पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३७

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सोम-साम्राज्य माय मीपण दूफान मे पड कर ममी जङ्गीजहाज इब उसकी परवाह न कर वह कार्थेज चला गया। वहां गये। इसके जहाजियो ने भी सागरगर्मम स्थान लिया। जानेसे उम पर जो अमानुपिक अत्याचार हुआ, उसका ३६४ जली जहामि केवल ८० जहाज रोम लौटे। इसके वर्णन करनेसे हृदय कांप उठता है, रोंगटे गई हो जाते साथ कुछफीजे मी आई। है। कार्थे जिय कोधिन हो घोर नृगमताके साथ उसको इस काण्ड रोम्क निरुत्माह नही हुए वर वडे, मार डाला। पहले आग्योकी पपनियां काट कर वह उत्साहसे जली जहाजोंके बनाने प्रवृत्त हुए। तीन भीषण धृपमें डाल दिया गया । पीछे एक बडे वक्ममें महीने में २२० जहाज बने । रोमन फिर जलपथसं चले। चोग्वे चोग्वे मुइयां गाड कर उसमें चे उमको दुका देते मास २५३ वर्ष पहले रोमक कन्सल कार्थेजके किनारे थे। स्वदेशवत्सल रेण्डलसने ऐसे भीषण अत्याचारको लूट पाट करने लगे। यह युद्धमे विजय प्राप्त कर लौट सह्य करते हुप अपने प्राण गंवा दिये। रहा था, ऐसे समय तृकानमे पड़ कर सब जहाज इव इस निष्ठुरताकी बीमत्म कहानी मुन कर रोमक गये । पालिनस अन्तरीपके किनारे यह काण्ड हुआ था। कार्थेजको ध्वंस करने पर दृढ़प्रनिन हुए और शीघ्र ही रोमक सैन्य फिर सिसिलीमें युद्ध करने लगा । २००८ उन्होंने इटलीके अन्तर्गत कार्थेजीय नगर लिलिवियम वर्ग ईसामे पूर्व रोमक प्रोकन्सल मेटेलस पानामास पर घेरा डाल दिया। दूसरी ओर कन्मल क्लडियसने नामक म्यानमे एक मीपण गुइये जयी हुआ। २००००/ जलपयसे डे,पानन नामक स्थानमें कार्थे जिय जड़ी- कार्यालय सैनिक रणस्थलमै मारे गये। १०४ हाथी जहाजा पर आक्रमण किया । पहले युद्धमे रोमकोंके जय रोमांक हाथ लगे। इस युद्धमें जबी हो कर बडे प्राप्त करने पर जलयुक्त लडियसकी मूर्खतासे रोमकों की उत्साहसे फिर २०० जदी-जहाज तैयार किये गये। अब प्रायः हार हो हुई । आर्टिनियस कलेटिनस उसकी जगह बाजिय रोमका साथ सन्धि करने पर तैयार हुए। कन्सल नियुक्त हुआ । दुसरे कन्सल सि० जुनियस रेण्डलस पहलेले युद्धमे बहा कैद था। गेमक-उतिहासमै जलीजहाज ले कर लिलिवियाम नगरमें रोमक फौजोंके उसके त्रीरत्व, सत्यनिष्टता तथा स्वदेशप्रेम स्वर्णाक्षरम | महायतार्थ जा रहा था। राइमे तूफानमें पड कर उसके लिसे हुए हैं। कार्थेजियान अपने दूतोंके साथ रेण्डलस । सव जङ्गीजहाजे' इव गये । फेवल दो जहाजे बच गये को रोम भेज दिया मोर कहा, यदि आप सन्धि न करा थे । इस तरह दैवविडम्बनले तीन वार रोमक जडी. सके तो फिर काजियन जेलमे चले आये। निमीक जहाज सागरगर्भमें डूब गये। अब रोमाने जलयुद्धको रेण्डलस सम्मत हुभा। लजाने मारे पहले रेण्डलस आरसे मन हटा कर स्थल युद्धका और ध्यान लगाया। रोमकी चहारदीवारीके भीतर घुसता न था, किन्त एस समय कायें जमे एक वीर पुरुषका जन्म हुआ। फायवश जाना पड़ा। वीरहदय रेण्डलमके पान की ही इसका नाम था-हमिलकार वार्ता। यही इतिहासके गरजस कार्थे जियो के साथ सन्धि करने पर रोमक प्रसिद्ध हानिवलक्षा पिता है । ईसासे २४७ वर्ष पूर्व वह तय्यार हुप । किन्तु रेण्डलसने कहा था-'भाइयों, सिसिलीमे कार्थ जिय सैन्यके सेनापति हो कर गया, मेरे दम तुच्छ गरीर के लिये रोमकोंका गौरव नष्ट कर उस समय वह नरुण था । वह युद्धक्षेत्रमे सीधे न जा कर कमी मी सन्धि न करना । रामके गौरवसे ही मेरा भी हाकेटपर्वतके नौवे नोचे सैन्य ले कर गया । इस गौरव है।" सेनेटके सभ्योने कहा-"याप कार्थेज मत स्थानमै उनि ऐसी व्यूह रचना की और एक वर्ग तक जाइये ।" इसके बाद महन्त्र सहन्न व्यक्तियोंने कहा, : वही टिका रहा-कि उसके अद्भुत कार्यको शत्र मित्र विदेशमे बलपूर्वक पकठे हुए लोगों के शपथका पालन न सभी सराहने लगे। इस सुरक्षित व्यूहसे वह धीरे धारे करनेसे पाप नही होता । किन्तु सत्यसन्ध स्वदेश, रामक फौजाकी ओर दौड़ा। रोमक फौजें उसकी वाधा बत्मल रेएडन्लस यह बात जानता था, कि वहां लौट दे न सकी। हामिलकर आगे बढ़ा और उसने उपा जानेमे मुझ पर समानुषिक अत्याचार होगा। फिर भी' नामक निकटका एविषसा नामक पहाडी नगर पर