है। |लम ( स० लो०) लूयते इति ल बाहुलकान् मक् । २ उक साम तराज्यमा प्रघास गर। यह अक्षा लागूल, पूछ। २३ ८ उ० तथा देश/०७३ ३६ पू०के मध्य स्थित लम (हि.पु.) १ सम्पूर्ण नातिका पद राग। इसमें सब है। पास ख्या १० हजारसे ऊपर है। शुद्ध स्वर लगते हैं। इस गाने का समय रात ११ दड १४३४ में राणा भोमसि हनीने इस नगरको से १५ दण्ड तक है । यह मेघरागका पुन कहा गया बसाया। स्थानीय प्रवाद ,नि एक दिन राणा मही- है। (स्त्रो०)२ कलावतूको लच्छो। नदी पार पर पिकार खेलने गये। स योगवश वनमें राह|कम (२००) पपडा बुननेका परचा। भूल गये जिससे उनका दल उनसे अलग हो गया। बहुन लू मर (हि. वि०) सयाना, जवा। देर भटक्ने हुए राणा पफ साधुके आश्रममे पहुचे। ल मविप (स.पु०)ल मे लागुते विषमस्य। शिका, साघुको दण्डवत् पर ये पुटी। एक बगरमैं दो | विच्छू। रहे। साधुने योगवलसे रानाको दोनता तान कर मन हो लू ला (हि. वि०) जिसका हाथ कट गया हो या मन उनको साधुताको धन्यवाद दिया। पोछे योगमा । काम हो गया हो, लु जा। होने पर 4 रामाको टोका आदेश दिया और पदा, लस (वि० वि० मूर्ख, येरकूरू। 'तुम्हारा और तुम्हारे व शधरोंका माग्य वडाह तेज है लू सन (हि. पु०) एक प्रकारका क्लदार पेड। तुम इस बनम एक नगर घमा कर राज्य शासन करो। र हसूवत्त (स.पु.) बौद्धमेद । कल मयेरे यहासे पूरवकी ओर जाने पर जहा तुम्द एक रेड (दि. पु.) मलको यत्तानो उत्सग समय बध शराम मिलेगा वहीं पर नगर स्थापन करना। राजा | नाती है, बंधा मल। 'सन्यासोंके क्यनानुमार परवशो ओर चले। लेंडी (हि.स्रो०)१ मलको पत्तो जो उत्साके समय दूर मात पर गुल्मलताके भीतरसे उदाने एक Tो ) वध जाती है, वधा मल । २ यकरो या ऊटकी मंगनी, निरस्ते देखा और पल्लमसे उसको उसी जगह मार करो या ऊरया मल जोय धो गोलियों के आकारमें गिराया। पीछे रानाने उसी जगह पर राजप्रासाद पन निलता है।। ३२ हाथ रम्बो रस्सो। इसरे एक वाया। योगियर लूणेश्वरके आसा थे। रानाने उम | सिरे पर मुदो और दूसरे सिरे पर घुए। होता है। यह साधुके प्रति भक्ति दिपला र नगरका लूनागढ़ नाम घोट की दुममें चूतडों परसे रगाइजाती है। एखा। नगरके दरकूरी द्वारक यदिमाग, याज भा| रे चोरी (हि. स्त्री०) चौपायोंको दाना या चारा विगने लूणेश्यका मन्दिर विद्यमान है। का बरतन। - । . , १६वीं सदीक मारम्ममें यह नगर गुजरात गौर मारयस ( पु. ) शाशका ताल जो प्रकाशको रिनोको को वाणिज्य समृझिसे परिपूर्ण हो उठा। उस साय| पास या केंद्रीभूत करे। - - - यहा यच्छे अच्छे मरन शव कात थे। घम्बा बडौदा (इड (हि • स्त्रो०) भेदों या दूसरे चौपायों मुद। Vol 1 60 साप.. जाप्र५-१