पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३४९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


५४ लेहड़ा बेखक लेहड़ा (हि.पु०) मुंड, दल । नगरके चारों ओर अपना शासन फैलाया था । यही ले (हिं अव्य ) २ आरम्म हो कर, शुभ हो कर। स्थान उस समय उनकी राजधानी सममा जाना था। (क्रि०) • लेना देखा। पीछे सिन्धु प्रदेश कलहोराचंशीय राजाओंने उन्हें लेई (हिं० स्त्री०) र पानी में घुले हुप किसी चूर्णशे तख्त परमे उतार दिया। १७६२१० में महम्मद नदोर्ड गाढ़ा कर बनाया हुआ लमीला पदार्थ जिले उगली- मनग्रामे राजपाट उठा ले गये । मित्र शासनाधिकार उठा कर चाट सके, अवलेह । २आटेको भून कर उसमे में यहां वास पान मृमागोंका गासनरेन्द्र प्रतिष्ठित हा शरदन मिला कर गाढ़ा किया हुआ पदार्थ जो वाया था। १८४६ मे अंगरेजगजनेस नगरको जीत कर जाता है, लपसी। ३ घुला हुआ मादा जो भाग पर यहां लेगा जिलेका चित्रासदर म्यापन दिया। पीछे पका कर गाढा और लनदार किया गया हो और जो १८६१० इस जिलेरो नोड कर मनरके साथ लेगा कागज यादि चिपकानेके काममे आये । ४ नुरवी मिला तहसील देराइममाइल खाँके बलमुक्ताई है। अफगा- हमा बरीका चूना जो गाढ़ा घोला जाता है और ई टोकरी निम्नानके इस प्रदेशका नमो बाणिज्य स्री नगर परि- जोडाइमें काम आता है। चालित होता है। शहरमें एक अस्पताल और म्युनिनि- लेंडया-पाव प्रदेश के देरा इस्माइल बा जिले के अन्तर्गत पल पललो बफ्युिटर मिडिल स्कृर है। एक तहसील। यह यक्षा० ३०३६ से २१ २४ उ० लंबावर ( पु.) वारयान, वक्तृता । तथा देगा० ७०४ से .५० पू०के मध्य अवस्थित ले कुचरवाडी ( फा० स्त्री०) र लेक्चर देने की क्रिया । है। भूपरिमाण २४१७ वगमील और जनसंख्या टेढ लाज लेपचार ( पु०) वह जो लेबर देता हो, व्यान्धाता । के करीब है। इसमें २ शहर और ११८ प्राम लगते हैं। लेञ्चिक (२० पु० ).एक बौद्धा नाम । यह म्यान बाल कामय रूपर भूमिले परिपूर्ण है। लेङ्गपुन-पासाम प्रदेश जयन्ती शैलप्रान्त और नवगांव सिन्धु-प्रवाहित प्रदेशांश कुछ हरियाली दिम्बाई देती है। सीमान्त पर स्थित एक गण्डग्राम । यहाँ पर हाट लगती इस उच्च भूमिमें गोचारणके सिवा सेतीवारी नहीं होती है। वहा पर्वतवासी स्मन-रेनतेन जातिके लोग पर्वत- बाल कामय 'यल' भूमिमे कृप खनन कर जगह जगह जान दम्यादि बेचने आते हैं। येती-बारीका बन्दोवस्त हुआ है। इससे मी निम्न / लेख (सं० पु.) लिख्यते इति लिख पञ्। १ देव, देवता । काचि' या सिन्धु सन्तवत्तों भूमिभागसे ग्वती होती है। २लिपि, लिग्वे हुए दाक्षर । लिम्बी हुई दात । ४ लिग्या मही, पर मिन्धुनदीको वासे बद अक्सर इव जाया चट, लिम्बाई । ५ लेता, दिसाद किताद । मरती है। इस विमागमे मूंज नामक घास बहुत उप-लेव ( हि खो०) लकीर, पछी पात । जती है। लेखक (सं० पु०) लिम्वतीति लिम्व एबुल् । १ लेखनकर्ता, २ उक्त तहसीला पक प्रधान नगर । यह अक्षा लिन्ननेवाला। पर्याय-लिपिकर, अक्षरबन, अक्षरचुञ्चु, ३०.५८ ३० तथा देशा० ७०.५६ पू०के मध्य विस्तृत, बोलक, फरक, समोपण्य, करप्रणी, वणीं। (जटाधर ) है। सिन्धुनद प्राचीन खानके वार किनारे अवस्थित मत्स्यपुराणके १८८३ यध्यायमे लिखा है, कि जो नदीकी गान बदल जाने से यमो वर्तमान नहीगर्भ इस सभी देशोंके यक्षगेसे जानकार है तथा सर्वशास्त्रार्थ- नगरसे कुछ पश्चिम बहता है। म्युनिसपलिटो रहनेसे ही हैं, वे ही राज्यके लेखक होगे। जो अक्षरोंको नगरदे प्राचीन सौन्दर्यमें घना नहीं पहुंचा है, वरं दिनों समानभाव समानश्रेणीमें अच्छी तरह लिख सकते हैं, दिन इसकी उन्नति होती जा रही है। । अर्थात् जो सब अक्षर लिखे जायगे. वे समान होंगे, १६वीं सदीमें देगगाजी बों के प्रसिद्ध मोरहानोवंशीय । पंक्ति ठोक रहेगी तथा अक्षर देग्नने में मुन्दरमाल न पड़ेगे घलूच ज्ञातीय सरदार माल खान शायद इस नगरको। ये ही लेन्द्रकश्रेष्ठ हैं। पसाया है। उनके घंशधरोंने प्रायः दो सदी तक इस चाणक्यसंग्रहमें लेखकके लक्षण इस प्रकार कहे गये