पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३६९

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लोकोक्ति-लोचपस्तक कामना । २ सांसारिक अभ्युदयकी कामना, प्रतिष्ठा लोचन (Fi० क्लो०) लोन्यतेऽनेनेति लोच-ल्युट । १ चक्ष, नेत्र । और यगको कामना। गरुडपुराणमें लिया है, कि वकान्त और पद्मामलोचन लोकोक्ति (रां० स्त्रो०) १ कहावत, मसल 1 २ काय होनसे सुप, मजारकी तरह होनसे पापी, मधुविद् व्यर्ण वह अलङ्कार जिससे किसी लोकोक्तिका प्रयोग कर होनेसे महाशय, केकराक्ष (ऐंचा) होनेसे क्रूर, हरिणकी कुछ रोचकता या चमत्कार लाया जाय। तरद होनेसे पापी, कुटिल होनेसे कर, गजवक्ष होनेस लोकोत्तर ( स० वि० ) १ असामान्य, बलौतिक । | सेनापति, गम्भीर-लोचन होने प्रभु. स्ट चक्ष होनेसे २ आदर्शपुरुष। ३ राजा। मन्त्री, नीलोत्पलाक्ष होनेसे विद्वान् , श्यावचक्ष होने. लोकोत्तरवादिन् ( 410 पु०) वौद्धमम्प्रदायभेट । से सौभाग्यशाली, कृपणतारा विशिष्ट होने से चक्ष का लोकोद्धार (स० ली०) तीर्थ मेन । दह नीर्था तिलोम्पूजिन उत्पाटक, मण्डलाक्ष होनेसे पापी और दीर्घ टोबन दोने- है। इसमें स्नान करनेसे अपने सभी लोगीका उहार से निःस्व (दरिद्र) होता है। होता है। २जीरक, जीरा। ३गवान, भरोया। लोक्य (न० दि० ) १ लोकान्यित । २ विस्तृतस्थानयुक्त । लोचनकार-लोचन नामक प्रसिद्ध अल द्वार प्रणेता । ३ युद्धा परिकन स्थानयुक। ४ जगद्व्याप्त । साहित्यदर्पण (२२२१५) में इनका नामोल्लेम है। यष्ट लोभ्यता (म' स्त्री० ) श्रेष्ट लोक्प्राप्ति। तेरे इन्हें अभिनवगुप्त समझते हैं। लोवर (हि.पु.) १ नाईको औजार । २ लदारों या लोचनपथ (सं० पु० ) लोचनस्य पन्था' । १ नेवाय, __बढइयों बादिके लोहेले यौजार । दृष्टिमार्ग। लार (सं० पु. ) मृपिण्ड, ढेला। लोचनपुर-बङ्गालके वालेश्वर जिलान्तर्गत पफ वन्दर । लोग (हिं० पु०) जन, मनुष्य । यह कासवाम नदीके किनारे अवस्थित है। अभी ग्रह लोगचिरकी (हि. स्त्री०) एक प्रकारका फूल। वन्दर चारों ओर जङ्गलसे घिर गया है। लागाई (हिंस्त्रो०) इस शब्दना शुरूप प्रायः 'लगाई लोचनहित (सं० त्रि०) चक्ष का हतार । ही माना जाता है। लोचनहिता (सं० स्त्री०) लोचनाभ्यां हिता । तुत्थाजन, लोगाक्ष ( स० पु० ) पण्डितभेद । लोगाक्षि देखो। तृतिया। लोगेप्टका (सस्त्री० ) मृत्तिकानिर्मित इष्टकभेद । लोचना ( स ० स्त्री०) लोचते पर्यालोचयतीति लोच ल्यु लोध ( स० क्ली० ) लोच्यते पर्यालोव यति मुखदुःपादि टाप् । रोचना, बुद्धशक्तिभेद । कमिति लोच यच । अधु, यांस। लोचना ( हि क्रि०) १ एक प्रकाशित करना । २रुवि लोच (हि पु० ) १ लचलचाहट, लचक । २ कोमलता ।। उत्पन्न करना। ३ अभिलापा करना। ४ शाभिन ३ अच्छा ढंग । ४ अभिलापा । ५ जैन-साधुओंका अपने होना। ५ ललचना, तरसना । ( पु०) ६ नाई, हजाम । शि वालोयो उचाइना, लुचन । लोचनामय ( स० पु० ) लोचनयोरामयः । चक्ष रोग- विशेष, बाराका एक रोग। चतरोग देखो। लोचक ( स ० पु० ) लोच्यते इनि लोच-ण्वुल । १ मांस- | लोचनो (स० स्त्री० ) लोच्यतेऽसौ लोच-ल्युट, डीप् । पिण्ड, लोथडा। २ अलिनारमा, आंखको पुनली।। ३ जल, काजल । ४ स्त्रियोंके ललाटाभरण, एक गहना लोचणात्स ( स० क्ली० ) नगरभेट। इसका दृसग नाम महाश्रवणिका, गोरखमुण्डो । जिसे स्त्रिया ललाटमे पहनती हैं। ५ कदली, केला ।। लवनीत्स है। ६ नीट यन्त्र, नीला कपडा । ७ निवु द्वि, नासमझ लोचमर्कर ( स० पु०) लोचमस्तक, रुद्रजटा । भादमी । ८८र्णपुर, कालमें पानने का एक गहना, करना लोचमस्तक ( स० पु० ) लोचं दृश्यं मम्तकं मयूगिरो । फल । मुझे, मरोड़फलो नामक लना । १० भ्रूश्लय यम्य। १ मयूरशिखौषध, रुद्वजटा। पर्याय-खराश्या, मौका ढोला चमड़ा। ११ निमोक, केचुल। ' कारवी, दीप्य, मयूर, लोचमर्कट । २ अजमोदा।